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कोंगू में सियासी जंग तेज, अन्नाद्रमुक के गढ़ पर द्रमुक की नजर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 17
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोयम्बटूर। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बीच पश्चिमी क्षेत्र कोंगू बेल्ट की राजनीति इस बार खासा दिलचस्प मोड़ लेती नजर आ रही है। कोयम्बटूर दक्षिण सीट, जिसे लंबे समय से अन्नाद्रमुक का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, अब कड़े मुकाबले का केंद्र बन गई है। सत्तारूढ़ द्रमुक इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

द्रमुक ने इस सीट पर अपने प्रभावशाली नेता वी. सेंथिल बालाजी को मैदान में उतारकर चुनावी मुकाबले को नई धार दी है। बालाजी का प्रचार अभियान पारंपरिक राजनीति से अलग सादगी और जनसंपर्क पर आधारित है। सुबह 7 बजे से ही वे समर्थकों के साथ पैदल निकलते हैं और देवंगा पेट रोड से शुरू होकर घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। उनका यह जमीनी अंदाज स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

पैदल प्रचार से साध रहे जनमानस

भीषण गर्मी के बावजूद सेंथिल बालाजी का पैदल प्रचार अभियान निरंतर जारी है। बिना किसी तामझाम के आम मतदाताओं के बीच पहुंचना उनकी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तरीका मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने में कारगर साबित हो सकता है।

कोंगू बेल्ट में सियासी समीकरण

तमिलनाडु का कोंगू क्षेत्र परंपरागत रूप से अन्नाद्रमुक का गढ़ रहा है, जहां गौंडर समुदाय का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। पिछले चुनाव में अन्नाद्रमुक-नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने यहां 57 में से 41 सीटें जीती थीं, जबकि कोयम्बटूर जिले की सभी 10 सीटें उनके खाते में गई थीं। ऐसे में इस बार द्रमुक के लिए यहां सेंध लगाना आसान नहीं है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मजबूत रणनीति बनाई है। सेंथिल बालाजी की उम्मीदवारी को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए द्रमुक इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है।

विजय की एंट्री से बदली तस्वीर

इस चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। हालांकि कोंगू बेल्ट में मुख्य मुकाबला अभी भी द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन विजय की मौजूदगी ने वोटों के समीकरण को प्रभावित करने की संभावनाएं बढ़ा दी हैं।

गर्मी बनी चुनौती, बदली प्रचार शैली

कोयम्बटूर में पड़ रही तेज गर्मी ने चुनाव प्रचार की रणनीति को भी प्रभावित किया है। उम्मीदवार अब सुबह और शाम के समय ही ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। बड़े जनसभाओं की जगह घर-घर संपर्क और छोटे समूहों में संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है। कई स्थानों पर कार्यकर्ता 4 से 5 घंटे तक पैदल चलकर प्रचार कर रहे हैं। कोंगू बेल्ट की यह सियासी जंग तमिलनाडु चुनाव के नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। अन्नाद्रमुक अपने मजबूत गढ़ को बचाने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं द्रमुक हर हाल में यहां बाजी पलटने की कोशिश में जुटी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किसके पक्ष में अपना भरोसा जताते हैं।

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