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एसएचओ पर ईओयू का शिकंजा, करोड़ों की अवैध संपत्ति उजागर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 15
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

पटना/किशनगंज। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के बीच आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने किशनगंज सदर थाना के थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की संदिग्ध संपत्ति का खुलासा किया है। मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे पटना, छपरा और किशनगंज समेत पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।


आय से 118 प्रतिशत अधिक संपत्ति, जांच में बड़ा खुलासा

ईओयू की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अभिषेक कुमार रंजन की वैध आय और अर्जित संपत्ति के बीच भारी अंतर है। जांच के अनुसार उनकी कुल संपत्ति उनकी आय से लगभग 118.66 प्रतिशत अधिक पाई गई है, जिसे अवैध माना जा रहा है।


1.47 करोड़ की आय, 2.09 करोड़ से अधिक की संपत्ति

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2009 में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा शुरू करने वाले रंजन 2023 में इंस्पेक्टर बने। इस दौरान उनकी कुल वैध आय करीब 1.47 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि उनकी संपत्ति 2.09 करोड़ रुपये से अधिक पाई गई। खर्चों के समायोजन के बाद भी लगभग 1.70 करोड़ रुपये की संपत्ति को अवैध माना गया है।


पटना में आलीशान मकान, कई शहरों में निवेश

छापेमारी के दौरान पटना के रामकृष्ण नगर में 2200 वर्ग फीट में फैला चार मंजिला आलीशान मकान मिला, जिसकी अनुमानित कीमत 2 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा छपरा में 30 लाख रुपये का मकान, पैतृक गांव में 50 लाख रुपये का निर्माणाधीन घर और सिलीगुड़ी के दार्जिलिंग रोड पर 6 कट्ठा जमीन में निवेश का भी खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन संपत्तियों में भारी मात्रा में नकद लेनदेन हुआ है।


लग्जरी लाइफस्टाइल ने बढ़ाए शक

ईओयू की जांच में अधिकारी की जीवनशैली भी संदेह के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक, मुंबई यात्रा के दौरान वे परिवार सहित 15 दिनों तक पांच सितारा होटल ‘ताज’ में ठहरे थे। महंगे गैजेट्स, लग्जरी सामान और बच्चों की उच्च शिक्षा पर भारी खर्च ने आय और व्यय के बीच असंतुलन को और स्पष्ट कर दिया है।


सिंडिकेट कनेक्शन की आशंका

जांच एजेंसी को आशंका है कि रंजन का संबंध जमीन कारोबार और अवैध सिंडिकेट से रहा है। सिलीगुड़ी में फ्लैट, कई ट्रकों की खरीद और मुजफ्फरपुर में करोड़ों के निवेश के संकेत मिले हैं। अनुमान है कि उनकी बेनामी संपत्ति 20 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। साथ ही किशनगंज में तैनाती के दौरान बालू, शराब और तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों को संरक्षण देने तथा अवैध उगाही के आरोप भी सामने आए हैं।


जांच जारी, और खुलासों की संभावना

डीएसपी सुनील कुमार के नेतृत्व में ईओयू की टीम मामले की गहन जांच में जुटी है। छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का संकेत मानी जा रही है और इससे पुलिस विभाग में पारदर्शिता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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