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10 करोड़ के बिल पर सिर्फ 149 रुपये का भुगतान! एलिवेटेड रोड परियोजना में लापरवाही पर कंपनियों पर बड़ा एक्शन

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 15
  • 4 min read
“स्वर्ण रेखा क्षेत्र में निरीक्षण करते अधिकारी और एलिवेटेड रोड परियोजना का निर्माण कार्य”
“स्वर्ण रेखा क्षेत्र में निरीक्षण करते अधिकारी और एलिवेटेड रोड परियोजना का निर्माण कार्य”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: ग्वालियर/भोपाल, 15 मई। ग्वालियर में एलिवेटेड रोड परियोजना से जुड़े सीवर संकट पर अब प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सख्त रुख अपना लिया है। स्वर्ण रेखा क्षेत्र में टूटे सीवर चैंबरों और जलभराव की समस्या को लेकर मचे विवाद के बीच ठेकेदार कंपनियों के करोड़ों रुपये के बिल रोक दिए गए हैं।

सबसे बड़ा मामला पीएनसी इंफ्रा कंपनी का सामने आया है, जिसने लगभग 10 करोड़ रुपये के भुगतान का बिल पेश किया था, लेकिन विभाग ने केवल 149 रुपये का भुगतान जारी किया। इसी तरह श्रीमंगलम बिल्डकान कंपनी के साढ़े चार करोड़ रुपये के बिल के बदले सिर्फ 138 रुपये का भुगतान किया गया।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कंपनियों द्वारा स्वर्ण रेखा से मिट्टी हटाने और क्षतिग्रस्त सीवर चैंबरों की मरम्मत में अपेक्षित गति नहीं दिखाई गई, जबकि भुगतान के लिए बड़े-बड़े बिल प्रस्तुत कर दिए गए थे।

पहले 100 शब्द: क्यों बना यह मामला चर्चा का केंद्र?

ग्वालियर की एलिवेटेड रोड परियोजना अब केवल निर्माण कार्य का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और ठेकेदार कंपनियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन चुकी है। स्वर्ण रेखा क्षेत्र में टूटे सीवर चैंबरों और जलभराव की घटनाओं के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने मामले की गंभीर समीक्षा शुरू की। पीडब्ल्यूडी द्वारा करोड़ों के बिल के बदले मात्र 138 और 149 रुपये का भुगतान किए जाने का फैसला अब चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन इसे कंपनियों पर दबाव बनाने और समयसीमा में काम पूरा कराने की रणनीति के तौर पर देख रहा है।

एसीएस संजय दुबे की समीक्षा के बाद सख्ती

नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव Sanjay Dubey ने हाल ही में ग्वालियर का निरीक्षण किया था। इसके बाद भोपाल में भी परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

निरीक्षण में सामने आया कि एलिवेटेड रोड निर्माण के दौरान स्वर्ण रेखा क्षेत्र में सीवर चैंबर क्षतिग्रस्त हुए और निर्माण से निकली मिट्टी समय पर नहीं हटाई गई। इसके कारण बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ी।

सूत्रों के अनुसार इसी रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने ठेकेदार कंपनियों के भुगतान रोकने का फैसला लिया।

क्यों दिए गए सिर्फ 138 और 149 रुपये?

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक विभागीय नियमों के अनुसार किसी भी स्वीकृत बिल के खिलाफ “शून्य भुगतान” नहीं किया जा सकता। इसी वजह से तकनीकी रूप से न्यूनतम भुगतान करते हुए कंपनियों को केवल 138 और 149 रुपये जारी किए गए।

इस कदम को विभाग ने “सख्त चेतावनी” के रूप में देखा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक कंपनियां सीवर मरम्मत और मिट्टी हटाने का काम पूरी गंभीरता से नहीं करेंगी, तब तक बड़े भुगतान जारी नहीं किए जाएंगे।

कंपनियों को तीन दिन में देना होगा शपथ पत्र

एसीएस संजय दुबे ने निर्देश दिए हैं कि एलिवेटेड रोड के दोनों चरणों पर काम कर रहीं कंपनियों को तीन दिन के भीतर शपथ पत्र जमा करना होगा।

शपथ पत्र में कंपनियों को यह लिखित आश्वासन देना होगा कि—

  • 15 जून तक स्वर्ण रेखा क्षेत्र से निर्माण की मिट्टी हटाई जाएगी

  • क्षतिग्रस्त सीवर लाइन और चैंबरों की मरम्मत पूरी की जाएगी

  • बारिश से पहले जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी

प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि तय समयसीमा में काम पूरा नहीं होने पर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

पीएनसी इंफ्रा पर टर्मिनेशन नोटिस की तैयारी

विभागीय सूत्रों के अनुसार एलिवेटेड रोड के दूसरे चरण पर काम कर रही PNC Infratech के खिलाफ टर्मिनेशन नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि सीवर समस्या के समाधान में कथित लापरवाही को लेकर विभाग के भोपाल मुख्यालय में नोटशीट प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

यदि कंपनी के खिलाफ अनुबंध समाप्ति की कार्रवाई होती है, तो यह राज्य की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जाएगा।

पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने क्या कहा?

कार्यपालन यंत्री Joginder Yadav ने कहा कि कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वर्ण रेखा क्षेत्र से मिट्टी हटाएं और टूटे सीवर चैंबरों की मरम्मत करें।

उन्होंने बताया कि कंपनियों द्वारा प्रस्तुत बिलों की राशि फिलहाल रोक दी गई है और विभागीय नियमों के तहत न्यूनतम भुगतान जारी किया गया है।

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

FAQ / Q&A सेक्शन

Q1. कंपनियों को केवल 138 और 149 रुपये क्यों दिए गए?

PWD नियमों के अनुसार शून्य भुगतान नहीं किया जा सकता, इसलिए न्यूनतम भुगतान किया गया।

Q2. किस कंपनी का 10 करोड़ रुपये का बिल रोका गया?

पीएनसी इंफ्रा कंपनी का लगभग 10 करोड़ रुपये का बिल रोका गया।

Q3. प्रशासन ने कंपनियों को क्या निर्देश दिए हैं?

सीवर चैंबरों की मरम्मत और स्वर्ण रेखा से मिट्टी हटाने का काम जल्द पूरा करने को कहा गया है।

Q4. क्या कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

हाँ, समयसीमा में काम पूरा नहीं होने पर एफआईआर और टर्मिनेशन की कार्रवाई संभव है।

Q5. जलभराव की समस्या क्यों बढ़ी?

टूटे सीवर चैंबर और निर्माण सामग्री की वजह से जल निकासी बाधित होने की बात सामने आई है।

Focus Keywords: ग्वालियर एलिवेटेड रोड, पीएनसी इंफ्रा न्यूज़, सीवर चैंबर विवाद, स्वर्ण रेखा सीवर मुद्दा, ग्वालियर पीडब्ल्यूडी एक्शन

Meta Description: ग्वालियर में एलिवेटेड रोड परियोजना के तहत टूटे सीवर चैंबरों की मरम्मत नहीं कराने पर PWD ने कंपनियों के करोड़ों रुपये के बिल रोक दिए। जानिए पूरा मामला।

निष्कर्ष: ग्वालियर की एलिवेटेड रोड परियोजना अब प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बनती दिखाई दे रही है। करोड़ों रुपये के बिल रोकने और टर्मिनेशन नोटिस की तैयारी ने यह संकेत दिया है कि सरकार अब निर्माण कार्यों में लापरवाही को लेकर कठोर रुख अपनाने के मूड में है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां तय समयसीमा में काम पूरा कर पाती हैं या फिर मामला कानूनी कार्रवाई और अनुबंध समाप्ति तक पहुंचता है।

Source: पीडब्ल्यूडी सेतु संभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, विभागीय सूत्र, ग्वालियर प्रशासन।

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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