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KPSC भर्ती विवाद: अध्यक्ष पर पक्षपात के आरोप, जांच तक निलंबन

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 17 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Grand historic stone building with arches and balconies, a statue at the entrance, and a police jeep parked in front.
कर्नाटक लोक सेवा आयोग पर फिर उठे सवाल, राज्यपाल ने जांच पूरी होने तक अध्यक्ष को किया निलंबित, मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की प्रतिनिधिक तस्वीर

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 17 जुलाई, 2026 KPSC भर्ती विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। कर्नाटक राज्य लोक सेवा आयोग (KPSC) पर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में 72,186 रिक्त पदों पर भर्ती अभियान के बीच आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से अपनी बेटियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।


आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जब राज्य सरकार युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने के उद्देश्य से हाल के वर्षों के सबसे बड़े भर्ती अभियानों में से एक चला रही है। ऐसे में भर्ती एजेंसी पर लगे आरोपों ने अभ्यर्थियों के बीच पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।


मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर को जांच पूरी होने तक निलंबित करने का आदेश जारी किया। यह कदम असाधारण माना जा रहा है और राज्य की भर्ती व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


हालांकि, अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर ने राज्यपाल के निलंबन आदेश को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अब इस पूरे मामले पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी। अंतिम निर्णय आने तक आरोपों की सत्यता का निर्धारण होना बाकी है।


विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो दशकों में KPSC कई बार भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर विवादों में रहा है। ऐसे मामलों से लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भरोसा प्रभावित होता है। उनका मानना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी और समयबद्ध जांच आवश्यक है ताकि योग्य उम्मीदवारों के हित सुरक्षित रह सकें।


राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं अभ्यर्थियों की नजर अब जांच और न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हुई है।


> नोट: यह मामला वर्तमान में जांच और न्यायिक विचाराधीन है। आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम जांच एजेंसी और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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