देवी राजनंदनी जी को भावभीनी विदाई, श्रद्धालुओं की नम आंखों के बीच अयोध्या धाम के लिए हुईं रवाना
- धन्नाराम चौधरी

- 9 जुल॰
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परम पूज्या देवी राजनंदनी जी को पुष्पमालाओं से सम्मानित करते श्रद्धालु एवं भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के पदाधिकारी।
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 09 जुलाई, 2026
बेंगलुरु। देवी राजनंदनी जी विदाई का भावुक दृश्य बुधवार सायंकाल उस समय देखने को मिला, जब भारतीय राजपूताना सेवा संगठन द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के सफल समापन के बाद राष्ट्रीय कथा वाचिका परम पूज्या देवी राजनंदनी जी को श्रद्धालुओं ने अश्रुपूरित नेत्रों से विदाई दी। भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति से ओतप्रोत इस आयोजन ने हजारों श्रद्धालुओं के हृदय को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कथा महोत्सव के समापन के बाद देवी राजनंदनी जी बेंगलुरु से अयोध्या धाम के लिए रवाना हुईं। विदाई समारोह में भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार, बेंगलुरु अध्यक्ष सुनील सिंह, संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, मातृशक्ति तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने पुष्पमालाएं अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और पुनः बेंगलुरु पधारकर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करने का आग्रह किया।
विदाई के दौरान पूरा वातावरण भाव-विभोर हो उठा। सात दिनों तक कथा के माध्यम से बना आध्यात्मिक संबंध श्रद्धालुओं की आंखों में स्पष्ट दिखाई दिया। "जय श्रीराम" और "राधे-राधे" के उद्घोषों के बीच श्रद्धालुओं ने नम आंखों से अपनी प्रिय कथा वाचिका को विदा किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार ने कहा कि परम पूज्या देवी राजनंदनी जी की अमृतमयी वाणी ने हजारों श्रद्धालुओं के जीवन में भक्ति, संस्कार और सनातन धर्म के प्रति नई चेतना का संचार किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजपूताना सेवा संगठन उनके प्रति हृदय से कृतज्ञ है और भविष्य में पुनः उनके सान्निध्य में भव्य श्रीमद्भागवत कथा आयोजन का प्रयास करेगा।
सात दिवसीय कथा महोत्सव के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म, संस्कृति, सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश ग्रहण किया। आयोजन ने सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का भी सशक्त संदेश दिया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि देवी राजनंदनी जी की कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली आध्यात्मिक यात्रा रही। इसी कारण विदाई के क्षण सभी के लिए अत्यंत भावुक बन गए।
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