चेन्नई-बेंगलुरु हाई-स्पीड रेल: बैयप्पनहल्ली और व्हाइटफील्ड में बन सकते हैं भूमिगत स्टेशन
- धन्नाराम चौधरी

- 11 जुल॰
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चेन्नई-बेंगलुरु हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्तावित मार्ग एवं बेंगलुरु में बैयप्पनहल्ली-व्हाइटफील्ड स्टेशन का सांकेतिक दृश्य
संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 11 जुलाई, 2026 चेन्नई-बेंगलुरु हाई-स्पीड रेल परियोजना दक्षिण भारत की परिवहन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है। 306 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत बेंगलुरु शहर में बैयप्पनहल्ली और व्हाइटफील्ड में भूमिगत स्टेशन बनाए जाने की संभावना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों महानगरों के बीच यात्रा समय घटकर केवल 1 घंटा 13 मिनट रह जाएगा। यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश के सबसे महत्वाकांक्षी रेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है और इससे कर्नाटक तथा तमिलनाडु के बीच व्यापार, उद्योग, आईटी सेक्टर और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के सूत्रों के अनुसार, परियोजना का अंतिम संरेखण (Alignment) सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और जल्द ही अंतिम मार्ग को मंजूरी दी जा सकती है। इस कॉरिडोर को 350 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है, जबकि ट्रेनें 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से संचालित होंगी। औसत परिचालन गति लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है।
परियोजना के अधिकांश हिस्से को एलिवेटेड बनाया जाएगा। हालांकि, चेन्नई शहर में लगभग 2.5 किलोमीटर, आंध्र प्रदेश के मोगिली घाट क्षेत्र में 11.5 किलोमीटर तथा बेंगलुरु शहर में लगभग 12 किलोमीटर का हिस्सा भूमिगत रहेगा। घनी आबादी और यातायात को ध्यान में रखते हुए बैयप्पनहल्ली तक ट्रेन भूमिगत चलेगी। व्हाइटफील्ड स्टेशन को भी भूमिगत या आंशिक रूप से भूमिगत बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
रेल अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चेन्नई-बेंगलुरु कॉरिडोर पर कार्य किया जाएगा। हालांकि मैसूर तक विस्तार की योजना को समाप्त नहीं किया गया है। दूसरे चरण में इस लाइन को मैसूर तक बढ़ाने की संभावना है, जिससे दक्षिण कर्नाटक को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा।
केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की थी, जिनमें करीब 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, चेन्नई-बेंगलुरु हाई-स्पीड रेल शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी और दक्षिण भारत में तेज़ रेल संपर्क का नया युग शुरू होगा।
इसी बीच, कर्नाटक के रेल नेटवर्क ने भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2014 के बाद राज्य में लगभग 1,750 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गई हैं। वर्तमान में राज्य के 97 प्रतिशत रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है। इससे ट्रेनों की गति, ऊर्जा दक्षता और क्षेत्रीय विकास को नई मजबूती मिली है।
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