जेजेएम स्टाम्प पेपर मामले में 100 प्रतिशत क्रिमिनल एक्टिविटी का आरोप, जीवराज ने सीबीआई जांच की मांग उठाई, श्रृंगेरी क्षेत्र में 150 करोड़ से अधिक खर्च पर सवाल
- धन्ना राम चौधरी

- 5 मार्च
- 3 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 20 मार्च
भारतार्थ खबर बेंगलूरु संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। (Bhaarataarth.com)
बेंगलूरु। पूर्व मंत्री डी.एन. जीवराज ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत कथित स्टाम्प पेपर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि “100 प्रतिशत आपराधिक गतिविधि” का उदाहरण है।
बुधवार को बेंगलूरु के मल्लेश्वरम स्थित भाजपा के राज्य कार्यालय भारतीय जनता पार्टी के जगन्नाथ भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में जीवराज ने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में जल जीवन मिशन के नाम पर भारी भ्रष्टाचार हुआ है। उनका दावा है कि केंद्र सरकार द्वारा 150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई, लेकिन “एक भी घर तक पानी नहीं पहुंचा।”
स्टाम्प पेपर की प्रामाणिकता पर सवाल
जीवराज ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत के साथ हुए कई एग्रीमेंट संदिग्ध स्टाम्प पेपर पर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में एक ही दिन और समय पर जारी हुए स्टाम्प पेपर के तहत एन.आर.पुरा और कोप्पा तालुक में कई एग्रीमेंट किए गए। कुछ मामलों में बोरवेल ड्रिलिंग से संबंधित 11 अनुबंध भी शामिल बताए गए हैं।
उन्होंने पूर्व के चर्चित स्टाम्प पेपर घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि अब क्यूआर कोड और यूनिक नंबर जैसी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद यदि स्कैन करने पर पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं होती, तो यह गंभीर संदेह पैदा करता है। जीवराज ने कहा कि 30 एग्रीमेंट की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं और स्टाम्प पेपर की असलियत पर प्रश्नचिह्न है।
बोरवेल बिलिंग में भारी अंतर
पूर्व मंत्री ने बोरवेल खुदाई में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनके अनुसार, तलमक्की और कडेगड्डे क्षेत्र में 228 फीट गहरे बोरवेल के लिए 587 फीट का बिल जारी किया गया। इसी प्रकार 260 फीट खुदाई के लिए भी 587 फीट का भुगतान दिखाया गया। उन्होंने दावा किया कि इन भुगतानों की राशि जारी भी कर दी गई है।
बलगारू ग्राम पंचायत में 1.49 लाख रुपये का बिल जारी होने के बावजूद वहां बोरवेल का अस्तित्व नहीं होने का आरोप लगाया गया। गौरीहल्ला में भी 1.38 लाख रुपये का भुगतान बिना कार्य के किए जाने की बात उन्होंने कही।
पाइपलाइन और ओवरहेड टैंक में भी अनियमितता
जीवराज ने कहा कि पाइपलाइन बिछाने के लिए तय गहराई तक खुदाई नहीं की गई और निर्धारित गुणवत्ता के पाइप का उपयोग भी नहीं हुआ। ओवरहेड टैंक निर्माण में भी कुप्रबंधन के आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जांच करने से मामला दब सकता है, इसलिए सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विभाग राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के पास है और श्रृंगेरी के जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में यह सब हो रहा है।
सरकार से जवाब की मांग
जीवराज ने कहा कि यदि आरोप निराधार हैं तो सरकार को सार्वजनिक रूप से सभी दस्तावेज और कार्य प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “जनता के पैसे की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी” और यदि आवश्यक हुआ तो कानूनी और जन आंदोलन का सहारा लिया जाएगा।
अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग को स्वीकार किया जाता है।
प्रेस वार्ता में पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष हरतालू हलप्पा और अन्य स्थानीय नेता भी उपस्थित थे।
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