नेताओं की घटती संपत्ति, पत्नियों की बढ़ती पूंजी
- धन्ना राम चौधरी

- 17 अप्रैल
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले दाखिल किए गए चुनावी हलफनामों ने राज्य की राजनीति में एक दिलचस्प ट्रेंड को उजागर किया है। जहां कई प्रमुख नेताओं की व्यक्तिगत संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं उनकी पत्नियों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। यह पैटर्न सत्तारूढ़ द्रमुक (डीएमके) और विपक्षी अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) दोनों ही दलों के शीर्ष नेताओं में समान रूप से सामने आया है।
मुख्यमंत्री की संपत्ति में कमी
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अपने हलफनामे में 2026 के लिए कुल संपत्ति 6.2 करोड़ रुपये घोषित की है, जो 2021 में घोषित 7.2 करोड़ रुपये से एक करोड़ रुपये कम है। इस गिरावट का मुख्य कारण ‘अंजुगम पब्लिकेशन्स’ से जुड़ी एक जमीन से अलगाव बताया जा रहा है। यह वही 1,825 वर्गफुट का भूखंड है, जहां द्रमुक का मुखपत्र ‘मुरासोली’ संचालित होता है। इस भूमि को लेकर पूर्व में राजनीतिक विवाद भी सामने आ चुका है।
उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति में 25 प्रतिशत गिरावट
उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति में भी लगभग 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसका प्रमुख कारण फिल्म निर्माण कंपनी ‘रेड जायंट मूवीज’ से उनका अलग होना बताया गया है। अब इस कंपनी का संचालन उनके पुत्र इनबन उदयनिधि के हाथों में है, जबकि उनकी पत्नी किरुथिगा निवेशक के रूप में जुड़ी हुई हैं।
वरिष्ठ मंत्रियों पर भी असर
द्रमुक के वरिष्ठ मंत्री ई.वी. वेलु की संपत्ति घटकर 13.2 करोड़ रुपये रह गई है। 2021 में उनके द्वारा अरुनई मोटर फाइनेंस और काविन प्रोडक्ट्स में किया गया लगभग 2.8 करोड़ रुपये का निवेश अब हलफनामे में शामिल नहीं है। यह बदलाव 2023 में आयकर छापों के बाद सामने आया है।
इसी तरह, मंत्री आई. पेरियासामी की संपत्ति 5.9 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। उनके पहले के निवेश ‘इरुल्लापा मिल्स’ में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच चल रही है। उनके वाहन संग्रह में भी कमी आई है और अब उनके पास केवल एक टोयोटा ग्लांजा कार ही शेष है।
विपक्षी नेताओं की संपत्ति में बदलाव
अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री सेल्लूर के. राजू की संपत्ति घटकर लगभग 50 लाख रुपये रह गई है। पहले उन्होंने ‘जेजे फार्मा’ और ‘जेजे मेडिकल्स’ में करीब 80 लाख रुपये का निवेश किया था, जो अब समाप्त हो चुका है। वहीं, पार्टी महासचिव एडपाडी के. पलनीस्वामी की व्यक्तिगत संपत्ति लगभग स्थिर रही है—2021 में 47 लाख रुपये से बढ़कर 2026 में 50 लाख रुपये। हालांकि, उनकी पत्नी की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 5.6 करोड़ रुपये हो गई है। इसमें इरोड स्थित एक फार्महाउस भी शामिल है।
बढ़ती पत्नियों की संपत्ति—नई प्रवृत्ति
इन हलफनामों से स्पष्ट होता है कि जहां नेताओं की घोषित संपत्ति में कमी आई है, वहीं उनके परिवार, विशेषकर पत्नियों की संपत्ति में वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रवृत्ति केवल एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ और विपक्ष दोनों में समान रूप से देखी जा रही है।
राजनीतिक और कानूनी सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति के इस पुनर्वितरण से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं। चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू बन सकता है, खासकर तब जब निवेश, स्वामित्व और नियंत्रण के बीच अंतर स्पष्ट करना जरूरी हो। तमिलनाडु की सियासत में यह नया ट्रेंड आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
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