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आईटी सेक्टर में आचरण संकट: टीसीएस से लेंसकार्ट तक विवादों की लहर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 17
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु/नासिक/पुणे। देश के प्रतिष्ठित आईटी सेक्टर में कार्यस्थल सुरक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक संतुलन को लेकर एक के बाद एक सामने आ रहे विवादों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया घटनाक्रमों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नासिक बीपीओ से शुरू हुआ मामला अब इन्फोसिस और लेंसकार्ट जैसी कंपनियों तक पहुंच गया है, जिससे पूरे उद्योग की साख पर असर पड़ता दिख रहा है।

टीसीएस नासिक मामला: संस्थागत विफलता के आरोप

नासिक स्थित टीसीएस बीपीओ में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव से जुड़े गंभीर आरोपों ने आईटी सेक्टर को झकझोर दिया है। दर्ज एफआईआर के मुताबिक फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच कम से कम आठ महिला कर्मचारियों ने वरिष्ठ सहयोगियों के खिलाफ बार-बार शिकायतें कीं। आरोप है कि न केवल इन शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, बल्कि पीड़ितों को चुप रहने की सलाह भी दी जाती रही। मामले में जबरन नमाज पढ़वाने, बीफ खिलाने और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने जैसे संवेदनशील आरोप भी शामिल हैं। पुलिस अब तक एचआर मैनेजर समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। बढ़ते विवाद के बीच कंपनी ने नासिक कार्यालय के कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए हैं। यह मामला अब व्यक्तिगत घटना से आगे बढ़कर संस्थागत जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर रहा है।

पुणे में इन्फोसिस पर आरोप, जांच शुरू

इस घटनाक्रम की गूंज पुणे तक सुनाई दी, जहां इन्फोसिस के बीपीएम यूनिट में महिला कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल होने के बाद कंपनी ने तत्काल प्रतिक्रिया दी है। इन्फोसिस ने स्पष्ट किया कि वह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम करती है और एक स्वतंत्र समिति द्वारा मामले की जांच कराई जा रही है। उद्योग संगठन नैसकॉम ने इसे अलग-थलग घटना बताते हुए सेक्टर की छवि को बचाने का प्रयास किया है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने नीतियों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

लेंसकार्ट विवाद: ड्रेस कोड पर सांस्कृतिक बहस

इसी बीच लेंसकार्ट का एक पुराना स्टाइल गाइड नए विवाद का कारण बन गया। दस्तावेज में कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक और कलावा जैसे पारंपरिक प्रतीकों पर रोक, जबकि हिजाब की अनुमति का उल्लेख सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

विवाद बढ़ने पर कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने बिना शर्त माफी मांगते हुए इसे पुराना दस्तावेज बताया और स्पष्ट किया कि कंपनी किसी भी धार्मिक प्रतीक पर प्रतिबंध का समर्थन नहीं करती। उन्होंने आश्वासन दिया कि कंपनी भारतीय परंपराओं का सम्मान करती है और नीतियों को अद्यतन किया जा चुका है।

व्यापक सवाल: नीतियां बनाम जमीनी हकीकत

इन घटनाओं ने आईटी कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की वास्तविकता पर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नीतियों का होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका सख्ती से क्रियान्वयन और पारदर्शिता भी उतनी ही आवश्यक है। कार्यस्थलों पर सुरक्षा, सम्मान और सांस्कृतिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करना अब कंपनियों के लिए केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और विश्वास बनाए रखने की अनिवार्य शर्त बन चुका है। लगातार उभरते विवाद इस बात का संकेत हैं कि आईटी सेक्टर को अपनी आंतरिक प्रणालियों की गहन समीक्षा कर ठोस सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

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