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तीसरी बार निर्विरोध बने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 17
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देश की संसदीय परंपराओं में एक महत्वपूर्ण क्षण उस समय दर्ज हुआ जब हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का उपसभापति लगातार तीसरी बार निर्विरोध चुन लिया गया। यह उपलब्धि भारतीय संसदीय इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण मानी जा रही है, जहां किसी सदस्य को इस संवैधानिक पद पर लगातार तीन बार बिना किसी मुकाबले के चयनित किया गया हो। चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया के दौरान सदन में गरिमा और सहमति का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने इस चयन की राजनीतिक और संवैधानिक महत्ता को और भी रेखांकित किया। उन्होंने सदन में हरिवंश को बधाई देते हुए उनके अनुभव और संतुलित नेतृत्व की सराहना की।


राज्यसभा के उपसभापति का पद सदन की कार्यवाही को सुचारू और निष्पक्ष रूप से संचालित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति ही सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं और विभिन्न संसदीय प्रक्रियाओं को संतुलित ढंग से आगे बढ़ाते हैं। ऐसे में हरिवंश का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना, उनके प्रति सदन के व्यापक विश्वास को दर्शाता है। इस चुनाव की एक उल्लेखनीय बात यह रही कि विपक्ष की ओर से कोई भी प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा गया। परिणामस्वरूप, चुनाव निर्विरोध संपन्न हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति केवल विपक्ष की रणनीतिक चुप्पी ही नहीं, बल्कि एक व्यापक सहमति का संकेत भी हो सकती है, जो संसदीय संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से बनाई जाती है। हरिवंश नारायण सिंह का यह लगातार तीसरा कार्यकाल न केवल उनकी व्यक्तिगत स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि राज्यसभा की कार्यसंस्कृति में स्थिरता, निरंतरता और परिपक्वता का भी प्रतीक है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश की राजनीति में अक्सर टकराव और तीखे मतभेद देखने को मिलते हैं। ऐसे में यह चयन सहमति आधारित राजनीति की एक सकारात्मक मिसाल बनकर उभरा है। कुल मिलाकर, यह चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास, संतुलन और सहयोग की भावना को भी सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।

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