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कोयला घोटाले की आंच आई-पैक तक, विनेश चंदेल गिरफ्तार

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 14
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चर्चित चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक के को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल और भी बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि आई-पैक, जो कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनावी अभियानों का प्रमुख रणनीतिकार रहा है, अब खुद जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। ईडी का दावा है कि कोयला तस्करी से अर्जित काला धन हवाला नेटवर्क के जरिए आई-पैक तक पहुंचाया गया, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर चुनावी गतिविधियों में किया गया।


कौन हैं विनेश चंदेल?

विनेश चंदेल आई-पैक के सह-संस्थापक और निदेशक हैं। उन्होंने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर समेत अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इस संस्था को खड़ा किया था। संगठन के संचालन और वित्तीय प्रबंधन में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने में भी वे पर्दे के पीछे एक प्रमुख चेहरा रहे हैं।


गिरफ्तारी की वजह

ईडी ने चंदेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आसनसोल क्षेत्र में हुए कोयला घोटाले से जुड़े पैसों का एक हिस्सा अवैध रूप से आई-पैक के खातों में पहुंचाया गया। ‘मनी ट्रेल’ के आधार पर एजेंसी को ऐसे लेन-देन के संकेत मिले, जिनसे यह संदेह मजबूत हुआ कि अवैध धन को वैध बनाने की कोशिश की गई।


हवाला और ‘अंगड़िया’ कनेक्शन

जांच में सामने आया है कि करीब 20 करोड़ रुपये हवाला नेटवर्क के जरिए ट्रांसफर किए गए। इस प्रक्रिया में मुंबई की एक ‘अंगड़िया’ फर्म का इस्तेमाल किया गया, जिसका नाम पहले भी अन्य आर्थिक मामलों में सामने आ चुका है। ईडी का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए कोयला तस्करी से जुड़े पैसों को घुमाकर चुनावी प्रबंधन में लगाया गया।


ममता बनर्जी से जुड़ा विवाद

मामला उस समय और संवेदनशील हो गया जब आई-पैक के कोलकाता कार्यालय पर छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के वहां पहुंचने की खबर सामने आई थी। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि कुछ अहम दस्तावेज हटाए गए, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। चंदेल की गिरफ्तारी को मुख्यमंत्री के चुनावी तंत्र पर सीधे असर के तौर पर देखा जा रहा है।


जांच का दायरा बढ़ा

इससे पहले ईडी ने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु समेत कई शहरों में आई-पैक से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह पूरी कार्रवाई वर्ष 2020 में सीबीआई द्वारा दर्ज उस प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से बड़े पैमाने पर कोयला चोरी और तस्करी के आरोप लगाए गए थे।


राजनीतिक असर

चुनाव से ठीक पहले हुई इस गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार का बड़ा सबूत बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे चुनावी समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।

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