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नींबू पानी पर ‘गैस संकट शुल्क’! बेंगलूरु के कैफे का बिल वायरल, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 15
  • 2 min read

Updated: Mar 18


भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com)

बेंगलूरु। बेंगलूरु के एक कैफे द्वारा नींबू पानी के बिल पर ‘गैस संकट शुल्क’ जोड़ने का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस अनोखे शुल्क को लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है और लोग कैफे के इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं।


जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु स्थित 'थियो कैफे' के एक ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और रेडिट पर कैफे का बिल साझा किया। बिल में दो ‘मिंट लेमोनेड’ का ऑर्डर दर्ज था, जिसकी कीमत 358 रुपये बताई गई। जीएसटी और डिस्काउंट के बाद बिल में अचानक ‘गैस संकट शुल्क’ नाम से 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया, जो 17.01 रुपये था। इस तरह ग्राहक को कुल 374 रुपये का भुगतान करना पड़ा।


सोशल मीडिया पर उड़ी खिल्ली

बिल वायरल होते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कैफे को घेरना शुरू कर दिया। अधिकांश लोगों का सवाल था कि नींबू पानी या लेमोनेड बनाने में गैस का क्या उपयोग होता है।


एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “नींबू पानी बनाने में कौन सी गैस लगती है?” वहीं एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में पूछा, “क्या इन्होंने नींबू को गर्म करके डाला है?” कई लोगों ने इसे अनावश्यक और हास्यास्पद शुल्क बताया।


कानूनी कार्रवाई की भी दी चेतावनी

कुछ जागरूक यूजर्स ने इसे उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि ईंधन संकट के नाम पर ग्राहकों से अतिरिक्त अनिवार्य शुल्क लेना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापार प्रथा की श्रेणी में आ सकता है।


एक यूजर ने लिखा कि ऐसे मामलों में संबंधित रेस्टोरेंट पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कई लोगों ने सुझाव दिया कि इस मामले को सोशल मीडिया पर चर्चा करने के बजाय उपभोक्ता अदालत में शिकायत के रूप में दर्ज कराया जाना चाहिए।


कैफे की ओर से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया

हालांकि, इस पूरे विवाद पर संबंधित कैफे की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कुछ लोगों ने कैफे का पक्ष लेते हुए यह भी कहा कि संभवतः बढ़ती लागत या अन्य खर्चों की भरपाई के लिए ऐसा शुल्क जोड़ा गया होगा।


गैस संकट की खबरों को सरकार ने बताया अफवाह

इधर केंद्र सरकार ने देश में रसोई गैस की कमी की खबरों को भ्रामक बताया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है।


सरकार के अनुसार, कुछ स्थानों पर स्थानीय लॉजिस्टिक्स या डिलीवरी में देरी को संकट समझ लिया गया, जबकि वास्तविकता में गैस की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग से बचें और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।


इस बीच, बेंगलूरु के इस कैफे का ‘गैस संकट शुल्क’ वाला बिल इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

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