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घर की रजिस्ट्री काफी नहीं! मालिकाना हक सुरक्षित रखने के लिए ये दस्तावेज़ भी हैं बेहद जरूरी

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 5 days ago
  • 2 min read
Hands sign real estate papers beside a house model, gavel and no-entry sign, in an office setting.
सिर्फ सेल डीड से नहीं मिलता अंतिम स्वामित्व अधिकार, कानूनी विवाद से बचने के लिए जानें जरूरी दस्तावेज़ और नियम

घर की रजिस्ट्री, प्रॉपर्टी दस्तावेज़ और रियल एस्टेट का प्रतीकात्मक चित्र

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 16 जुलाई, 2026

घर की रजिस्ट्री कराने के बाद अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि अब वे संपत्ति के पूर्ण और निर्विवाद मालिक बन गए हैं। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार केवल रजिस्टर्ड सेल डीड होना ही अंतिम मालिकाना हक का प्रमाण नहीं माना जाता। यदि संपत्ति के पुराने दस्तावेज़ों, स्वामित्व श्रृंखला (Chain of Title) या विक्रेता के अधिकारों में कोई कानूनी कमी हो, तो अदालत में रजिस्ट्री को भी चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में संपत्ति खरीदने के बाद केवल रजिस्ट्री ही नहीं, बल्कि अन्य आवश्यक दस्तावेजों को भी सुरक्षित रखना और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करना बेहद जरूरी है।


कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 54 तथा रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 17 एवं 49 के तहत 100 रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति का हस्तांतरण रजिस्टर्ड दस्तावेज़ के माध्यम से ही वैध माना जाता है। हालांकि, यदि विक्रेता के पास वैध स्वामित्व अधिकार नहीं था, दस्तावेज़ फर्जी थे या किसी प्रकार की धोखाधड़ी हुई थी, तो न्यायालय पूरे स्वामित्व इतिहास की जांच कर सकता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति खरीदने के बाद म्यूटेशन (नामांतरण) भी कराना बेहद आवश्यक है। इससे नगर निगम या राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज हो जाता है और संपत्ति कर, बिजली, पानी जैसी सेवाएं भी नए स्वामी के नाम पर स्थानांतरित हो जाती हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि म्यूटेशन केवल राजस्व रिकॉर्ड के लिए होता है और इससे स्वामित्व तय नहीं होता, फिर भी भविष्य में संपत्ति बेचने, बैंक लोन लेने, विरासत संबंधी मामलों और कर भुगतान में यह दस्तावेज़ अत्यंत उपयोगी साबित होता है।


कानूनी सलाहकारों के अनुसार प्रत्येक संपत्ति मालिक को रजिस्टर्ड सेल डीड, पैरेंट डीड, एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट, म्यूटेशन ऑर्डर, प्रॉपर्टी टैक्स रसीद, पजेशन लेटर, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान, कंप्लीशन सर्टिफिकेट तथा विरासत से प्राप्त संपत्ति के मामलों में वसीयत अथवा अन्य उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेज़ सुरक्षित रखने चाहिए।


विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी संपत्ति पर कब्जा होना मालिकाना हक का प्रमाण नहीं होता। संपत्ति का स्वामित्व हमेशा वैध कानूनी दस्तावेज़ों और स्पष्ट टाइटल के आधार पर ही तय किया जाता है। इसलिए घर खरीदने से पहले और खरीदने के बाद सभी दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन और संरक्षण बेहद आवश्यक है।

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