रायचूर में कमजोर मानसून: किसानों के लिए वैकल्पिक फसलें बनीं उम्मीद की नई किरण
- धन्नाराम चौधरी

- 10 जुल॰
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रायचूर में खेतों का निरीक्षण करते कृषि अधिकारी एवं मानसून का इंतजार करते किसान
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) रायचूर (कर्नाटक) | 10 जुलाई, 2026 रायचूर वैकल्पिक फसल इस समय कर्नाटक के किसानों के बीच सबसे अहम चर्चा का विषय बन गई है। जिले में कमजोर और अनियमित मानसून के कारण खेती प्रभावित हो रही है। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को पारंपरिक फसलों के बजाय वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह दी है, ताकि संभावित आर्थिक नुकसान से बचा जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून में और देरी होती है तो समय पर फसल चयन ही किसानों की आय बचाने का सबसे प्रभावी उपाय साबित होगा।
रायचूर जिले में इस बार मानसून का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कहीं हल्की बारिश हुई तो कहीं लंबे अंतराल तक बारिश नहीं हुई। इसी कारण अधिकांश किसान अभी भी बुवाई शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग ने किसानों से मौसम की स्थिति को देखते हुए खेती की रणनीति बदलने का आग्रह किया है।
अधिकारियों के अनुसार, लाल मिश्रित मिट्टी वाले क्षेत्रों में अरहर, हरी मूंग, बाजरा, ज्वार, सूरजमुखी और मूंगफली जैसी फसलें कम वर्षा में बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। यदि मानसून पूरी तरह कमजोर रहता है तो मूंगफली और अरंडी जैसी वैकल्पिक फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।
कृषि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मानसून में आठ सप्ताह तक देरी होती है तो किसानों को 15 अगस्त तक बुवाई पूरी करने का प्रयास करना चाहिए। कमजोर मानसून की स्थिति में खरीफ के बजाय रबी फसलों की ओर रुख करना अधिक लाभदायक हो सकता है।
संयुक्त कृषि निदेशक प्रकाश चव्हाण ने बताया कि सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में लगभग 40 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि वर्षा पर निर्भर किसान 15 से 30 जुलाई के बीच अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे हैं।
सहायक कृषि निदेशक दीपा कुलकर्णी ने कहा कि कपास और तुअर जैसी फसलें पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। यदि एक सप्ताह तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो इन फसलों के सूखने का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि कृष्णा नदी के किनारे सिंचित क्षेत्रों में किसानों ने पहले ही बुवाई शुरू कर दी है।
जिले के कुल 3,10,645 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में अब तक धान, ज्वार, मक्का, बाजरा, तुअर, मूंग, सूरजमुखी, तिल और कपास सहित विभिन्न फसलों की बुवाई जारी है। कृषि विभाग लगातार किसानों को मौसम के अनुसार वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध करा रहा है।
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