top of page
भारतार्थ-logo

गांव लौटने का साहस ही भविष्य की खेती की नई दिशा है,प्रोफेसर श्याम बहादुर सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष

  • लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
    Ashok kumar Singh
  • 17 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
News poster in a banana grove shows two men beside banana plants, with Hindi text about modern banana farming and a better future.

भारतार्थ खबर | संवाददाता: अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)17 जुलाई, 2026 गोंडा। जब देश का एक बड़ा वर्ग सेवानिवृत्ति के बाद शहरों में स्थायी जीवन की तलाश करता है, तब कुछ लोग अपने अनुभव, ज्ञान और जीवन की कमाई को समाज के नाम समर्पित करने का निर्णय लेते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व हैं प्रोफेसर श्याम बहादुर सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद अपने पैतृक गांव ग्राम सभा त्रिभुवन नगर गिरिंट, ब्लॉक मुजेहना, तहसील एवं जनपद गोंडा (उत्तर प्रदेश) लौटकर आधुनिक केले की खेती को अपनाया और ग्रामीण भारत के सामने आत्मनिर्भरता का एक सशक्त मॉडल प्रस्तुत किया है।

आज गांवों से युवाओं का लगातार पलायन एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुका है। रोजगार की तलाश में लाखों युवा अपने गांवों और खेतों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रो. श्याम बहादुर सिंह का यह कदम केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विचार है—यह विश्वास कि यदि कृषि को वैज्ञानिक तकनीकों, आधुनिक प्रबंधन और बाजार की समझ के साथ अपनाया जाए, तो गांव ही समृद्धि का सबसे बड़ा केंद्र बन सकते हैं।


केले की खेती कम समय में बेहतर उत्पादन और संतोषजनक आय देने वाली फसल मानी जाती है। उन्नत पौध सामग्री, संतुलित पोषण, ड्रिप सिंचाई, उचित दूरी तथा वैज्ञानिक देखभाल जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसान कम भूमि पर भी अच्छा लाभ अर्जित कर सकते हैं। प्रो. सिंह का प्रयास इसी वैज्ञानिक सोच को व्यवहार में उतारने का उदाहरण है।


उनकी पहल यह संदेश देती है कि सेवानिवृत्ति जीवन का विराम नहीं, बल्कि समाज को लौटाने का नया अवसर है। दशकों तक शिक्षा जगत में विद्यार्थियों को दिशा देने वाले प्रो. सिंह अब खेतों के माध्यम से किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखा रहे हैं। यह परिवर्तन केवल एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की नई सोच का परिचायक है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे प्रयासों को व्यापक पहचान मिले। यदि शिक्षित, अनुभवी और सफल लोग अपने गांवों से जुड़कर आधुनिक कृषि, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा दें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि गांवों से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।


प्रो. श्याम बहादुर सिंह का यह प्रयास वास्तव में एक प्रेरक संदेश है—गांव केवल हमारी जड़ें नहीं हैं, बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी संभावनाएं भी वहीं मौजूद हैं। आधुनिक खेती, वैज्ञानिक सोच और समाज के प्रति समर्पण का यह संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page