NEET पेपर लीक विरोध: कलबुर्गी में प्रदर्शन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
- धन्नाराम चौधरी

- 17 जुल॰
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कलबुर्गी में प्रदर्शन करते सौहार्द्य कर्नाटक के कार्यकर्ताओं की प्रतिनिधिक तस्वीर
भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कलबुर्गी | 17 जुलाई, 2026 NEET पेपर लीक विरोध को लेकर कर्नाटक के कलबुर्गी में गुरुवार को सौहार्द्य कर्नाटक की जिला इकाई ने जोरदार प्रदर्शन किया। जगत सर्कल पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने कथित NEET परीक्षा पेपर लीक मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की गई।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे विवादों से छात्रों और अभिभावकों का विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है, इसलिए किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
कार्यकर्ता आर.के. हुडगी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने मांग की कि कथित पेपर लीक के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की भी मांग दोहराई।
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ता मीनाक्षी बाली ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि केंद्र सरकार, सोनम वांगचुक और आंदोलनरत छात्र संगठनों के बीच संवाद स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि विवाद का शांतिपूर्ण और शीघ्र समाधान निकल सके।
कार्यकर्ता के. नीला ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए व्यापक व्यवस्थागत सुधारों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाए, जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में छात्रों का विश्वास बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
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