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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए भी इंटरनेट मौलिक अधिकार, उम्र के आधार पर पूर्ण प्रतिबंध से इनकार

लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
Ashok kumar Singh
2 दिन पहले
3 मिनट पठन
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए इंटरनेट अधिकार, जज की हथौड़ी, टैबलेट पर पढ़ते बच्चे, सुप्रीम कोर्ट भवन

भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026 भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका उपयोग करना बच्चों सहित प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के नाम पर उन्हें इंटरनेट से पूरी तरह वंचित करना उचित नहीं है। अदालत ने बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया है।


संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) का उल्लेख


न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 15 अक्टूबर को दिए गए आदेश में इंटरनेट तक पहुंच के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में इंटरनेट तक पहुंच का अधिकार महत्वपूर्ण है।

पीठ के अनुसार, बच्चों को भी उनकी उम्र की परवाह किए बिना ये अधिकार प्राप्त हैं। इंटरनेट शिक्षा, जानकारी प्राप्त करने और अपने विचार व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।


बच्चों पर पूर्ण प्रतिबंध समाधान नहीं


अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखने से उनकी ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती। आशंका है कि कठोर प्रतिबंधों के कारण बच्चे कम निगरानी वाले और अधिक असुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लग सकते हैं।

पीठ ने यह भी कहा कि यदि किसी बच्चे को ऑनलाइन धमकी, उत्पीड़न या शोषण का सामना करना पड़ता है, तो प्रतिबंधों के कारण वह अपने माता-पिता या किसी विश्वसनीय वयस्क को घटना बताने से डर सकता है। इससे उसकी सुरक्षा और सहायता प्राप्त करने की संभावना प्रभावित हो सकती है।


सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर जोर


सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्चों से संबंधित यौन शोषण और दुर्व्यवहार की सामग्री को इंटरनेट से हटाने में संबंधित प्लेटफॉर्म और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

अदालत का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हानिकारक सामग्री और उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। केवल बच्चों की इंटरनेट तक पहुंच रोक देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

पीठ ने ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री का पता लगाने, उसे हटाने और शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

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पैरेंटल कंट्रोल और चाइल्ड मोड जैसे उपाय महत्वपूर्ण


अदालत ने बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखने के बजाय उनकी उम्र के अनुरूप सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत पर बल दिया। इनमें पैरेंटल कंट्रोल, सोशल मीडिया खातों के लिए चाइल्ड मोड और बच्चों के लिए स्वाभाविक रूप से हानिकारक सामग्री तक पहुंच को नियंत्रित करना शामिल है।

ऐसे उपाय बच्चों को इंटरनेट के शैक्षणिक और रचनात्मक लाभ प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं, साथ ही उन्हें ऑनलाइन खतरों से बचाने में भी सहायक हो सकते हैं। NDTV


केंद्र सरकार को नियम बनाने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश


अदालत ने केंद्र सरकार से बच्चों के यौन शोषण से संबंधित ऑनलाइन सामग्री का पता लगाने और उसे हटाने के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश तथा मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करने की दिशा में कदम उठाने को कहा है।

इस मामले में अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है। आगे की कार्यवाही में यह महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।


सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी डिजिटल अधिकारों और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के बीच संतुलन के महत्व को सामने लाती है। इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय बच्चों को सुरक्षित उपयोग के लिए शिक्षित करना, अभिभावकों की निगरानी बढ़ाना और हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है


भारतार्थ खबर का विश्लेषण: बच्चों की डिजिटल सुरक्षा केवल प्रतिबंधों से सुनिश्चित नहीं हो सकती

इसके लिए परिवार, विद्यालय, सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।

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