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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


रिश्तों की महक, आख़िरी रोटी (अंतिम भाग)
जिस दिन आख़िरी रोटी माँ की थाली में पहुँची... उसी दिन उस घर में रिश्ते फिर से जीवित हो गए।
आँगन में सन्नाटा पसरा हुआ था।
तीनों बेटे अब भी अपनी माँ के सामने सिर झुकाए बैठे थे। किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि उनकी आँखों में आँखें डाल सके।
सरस्वती देवी ने धीरे से अपने आँसू पोंछे।
फिर उसी ममता भरी आवाज़ में बोलीं—
"इतना मत रोओ बेटा... माँ अपने बच्चों के आँसू नहीं देख सकती।"
राघव ने काँपते हुए हाथों से माँ की खाली थाली उठाई।
उसने रसोई में जाकर वही आख़िरी रोटी उठाई, जिसे अम

Ashok kumar Singh
12 अग॰3 मिनट पठन


बिदादी किसानों के साथ BJP का पूरा समर्थन, विजयेंद्र बोले—जमीन बचाने से समझौता नहीं
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त 2026 बेंगलुरु। बिदादी के किसानों की जमीन और उनके अधिकारों को लेकर कर्नाटक की राजनीति में सियासी गर्मी बढ़ गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने स्पष्ट किया है कि BJP किसानों के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी है और किसानों की जमीन बचाने के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि BJP और JDS के लिए किसानों के हितों की रक्षा एक साझा उद्देश्य है।

धन्नाराम चौधरी
11 अग॰4 मिनट पठन


रिश्तों की महक आख़िरी रोटी (भाग–4)
एक मासूम सवाल... जिसने तीन बेटों की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच सामने ला दिया।
आँगन में बिछी दरी पर पूरा परिवार एक साथ बैठा था। वर्षों बाद उस घर में फिर से हँसी सुनाई दे रही थी। पीतल की थालियाँ सजी थीं। मिट्टी के चूल्हे से उठती रोटियों की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी।
सरस्वती देवी एक-एक करके सबकी थाली में गर्म रोटियाँ रख रही थीं।
पहले बड़े बेटे राघव की थाली...
फिर मोहन...
फिर सुरेश...
फिर बहुएँ...
फिर पोते-पोतियाँ...
हर बार रोटी रखते हुए उनके चेहरे पर वही संतोष था, जो केव

Ashok kumar Singh
10 अग॰3 मिनट पठन


रिश्तों की महक आख़िरी रोटी (भाग–3)
जब पूरा परिवार एक साथ बैठा... लेकिन एक थाली अब भी खाली थी।
बरईपुर गाँव का वह छोटा-सा घर वर्षों बाद फिर से चहल-पहल से भर गया था। आँगन में बच्चों की खिलखिलाहट गूँज रही थी। बहुएँ सामान समेट रही थीं और तीनों बेटे बरामदे में बैठकर शहर की बातें कर रहे थे।
उधर रसोई में अम्मा अकेली थीं।
मिट्टी के चूल्हे में जलती लकड़ियों की आँच तेज़ हो चुकी थी। तवे पर पहली रोटी फूली तो अम्मा के चेहरे पर मुस्कान भी खिल उठी।
उन्होंने धीरे से कहा—
"आज फिर मेरा घर, घर जैसा लग रहा है।"

Ashok kumar Singh
8 अग॰3 मिनट पठन
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