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घरेलू हवाई किराये पर सरकार की ‘फ्री फ्लाइट’ नीति: 23 मार्च से हटेगी सीमा, एयरलाइंस खुद तय करेंगी दाम

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 22
  • 2 min read

Updated: Mar 23

फाइल फोटो

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देश में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू हवाई किराये पर लागू अस्थायी सीमा को हटाने का फैसला किया है। यह निर्णय 23 मार्च 2026 से प्रभावी होगा, जिसके बाद एयरलाइंस कंपनियां अब अपने टिकट के दाम स्वयं तय कर सकेंगी।

मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किराये की सीमा हटाने के बावजूद एयरलाइनों को मूल्य निर्धारण में अनुशासन बनाए रखना होगा और यात्रियों के हितों का विशेष ध्यान रखना होगा। सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि किराये में किसी भी प्रकार की अत्यधिक या अनुचित वृद्धि को गंभीरता से लिया जाएगा।


दरअसल, दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में बड़े पैमाने पर व्यवधान के कारण हवाई टिकटों की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला था। इस स्थिति को नियंत्रित करने और यात्रियों को राहत देने के लिए 6 दिसंबर को सरकार ने घरेलू हवाई किराये पर अस्थायी सीमा लागू की थी।


मंत्रालय के अनुसार, उस समय लिया गया यह कदम बाजार में संतुलन बनाए रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था। अब, हालात सामान्य होने और उड़ानों की क्षमता पूरी तरह बहाल होने के बाद सरकार ने यह सीमा हटाने का निर्णय लिया है।


अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर दबाव बना हुआ है। कई एयरलाइनों को परिचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वैश्विक विमानन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। ऐसे में घरेलू सेक्टर को अधिक लचीला बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


रियल टाइम निगरानी जारी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह हवाई किराये के रुझानों की रियल टाइम आधार पर निगरानी करता रहेगा। यदि कहीं भी यात्रियों के हितों के खिलाफ स्थिति बनती है, तो आवश्यक हस्तक्षेप किया जाएगा।


यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, किराये की सीमा हटने के बाद टिकट की कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होंगी। पीक सीजन और त्योहारों के दौरान किराये बढ़ सकते हैं, जबकि सामान्य दिनों में प्रतिस्पर्धा के चलते सस्ते विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं।


इस फैसले को विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और एयरलाइंस को अधिक स्वतंत्रता देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, हालांकि यात्रियों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में किराये किस दिशा में जाते हैं।

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