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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • नारायणी की रसोई की सेवा पहल: 210 कन्याओं को भोजन, उपहार और दक्षिणा देकर किया सम्मानित

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु,18 अक्टूबर 2026। नवरात्रि के पावन अवसर पर नारायणी की रसोई संस्था की ओर से बेंगलुरु स्थित माहेश्वरी भवन में कन्या भोजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर 210 कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया तथा उपहार और दक्षिणा देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ सेवा, सहयोग और शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन का संदेश दिया गया। आयोजन के दौरान कन्याओं को भोजन कराने के साथ उनकी शिक्षा और दैनिक उपयोग से जुड़ी सामग्री भी वितरित की गई। इसमें स्कूल बैग, लेगिंग्स, पानी की बोतल, जैकेट, बालों की सजावट से संबंधित सामग्री, कॉपियां, रबर, पेंसिल और स्कूल के जूते शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में प्रत्येक कन्या को दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया। सेवा और सहयोग में समाज की सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम में वृजकिशोर भूरा, हेमांशु झंवर, कृणाल कोठारी, श्वेता बियाणी और निर्मला कांकाणी सहित संस्था की पूरी टीम तथा समाज की महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी सदस्यों ने आपसी सहयोग से आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया। नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन और कन्या भोजन की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी परंपरा के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में भोजन और दक्षिणा के साथ शिक्षा से संबंधित सामग्री वितरित करना भी आयोजन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा। इससे धार्मिक आयोजन को सेवा और सामाजिक सहयोग से जोड़ने का प्रयास सामने आया। धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा को प्रोत्साहन नारायणी की रसोई संस्था की इस पहल में कन्याओं को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया। स्कूल बैग, कॉपियां, पेंसिल और जूते जैसी वस्तुओं का वितरण शिक्षा से जुड़ी जरूरतों के प्रति सहयोग की भावना को दर्शाता है। ऐसे आयोजन धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकते हैं। समाज के विभिन्न सदस्यों की भागीदारी से सेवा कार्यों को सामूहिक रूप दिया जा सकता है। कार्यक्रम ने आस्था, संवेदनशीलता और जरूरतमंदों की सहायता के महत्व को रेखांकित किया। नारायणी की रसोई संस्था द्वारा आयोजित यह कन्या भोजन कार्यक्रम नवरात्रि के अवसर पर सेवा, सम्मान और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने वाली पहल के रूप में सामने आया।

  • सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर के नए मुख्य पुजारी बने शंकरन नंबूदरी, मलिकप्पुरम मंदिर की जिम्मेदारी दामोदरन को

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com सबरीमाला,18 अक्टूबर 2026। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर के नए मुख्य पुजारी के रूप में सुब्रह्मण्यन शंकरन नंबूदरी का चयन किया गया है। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने रविवार को पारंपरिक लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से उनका चयन किया। इसी प्रक्रिया के तहत दामोदरन नंबूदरी को मलिकप्पुरम देवी मंदिर का नया मुख्य पुजारी चुना गया। दोनों पुजारी 16 नवंबर को अपना पदभार संभालेंगे। यह तिथि सबरीमाला में मंडल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा सीजन शुरू होने से एक दिन पहले की है। इस वार्षिक तीर्थयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान अय्यप्पा के दर्शन के लिए सबरीमाला पहुंचते हैं। तीसरे और पांचवें प्रयास में मिली सफलता उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुब्रह्मण्यन शंकरन नंबूदरी का चयन तीसरे प्रयास में हुआ, जबकि दामोदरन नंबूदरी पांचवीं कोशिश में मलिकप्पुरम देवी मंदिर के मुख्य पुजारी चुने गए। दोनों मंदिरों में मुख्य पुजारी की नियुक्ति धार्मिक परंपराओं और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुरूप की गई। सबरीमाला स्थित भगवान अय्यप्पा मंदिर केरल के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। यहां हर वर्ष मंडल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस अवधि में मंदिर की पूजा व्यवस्था, दर्शन प्रबंधन और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है। तीर्थयात्रा सीजन से पहले संभालेंगे जिम्मेदारी मंडल-मकरविलक्कु सीजन सबरीमाला की धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख वार्षिक अवसर है। इस दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन और संबंधित व्यवस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। नए मुख्य पुजारियों का कार्यभार संभालना इसी महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा सीजन से पहले हो रहा है। सुब्रह्मण्यन शंकरन नंबूदरी सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी निभाएंगे, जबकि दामोदरन नंबूदरी मलिकप्पुरम देवी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का दायित्व संभालेंगे। दोनों नियुक्तियां केरल की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की आगामी वार्षिक तीर्थयात्रा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

  • ‘नौकरी दिलाओ, पहली सैलरी तुम्हारी!’ बेंगलुरु के बीटेक फ्रेशर की पोस्ट वायरल, रोजगार संकट पर छिड़ी चर्चा

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु,18 अक्टूबर 2026। देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में नौकरी की तलाश कर रहे एक बीटेक स्नातक की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) की पढ़ाई करने वाले इस युवक ने एंट्री-लेवल की नौकरी पाने में आ रही कठिनाइयों से परेशान होकर अनोखा प्रस्ताव रखा है। उसने कहा कि यदि कोई उसे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या एआई/एमएल के क्षेत्र में अच्छी नौकरी दिलाने में मदद करता है, तो वह अपनी पहली महीने की पूरी सैलरी उसे दे देगा। रेडिट पर साझा की गई इस पोस्ट में युवक ने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए लिखा कि नौकरी पाने की कोशिशों ने उसे मानसिक रूप से थका दिया है। उसकी पोस्ट सामने आने के बाद शुरुआती स्तर पर तकनीकी नौकरी पाने की चुनौती को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। डिग्री और तकनीकी कौशल के बावजूद नौकरी की तलाश युवक के अनुसार, उसने बीटेक की पढ़ाई के दौरान एआई और मशीन लर्निंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की है, लेकिन इसके बावजूद उसे एंट्री-लेवल की नौकरी पाने में कठिनाई हो रही है। उसने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या एआई/एमएल से जुड़ी अच्छी नौकरी दिलाने वाले व्यक्ति को अपनी पहली महीने की पूरी सैलरी देने की पेशकश की। उसका यह प्रस्ताव नौकरी पाने की बेचैनी को सामने लाता है। हालांकि, युवक की पहचान, शैक्षणिक संस्थान, आवेदन किए गए पदों की संख्या और अब तक मिले साक्षात्कारों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं है। इसलिए उसके व्यक्तिगत अनुभव को पूरे रोजगार बाजार की स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। आईटी क्षेत्र में फ्रेशर्स के सामने चुनौतियां तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद पहली नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कंपनियां अक्सर तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव, प्रोजेक्ट पर काम करने की क्षमता, समस्या समाधान और साक्षात्कार में प्रदर्शन को भी महत्व देती हैं। एआई और मशीन लर्निंग जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में अवसरों के साथ प्रतिस्पर्धा भी मौजूद है। ऐसे में केवल डिग्री के आधार पर नौकरी मिलना सुनिश्चित नहीं होता। इंटर्नशिप, वास्तविक प्रोजेक्ट, प्रोग्रामिंग कौशल और तकनीकी अवधारणाओं की समझ उम्मीदवार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, नौकरी पाने में कठिनाई के पीछे केवल उम्मीदवार की तैयारी ही जिम्मेदार नहीं होती। उपलब्ध रिक्तियां, कंपनियों की भर्ती नीति, अनुभव संबंधी अपेक्षाएं और आर्थिक परिस्थितियां भी रोजगार के अवसरों को प्रभावित करती हैं। वायरल पोस्ट ने उठाए रोजगार से जुड़े सवाल युवक की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर शुरुआती स्तर की नौकरियों की उपलब्धता और तकनीकी डिग्री के बाद रोजगार की उम्मीदों जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। पहली सैलरी देने की पेशकश उसके लिए नौकरी की अहमियत और रोजगार पाने की बेचैनी को दर्शाती है। यह घटना इस बात पर भी ध्यान दिलाती है कि तकनीकी शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल कितना महत्वपूर्ण है। युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण, रोजगारोन्मुख कौशल और करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना नौकरी की तैयारी में सहायक हो सकता है। फिलहाल, वायरल पोस्ट एक युवक के अनुभव पर आधारित है। इसे बेंगलुरु या देशभर में सभी नए इंजीनियरों की स्थिति का प्रतिनिधि मानने के लिए व्यापक और प्रमाणित रोजगार आंकड़ों की आवश्यकता होगी।

  • हैदराबाद में कारोबारी का अपहरण कर 1.30 करोड़ रुपये वसूले, मास्टरमाइंड समेत 10 गिरफ्तार

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com हैदराबाद,18 अक्टूबर 2026। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक ज्वेलरी कारोबारी के अपहरण और फिरौती वसूली के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर कारोबारी के. श्रीनिवास राव का अपहरण किया और उन्हें छोड़ने के बदले भारी रकम की मांग की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अपहरण की घटना 5 अक्टूबर को हुई थी। आरोपियों ने कथित तौर पर कारोबारी से 15 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी और बाद में 1.30 करोड़ रुपये वसूलने के बाद उन्हें रिहा कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब 1.07 करोड़ रुपये बरामद किए हैं। पुलिसकर्मी बनकर दिया वारदात को अंजाम प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से पुलिसकर्मियों का रूप धारण कर कारोबारी को अपने कब्जे में लिया था। इस तरीके से उन्होंने कारोबारी को भ्रमित कर अपहरण की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद फिरौती की मांग की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की। जांच के बाद मुख्य साजिशकर्ता सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है। 1.30 करोड़ रुपये की वसूली, 1.07 करोड़ बरामद रिपोर्टों के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने कारोबारी से 1.30 करोड़ रुपये वसूले थे। पुलिस ने इनमें से लगभग 1.07 करोड़ रुपये बरामद कर लिए हैं। शेष राशि के संबंध में जांच और बरामदगी की स्थिति का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। पुलिस के सामने अब कथित साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका, फिरौती की रकम के लेन-देन और फरार आरोपियों का पता लगाने जैसी चुनौतियां हैं। इन पहलुओं पर जांच आगे बढ़ने के साथ अधिक जानकारी सामने आने की संभावना है। सुरक्षा व्यवस्था और फर्जी पहचान का गंभीर मामला इस घटना में कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर अपहरण किए जाने का पहलू विशेष रूप से गंभीर है। कानून लागू करने वाली एजेंसियों की पहचान का दुरुपयोग आम लोगों में भ्रम पैदा कर सकता है और अपराधियों को वारदात अंजाम देने का अवसर दे सकता है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए संदिग्ध परिस्थितियों में संबंधित पुलिसकर्मियों की पहचान की पुष्टि करना और आवश्यकता पड़ने पर आधिकारिक पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क करना उपयोगी हो सकता है। हैदराबाद में कारोबारी के अपहरण का यह मामला फिरौती के लिए संगठित अपराध और पहचान के दुरुपयोग से जुड़ी चुनौतियों को सामने लाता है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

  • दुर्गा पूजा पर सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन की स्वास्थ्य पहल, 250 लोगों की निःशुल्क जांच

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु,18 अक्टूबर 2026। दुर्गा पूजा के अवसर पर समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन और मां दुर्गा सेवा समिति की ओर से कामाक्षीपाल्या स्थित धनंजय पैलेस में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। स्पर्श हॉस्पिटल, यशवंतपुर, ऑप्टिकल स्क्वायर और प्रोकेयर डेंटल के सहयोग से आयोजित इस शिविर में लगभग 250 लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। बीपी, ब्लड शुगर, आंखों और दांतों की हुई जांच सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के सचिव कमलेश यादव ने बताया कि शिविर में रक्तचाप, रक्त शर्करा, एसपीओ2, नाड़ी की गति, आंखों और दांतों की निःशुल्क जांच की गई। आयोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ उन्हें नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के प्रति जागरूक करना था। फाउंडेशन के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) नीरज शर्मा के अनुसार, शिविर में प्रवासी मजदूरों, निर्माण श्रमिकों, घरेलू सहायिकाओं, रसोइयों, चालकों और अन्य मेहनतकश लोगों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि कामकाज और आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई जरूरतमंद लोग समय पर स्वास्थ्य जांच नहीं करा पाते। ऐसे शिविर उनके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। 50 से अधिक लोगों में पहली बार स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने का दावा सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण पांडेय ने बताया कि शिविर के दौरान 50 से अधिक लोगों में पहली बार उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए रक्त शर्करा स्तर का पता चला। उन्होंने कहा कि समय रहते स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान होने से प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय परामर्श लेने और संभावित जटिलताओं से बचाव के लिए कदम उठाने में मदद मिल सकती है। पांडेय के अनुसार, सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन पिछले पांच वर्षों में 16 हजार से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कर चुका है। संस्था जरूरतमंद और वंचित वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। आयोजकों ने सहयोगी संस्थाओं के प्रति जताया आभार मां दुर्गा सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील ठाकुर और सचिव मणिकांत झा ने शिविर के आयोजन में सहयोग के लिए सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के सीईओ राम मोहन पाठक और संयुक्त सचिव प्रभात मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पर्श हॉस्पिटल, यशवंतपुर, ऑप्टिकल स्क्वायर और प्रोकेयर डेंटल की टीमों के योगदान की भी सराहना की। शिविर के संचालन में सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन की ओर से प्रवीण पांडेय, प्रभात मिश्रा, कमलेश यादव, राम मोहन पाठक, तौकीर, नीरज शर्मा और सुधीर सहित अन्य सदस्यों ने योगदान दिया। वहीं, मां दुर्गा सेवा समिति की ओर से मणिकांत झा, सुनील ठाकुर, अनिल शर्मा, प्रमोद सिंह, मुकेश और राजू ने सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजकों ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों के अवसर पर सेवा गतिविधियों के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि अधिक से अधिक लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य जांच का लाभ मिल सके।

  • चारों विधान परिषद सीटों पर एनडीए की जीत के लिए जुटें कार्यकर्ता, विजयेंद्र ने भरी हुंकार

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com हुबली,18 अक्टूबर 2026। कर्नाटक में आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं से पूरी ताकत के साथ जुटने का आह्वान किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में मतदाताओं का समर्थन एनडीए उम्मीदवारों को मिलेगा। इस दौरान उन्होंने गन्ना किसानों की समस्याओं, राज्य कांग्रेस में कथित अंदरूनी खींचतान और कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। शंकरनूर को हैट्रिक का मौका, चारों सीटों पर जीत की तैयारी विजयेंद्र ने मौजूदा विधान परिषद सदस्य शंकरनूर की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों की आवाज उठाई है। उनके अनुसार, शंकरनूर के पास लगातार तीसरी जीत दर्ज करने का अवसर है और पार्टी के नेता तथा कार्यकर्ता उनके समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा-जद(एस) गठबंधन के उम्मीदवारों में शंकरनूर, के.एम. सुरेश, नमोश और बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से ए.पी. रंगनाथ शामिल हैं। विजयेंद्र ने कहा कि सभी चार सीटों पर जीत हासिल करने के लिए गठबंधन के कार्यकर्ता मिलकर प्रयास कर रहे हैं। गन्ना किसानों के लिए स्थायी समाधान की मांग गन्ना किसानों की समस्याओं पर विजयेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों के हित में कदम उठा रही है। उन्होंने गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) व्यवस्था और इथेनॉल नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से चीनी उद्योग और किसानों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि किसानों को गन्ने के भुगतान में देरी सहित कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और किसानों की समस्याओं पर विचार के लिए समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सहायता मूल्य देने पर विचार करने की मांग की। उन्होंने हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ राज्यों में गन्ना किसानों को अतिरिक्त सहायता दी जाती है। उनके अनुसार, कर्नाटक सरकार को भी राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) निर्धारित करने की संभावना पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सूखे से प्रभावित किसानों के लिए घोषित 2,500 रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए सवाल उठाया कि क्या इतनी राशि किसानों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए पर्याप्त है। विजयेंद्र ने कहा कि किसानों को प्रभावी राहत देने के लिए सरकार को अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए। साथ ही, उन्होंने किसानों से अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से संघर्ष करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन आंदोलन के दौरान व्यक्तिगत आरोपों और हमलों से बचना भी जरूरी है। कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर लगाए आरोप विजयेंद्र ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग और अन्य संगठनों को लेकर सवाल उठाकर राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय यह आत्ममंथन करना चाहिए कि जनता का भरोसा पार्टी से क्यों कम हो रहा है। राज्य कांग्रेस में कथित अंदरूनी खींचतान पर विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व को लेकर असंतोष होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद और हालिया स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े घटनाक्रम आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकते हैं। विजयेंद्र ने यह भी दावा किया कि विधान परिषद चुनाव के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जुड़े कई मुद्दे सामने आ सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस के भीतर कथित साजिशों और स्टिंग ऑपरेशन के पीछे के लोगों को लेकर लगाए गए उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इन दावों पर संबंधित कांग्रेस नेताओं का पक्ष भी सामने आना बाकी है। केपीएससी भर्ती में पारदर्शिता और खाली पद भरने की मांग कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए विजयेंद्र ने राज्य सरकार से अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और भर्ती में हो रही देरी दूर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आयोग को बंद करना समस्या का समाधान नहीं है; इसके बजाय भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और उम्मीदवारों का विश्वास बहाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी अनियमितताएं हुई थीं, तो उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी भी सरकार के कार्यकाल में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। विजयेंद्र ने बताया कि हुबली-धारवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की तारीखों, साक्षात्कार और परिणामों में देरी के कारण सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कांग्रेस के चुनावी वादे का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने राज्य में लगभग ढाई लाख रिक्त सरकारी पद भरने का आश्वासन दिया था। विजयेंद्र ने सरकार से अब तक भरे गए पदों का विवरण सार्वजनिक करने, रिक्तियों को जल्द भरने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार करने की मांग की। विधान परिषद चुनाव से पहले विजयेंद्र के इन बयानों से कर्नाटक में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं। चुनाव में एनडीए की रणनीति के साथ-साथ किसानों, युवाओं और सरकारी भर्ती से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं। हालांकि, विभिन्न दलों के दावों और आरोपों का आकलन संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना आवश्यक होगा।

  • गोवा में प्रदर्शन के दौरान कथित हिंदुत्व विरोधी नारे, 300 अज्ञात लोगों पर एफआईआर

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com पणजी,18 अक्टूबर 2026। गोवा की राजधानी पणजी में 11 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘हिंदुत्व मुर्दाबाद’ के नारे लगाए जाने के मामले में पुलिस ने करीब 300 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 और 299 के तहत मामला दर्ज किया है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कथित नारों को लेकर मामला दर्ज होने के बाद यह घटनाक्रम चर्चा में आया है। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े आरोपों की जांच करना और संबंधित व्यक्तियों की पहचान करना है। जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान सात लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। प्राथमिकी में करीब 300 अज्ञात लोगों का उल्लेख होने के कारण मामले में संबंधित प्रदर्शनकारियों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस प्रकरण में आरोपों और जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर करना आवश्यक है। प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में संबंधित नारे किस संदर्भ में लगाए गए, उनकी प्रकृति क्या थी और कानून के तहत किन व्यक्तियों की जिम्मेदारी बनती है, इसका निर्धारण जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से जांच के विस्तृत निष्कर्ष, सभी आरोपित व्यक्तियों की पहचान अथवा मामले की आगे की कार्रवाई का पूरा विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए प्रकरण से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के आधिकारिक विवरण के आधार पर ही की जानी चाहिए।

  • विजयनगर में गणेशोत्सव-नवरात्रि की धूम, महेंद्र मुणोत ने अन्नदान सेवा में लिया भाग

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु,18 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु के विजयनगर क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों द्वारा आयोजित गणेश उत्सव एवं नवरात्रि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने भगवान गणपति के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने अन्नदान कार्यक्रम में भी सेवा प्रदान की। आयोजन समिति की ओर से मुणोत को सम्मानित किया गया। धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में भगवान गणपति की पूजा-अर्चना के साथ सेवा गतिविधियों को भी महत्व दिया गया। अन्नदान कार्यक्रम के माध्यम से जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने की परंपरा को प्रोत्साहित किया गया। भारतीय संस्कृति में अन्नदान को सेवा और परोपकार का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। कार्यक्रम में महेंद्र मुणोत की सहभागिता के दौरान आयोजकों ने उनका सम्मान किया। गणेश उत्सव और नवरात्रि जैसे पर्व धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ समाज में आपसी सहयोग, सद्भाव और सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करते हैं। विजयनगर में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से धार्मिक आयोजन और सामाजिक सेवा के समन्वय की झलक देखने को मिली।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए भी इंटरनेट मौलिक अधिकार, उम्र के आधार पर पूर्ण प्रतिबंध से इनकार

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026 भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका उपयोग करना बच्चों सहित प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के नाम पर उन्हें इंटरनेट से पूरी तरह वंचित करना उचित नहीं है। अदालत ने बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया है। संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) का उल्लेख न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 15 अक्टूबर को दिए गए आदेश में इंटरनेट तक पहुंच के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में इंटरनेट तक पहुंच का अधिकार महत्वपूर्ण है। पीठ के अनुसार, बच्चों को भी उनकी उम्र की परवाह किए बिना ये अधिकार प्राप्त हैं। इंटरनेट शिक्षा, जानकारी प्राप्त करने और अपने विचार व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। बच्चों पर पूर्ण प्रतिबंध समाधान नहीं अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखने से उनकी ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती। आशंका है कि कठोर प्रतिबंधों के कारण बच्चे कम निगरानी वाले और अधिक असुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लग सकते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि यदि किसी बच्चे को ऑनलाइन धमकी, उत्पीड़न या शोषण का सामना करना पड़ता है, तो प्रतिबंधों के कारण वह अपने माता-पिता या किसी विश्वसनीय वयस्क को घटना बताने से डर सकता है। इससे उसकी सुरक्षा और सहायता प्राप्त करने की संभावना प्रभावित हो सकती है। सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर जोर सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्चों से संबंधित यौन शोषण और दुर्व्यवहार की सामग्री को इंटरनेट से हटाने में संबंधित प्लेटफॉर्म और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया। अदालत का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हानिकारक सामग्री और उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। केवल बच्चों की इंटरनेट तक पहुंच रोक देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। पीठ ने ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री का पता लगाने, उसे हटाने और शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। विज्ञापन पैरेंटल कंट्रोल और चाइल्ड मोड जैसे उपाय महत्वपूर्ण अदालत ने बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखने के बजाय उनकी उम्र के अनुरूप सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत पर बल दिया। इनमें पैरेंटल कंट्रोल, सोशल मीडिया खातों के लिए चाइल्ड मोड और बच्चों के लिए स्वाभाविक रूप से हानिकारक सामग्री तक पहुंच को नियंत्रित करना शामिल है। ऐसे उपाय बच्चों को इंटरनेट के शैक्षणिक और रचनात्मक लाभ प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं, साथ ही उन्हें ऑनलाइन खतरों से बचाने में भी सहायक हो सकते हैं। NDTV केंद्र सरकार को नियम बनाने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश अदालत ने केंद्र सरकार से बच्चों के यौन शोषण से संबंधित ऑनलाइन सामग्री का पता लगाने और उसे हटाने के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश तथा मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है। आगे की कार्यवाही में यह महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी डिजिटल अधिकारों और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के बीच संतुलन के महत्व को सामने लाती है। इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय बच्चों को सुरक्षित उपयोग के लिए शिक्षित करना, अभिभावकों की निगरानी बढ़ाना और हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है भारतार्थ खबर का विश्लेषण: बच्चों की डिजिटल सुरक्षा केवल प्रतिबंधों से सुनिश्चित नहीं हो सकती इसके लिए परिवार, विद्यालय, सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।

  • पंथवाद छोड़ो, महावीर पथ अपनाओ: जैन समाज की एकता, आत्मशुद्धि और मानवता की सेवा का संदेश

    भारतार्थ खबर (Bhaarataarth.com) जोधपुर | 17 अक्टूबर 2026 पंथों की पहचान से ऊपर उठकर महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का आह्वान जैन धर्म की मूल शिक्षाएं अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, आत्मसंयम और जीवदया पर आधारित हैं। भगवान महावीर ने मनुष्य को बाहरी पहचान से अधिक अपने आचरण, विचारों और कर्मों की शुद्धता पर ध्यान देने का संदेश दिया। ऐसे में जैन समाज के भीतर पंथों के नाम पर बढ़ती दूरियों, आपसी मतभेदों और धार्मिक गतिविधियों के स्वरूप को लेकर आत्ममंथन की आवश्यकता महसूस होती है। इसी विचार को केंद्र में रखकर मोटीवेशन मास्टर्स—चैतन्य चेतना जागृति मंच के माध्यम से नीरज सिंघवी, जोधपुर ने ‘पंथवाद छोड़ो—महावीर पथ अपनाओ’ का संदेश प्रस्तुत किया है। इस विचार का मूल उद्देश्य किसी पंथ का विरोध करना नहीं, बल्कि भगवान महावीर की शिक्षाओं को सर्वोपरि रखते हुए जैन समाज में एकता, आध्यात्मिक साधना और मानवता की सेवा को प्रोत्साहित करना है। पंथ से पहले महावीर के सिद्धांतों को समझने की जरूरत जैन समाज में दिगंबर, श्वेतांबर, स्थानकवासी और तेरापंथ सहित विभिन्न परंपराएं प्रचलित हैं। इनकी अपनी धार्मिक मान्यताएं, साधना पद्धतियां और ऐतिहासिक परंपराएं हैं। इन विविधताओं के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या धार्मिक पहचान को प्राथमिकता देते हुए उन मूल सिद्धांतों को पीछे छोड़ दिया जाना चाहिए, जो सभी को नैतिकता, आत्मसंयम और अहिंसा की प्रेरणा देते हैं? नीरज सिंघवी का विचार है कि मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने के लिए केवल किसी पंथ से जुड़ना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को जीवन में उतारना आवश्यक है। यही कारण है कि वे समाज से आग्रह करते हैं कि धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए भगवान महावीर के मूल संदेश को अपने जीवन का केंद्र बनाया जाए। विज्ञापन नवकार मंत्र: सामूहिक आध्यात्मिक एकता का आधार प्रस्तावित ‘महावीर पथ’ की पहली प्रमुख अवधारणा एकांत में नवकार मंत्र का जाप है। नीरज सिंघवी का सुझाव है कि जैन समाज के लोग पंथगत भेदभाव से ऊपर उठकर एक शांत स्थान पर एक साथ बैठें और नवकार मंत्र का जाप करें। नवकार मंत्र जैन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधुओं को नमस्कार किया जाता है। इसका संदेश आध्यात्मिक गुणों के प्रति श्रद्धा और आत्मकल्याण की प्रेरणा से जुड़ा है। इस प्रस्ताव के अनुसार, एक साझा हॉल में 108 बार नवकार मंत्र का जाप किया जा सकता है। ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक प्रतीकों, पूजा पद्धतियों और पंथगत प्राथमिकताओं को लेकर विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि सामूहिक साधना के माध्यम से आपसी निकटता बढ़ाना होगा। स्वाध्याय और ध्यान से विकसित हो आत्मशुद्धि महावीर पथ की दूसरी प्रमुख अवधारणा स्वाध्याय और ध्यान है। इसके अंतर्गत समयसार, उत्तराध्ययन सूत्र और दशवैकालिक सूत्र जैसे जैन ग्रंथों के अध्ययन को प्रोत्साहित करने का विचार प्रस्तुत किया गया है। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन तभी सार्थक बनता है, जब उससे व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आए। सत्य बोलना, चोरी से दूर रहना, इंद्रियों पर संयम रखना, क्रोध और अहंकार को कम करना तथा दूसरों के प्रति करुणा रखना आत्मशुद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इस विचार में संतों और विद्वानों की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया गया है। उन्हें केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित रखने के बजाय भगवान महावीर की शिक्षाओं, कर्म सिद्धांत, नैतिकता और आत्मसंयम का व्याख्याकार बनाने पर जोर दिया गया है। यह दृष्टिकोण धार्मिक शिक्षा को दैनिक जीवन से जोड़ने और नई पीढ़ी को आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति आकर्षित करने का प्रयास है। पूजा के साथ जीवदया और सेवा को मिले प्राथमिकता ‘महावीर पथ’ की तीसरी प्रमुख अवधारणा मानवता, जीवदया और विश्वकल्याण की सेवा है। इसमें कहा गया है कि धार्मिक आस्था का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब वह जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। किसी प्यासे को पानी पिलाना, भूखे को भोजन देना, बीमार की सहायता करना, घायल पशुओं की देखभाल करना और जीवों के प्रति करुणा रखना अहिंसा के व्यावहारिक रूप हैं। नीरज सिंघवी का विचार है कि धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा कार्यों को भी प्रमुखता दी जानी चाहिए। मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं में होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा, रक्तदान, नशामुक्ति और जीवदया जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस विचार का केंद्रीय संदेश है कि धार्मिक आस्था का मूल्य केवल अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के आचरण और दूसरों के प्रति उसके व्यवहार से भी आंका जाना चाहिए हालांकि, पूजा-पद्धतियों और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व अलग-अलग जैन परंपराओं में भिन्न हो सकता है। इसलिए सुधार और सेवा की चर्चा करते समय सभी परंपराओं की मान्यताओं का सम्मान करना भी आवश्यक है। जैन समाज की एकता के लिए साझा केंद्र की कल्पना नीरज सिंघवी ने देश के विभिन्न शहरों में ऐसे शांत केंद्र स्थापित करने की कल्पना प्रस्तुत की है, जहां अलग-अलग जैन परंपराओं के अनुयायी एक साथ आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग ले सकें। इस प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु हैं: सामूहिक नवकार मंत्र जाप: सभी परंपराओं के अनुयायियों को साथ बैठकर जाप करने का अवसर मिले। ध्यान और स्वाध्याय: प्रतिदिन ध्यान और जैन ग्रंथों के अध्ययन की व्यवस्था हो। निष्पक्ष धार्मिक मार्गदर्शन: संत और विद्वान भगवान महावीर की शिक्षाओं पर चर्चा करें तथा दूसरे पंथों की आलोचना से बचें। सेवा गतिविधियां: केंद्र से जीवदया, शिक्षा, रक्तदान और नशामुक्ति जैसे कार्य संचालित हों। समान सहभागिता: किसी भी व्यक्ति को उसकी पंथगत पहचान के कारण अलग महसूस न कराया जाए। ऐसे केंद्रों की स्थापना और संचालन के लिए पारदर्शिता, सामूहिक सहमति, वित्तीय जवाबदेही और सभी परंपराओं के प्रति सम्मान आवश्यक होंगे। इन सिद्धांतों के आधार पर यह कल्पना सामाजिक सहयोग का व्यावहारिक माध्यम बन सकती है। युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए आचरण में दिखे उसका संदेश आज की युवा पीढ़ी धर्म से जुड़े प्रश्नों के उत्तर केवल उपदेशों में नहीं, बल्कि व्यवहार और सामाजिक जीवन में भी तलाशती है। यदि धार्मिक संस्थाएं युवाओं को ध्यान, नैतिकता, मानसिक शांति, नशामुक्ति और सेवा के अवसर उपलब्ध कराएं, तो उनके साथ संवाद अधिक सार्थक हो सकता है। पंथगत मतभेदों पर लगातार विवाद करने के बजाय युवाओं को धार्मिक मूल्यों के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ना उपयोगी होगा। इसके लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं, जिनमें प्रश्न पूछने, विचार रखने और आध्यात्मिक विषयों को समझने की स्वतंत्रता हो। हालांकि, यह मानना उचित नहीं होगा कि सभी युवा किसी एक कारण से धार्मिक संस्थाओं से दूर हो रहे हैं। उनकी बदलती रुचियों और अपेक्षाओं को समझने के लिए संवाद और सहभागिता जरूरी है। संपादकीय निष्कर्ष: विविधता का सम्मान, महावीर के मूल्यों का अनुसरण ‘पंथवाद छोड़ो—महावीर पथ अपनाओ’ का विचार जैन समाज के भीतर एकता, आध्यात्मिक साधना और सेवा की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है। इसकी सार्थकता इस बात में होगी कि इसे किसी पंथ के विरोध के रूप में नहीं, बल्कि साझा मूल्यों को मजबूत करने के सकारात्मक प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया जाए। जैन समाज की विभिन्न परंपराओं का अपना इतिहास और धार्मिक महत्व है। इसलिए एकता का अर्थ इन परंपराओं को समाप्त करना नहीं, बल्कि उनके बीच संवाद, परस्पर सम्मान और सहयोग को बढ़ाना होना चाहिए। भगवान महावीर की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए यदि व्यक्ति अहिंसा को व्यवहार में उतारे, सत्य का पालन करे, आत्मसंयम विकसित करे और जरूरतमंदों की सहायता करे, तो धार्मिक साधना का सामाजिक प्रभाव भी दिखाई देगा। महावीर पथ का सार यही हो सकता है—अपनी परंपरा का सम्मान करें, दूसरों की आस्था का आदर करें और भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारें। मोटीवेशन मास्टर्स—चैतन्य चेतना जागृति मंच का संदेश है: जिद वही, जो मंजिल तक ले जाए। और आध्यात्मिक मंजिल की दिशा में अहिंसा, आत्मशुद्धि, सहिष्णुता तथा मानवता की सेवा महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।

  • परिसीमन पर फिर गरमाई सियासत, खड़गे ने मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने को कहा

    भारतार्थ खबरसंवाददाता अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली,17 अक्टूबर 2026। केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन संबंधी बदलावों को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि व्यापक संवैधानिक प्रभाव वाले विधायी प्रस्तावों को संसद में विचारार्थ प्रस्तुत करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों को चर्चा का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। खड़गे ने 16 अक्टूबर को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि परिसीमन से जुड़े नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को आपस में चर्चा करने के साथ अन्य संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए। चौथी बार उठाई सर्वदलीय बैठक की मांग खड़गे के अनुसार, उन्होंने इससे पहले 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त 2026 को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। ताजा पत्र के माध्यम से उन्होंने एक बार फिर सरकार से सभी दलों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ने की अपील की है। कांग्रेस का तर्क है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय पर निर्णय लेने से पहले व्यापक चर्चा और विभिन्न राजनीतिक दलों की चिंताओं पर विचार करना आवश्यक है। पार्टी ने जल्दबाजी में विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय सहमति बनाने पर जोर दिया है। अप्रैल में संवैधानिक संशोधन विधेयक को नहीं मिला था जरूरी बहुमत खड़गे ने अपने पत्र में अप्रैल 2026 में लोकसभा में पेश संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का भी उल्लेख किया। यह विधेयक लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से जुड़ा था तथा परिसीमन संबंधी प्रस्तावों के साथ लाया गया था। 17 अप्रैल को हुए मतदान में विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े। इसके बाद इससे संबंधित विधायी प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ सके। खड़गे ने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए सरकार से आग्रह किया है कि नए प्रस्ताव तैयार करते समय विपक्ष और अन्य संबंधित पक्षों के विचारों को पर्याप्त महत्व दिया जाए। विज्ञापन मानसून सत्र के सत्रावसान पर भी उठाए सवाल कांग्रेस अध्यक्ष ने संसद के मानसून सत्र की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। उनके 16 अक्टूबर के पत्र के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ था। खड़गे ने इस स्थिति को असामान्य बताते हुए संसदीय प्रक्रिया में स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सरकार से यह भी अपेक्षा की कि संसद में महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने से पहले निर्धारित प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन किया जाए। क्या है परिसीमन और क्यों अहम है यह मुद्दा? परिसीमन का अर्थ निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है। इसका उद्देश्य चुनावी क्षेत्रों की संरचना और प्रतिनिधित्व से जुड़े पहलुओं को निर्धारित करना होता है। लोकसभा तथा विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का प्रभाव विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। इसी कारण परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर राज्यों और राजनीतिक दलों की चिंताएं महत्वपूर्ण हैं। प्रस्तावित बदलावों के वास्तविक प्रभाव का आकलन उनके आधिकारिक विवरण, संवैधानिक प्रावधानों और लागू किए जाने वाले मानदंडों के आधार पर ही किया जा सकता है। सरकार के अगले कदम पर टिकी निगाहें खड़गे की मांग के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने पर क्या निर्णय लेती है और परिसीमन से संबंधित नए प्रस्तावों को किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाता है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में प्रधानमंत्री की ओर से खड़गे के नवीनतम पत्र पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई थी। परिसीमन पर जारी बहस केवल राजनीतिक दलों के बीच मतभेद का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्रतिनिधित्व, संघीय संतुलन और संसदीय प्रक्रिया से भी है। ऐसे में व्यापक विचार-विमर्श और प्रस्तावों की स्पष्ट जानकारी इस मुद्दे पर सार्थक लोकतांत्रिक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण होगी।

  • ओडिशा में छात्रसंघ चुनावों पर सियासी संग्राम, छह विश्वविद्यालयों में एबीवीपी की जीत से बढ़ी बयानबाजी

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com भुवनेश्वर,17 अक्टूबर 2026। ओडिशा के छह विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जीत को लेकर राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज होने की खबर है। छात्रसंघ चुनावों के नतीजों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बीजू जनता दल (बीजद) के नेता अपने-अपने नजरिये से पेश कर रहे हैं। इन परिणामों ने छात्र राजनीति के साथ-साथ राज्य के राजनीतिक माहौल में भी नई चर्चा छेड़ दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छह विश्वविद्यालयों में एबीवीपी के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, जीतने वाले पदों, विश्वविद्यालयों के नाम, मतों के अंतर और कुल परिणामों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा उपलब्ध होने पर ही चुनावी तस्वीर का समग्र आकलन किया जा सकता है। छात्र राजनीति बनी राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ चुनाव सामान्यतः विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों, शैक्षणिक सुविधाओं, छात्र कल्याण, परिसर की समस्याओं और संगठनात्मक सक्रियता के आधार पर लड़े जाते हैं। लेकिन कई बार इनके परिणाम व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बन जाते हैं। ओडिशा में भी एबीवीपी की जीत को लेकर भाजपा और बीजद के बीच जारी बयानबाजी इसी परिप्रेक्ष्य में देखी जा रही है। भाजपा के लिए एबीवीपी का प्रदर्शन छात्र समुदाय के बीच संगठन की सक्रियता के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, जबकि बीजद सहित अन्य राजनीतिक दल इन नतीजों की व्याख्या अलग ढंग से कर सकते हैं। हालांकि, विश्वविद्यालयों में मिली सफलता को सीधे राज्यव्यापी जनसमर्थन का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। इसके लिए व्यापक चुनावी रुझानों और अन्य राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण भी जरूरी है। विद्यार्थियों के मुद्दे रहें केंद्र में छात्रसंघ चुनावों का वास्तविक महत्व तभी सामने आता है, जब निर्वाचित प्रतिनिधि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान, शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रावासों की सुविधाओं, फीस, रोजगारोन्मुखी शिक्षा और परिसर में सुरक्षित वातावरण जैसे मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम करें। राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन चुनाव परिणामों पर चर्चा तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर होनी चाहिए। फिलहाल, ओडिशा के छह विश्वविद्यालयों में एबीवीपी की जीत को लेकर राजनीतिक दावों के बीच विस्तृत परिणामों और संबंधित पक्षों के प्रमाणित बयानों की पुष्टि महत्वपूर्ण है। अंततः इन चुनावों की कसौटी केवल राजनीतिक दावे नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के हितों के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों का काम होना चाहिए।

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