कांग्रेस में विवाद: हजीना सैयद के आरोपों से सियासी तूफान
- धन्ना राम चौधरी

- 12 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बड़ा विवाद उभरकर सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष हजीना सैयद द्वारा पार्टी की वरिष्ठ नेताओं पर लगाए गए गंभीर आरोप अब चुनावी माहौल को प्रभावित करने लगे हैं।
दरअसल, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने 10 अप्रैल 2026 को हजीना सैयद को “पार्टी विरोधी गतिविधियों” में शामिल होने के आरोप में पद से हटा दिया और पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस कार्रवाई के तुरंत बाद सैयद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लांबा और कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल पर व्यक्तिगत और आपत्तिजनक आरोप लगाए।
सोशल मीडिया पर तीखा हमला
वायरल हो रहे पोस्ट में हजीना सैयद ने अलका लांबा पर न केवल संगठनात्मक अक्षमता के आरोप लगाए, बल्कि सदस्यता शुल्क के दुरुपयोग तक की बात कही। उन्होंने लांबा की कार्यशैली को “तानाशाही” बताते हुए कहा कि महिला कांग्रेस में कार्यकर्ताओं का शोषण हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने के.सी. वेणुगोपाल को लेकर भी विवादित टिप्पणी की, जिससे मामला और गरमा गया।
“मैंने पहले ही दे दिया था इस्तीफा”
हजीना सैयद का दावा है कि उन्होंने निष्कासन से पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में उन्हें हटाने की कार्रवाई को उन्होंने “अनुचित और अपमानजनक” करार दिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर पारदर्शिता की कमी और आंतरिक लोकतंत्र के अभाव का भी आरोप लगाया।
अन्य नेताओं पर भी निशाना
सैयद ने तमिलनाडु कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य इकाई में महिला नेताओं की अनदेखी की जा रही है और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है।
कौन हैं हजीना सैयद?
करीब तीन दशक से कांग्रेस से जुड़ी हजीना सैयद संगठन की तेजतर्रार और मुखर नेताओं में गिनी जाती रही हैं। उन्होंने छात्र राजनीति की इकाई एनएसयूआई से अपना सफर शुरू किया और बाद में युवा कांग्रेस के विभिन्न अभियानों से जुड़ीं। वर्ष 2024 में उन्हें तमिलनाडु महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनाया गया था। वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सदस्य और पार्टी की प्रवक्ता भी रह चुकी हैं।
पार्टी का रुख
दूसरी ओर, अलका लांबा ने स्पष्ट किया कि सैयद के खिलाफ की गई कार्रवाई संगठन के हित में है। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चुनावी असर की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का आंतरिक विवाद कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। जहां एक ओर पार्टी विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर अंदरूनी कलह उसकी रणनीति को कमजोर कर सकती है। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसके और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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