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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • दिल्ली पहुंचे पुतिन, मोदी से अहम मुलाकात; BRICS पर दुनिया की नजर

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए। भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक राजनीति, व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पुतिन के भारत आगमन के साथ ही सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दिल्ली में BRICS नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी की गई है। रूसी राष्ट्रपति के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित अन्य प्रमुख नेताओं की मौजूदगी से राजधानी में सुरक्षा और कूटनीतिक तैयारियां बढ़ गई हैं। मोदी-पुतिन मुलाकात पर खास नजर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में मानी जा रही है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, निवेश और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। हाल ही में 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी। उस बातचीत में दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। रूस-यूक्रेन संघर्ष और उससे जुड़े वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह बैठक विशेष महत्व रखती है। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान की वकालत करता रहा है। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। रक्षा और ऊर्जा सहयोग भी एजेंडे में भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा सहयोग महत्वपूर्ण आधार रहे हैं। पुतिन की यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की संभावना है। रूसी पक्ष की ओर से भारत को Su-57 लड़ाकू विमान और संबंधित तकनीकी सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी अंतिम रक्षा सौदे की पुष्टि बैठक के बाद ही मानी जाएगी। इसके अलावा ऊर्जा, परमाणु सहयोग, दुर्लभ खनिजों, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तलाशे जाने की संभावना है। भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण के अनुरूप और व्यापक बनाने पर भी बातचीत हो सकती है। BRICS का बढ़ता वैश्विक महत्व भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह BRICS सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। BRICS का विस्तार होने के बाद संगठन में अब पहले की तुलना में अधिक देशों की भागीदारी है और उसका आर्थिक तथा राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है। सम्मेलन में वैश्विक व्यापार, वित्तीय सहयोग, आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। हालांकि BRICS को केवल अमेरिका के विरोधी मंच के रूप में देखना वास्तविक तस्वीर को सरल बनाना होगा। समूह के सदस्य देशों के अपने-अपने आर्थिक और रणनीतिक हित हैं। भारत के अमेरिका, यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भी महत्वपूर्ण संबंध हैं, जबकि रूस और चीन के साथ भारत के अलग-अलग स्तर के रणनीतिक संबंध हैं। इसलिए नई दिल्ली के लिए चुनौती यह है कि वह विभिन्न शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे। अमेरिका पर भी नजर, लेकिन भारत की नीति अलग पुतिन की भारत यात्रा के बीच अमेरिकी प्रतिक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा स्वाभाविक है। रूस के साथ भारत के ऊर्जा और रक्षा संबंध तथा BRICS के बढ़ते प्रभाव को अमेरिका और पश्चिमी देशों में भी नजदीकी से देखा जाता है। लेकिन इसे सीधे तौर पर किसी एक देश की ‘बेचैनी’ या ‘हार’ के रूप में प्रस्तुत करना कूटनीतिक वास्तविकताओं को अत्यधिक सरल बना देगा। भारत की विदेश नीति का मूल आधार अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखना रहा है। नई दिल्ली रूस के साथ पुराने रणनीतिक संबंधों को जारी रखते हुए अमेरिका, यूरोप, जापान, पश्चिम एशिया और अन्य भागीदारों के साथ भी अपने संबंध मजबूत कर रही है। युद्ध के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने BRICS सम्मेलन की गंभीरता बढ़ा दी है। BRICS के भीतर भी विभिन्न देशों के हित पूरी तरह समान नहीं हैं। ऐसे में भारत के सामने चुनौती केवल सम्मेलन की मेजबानी करना नहीं, बल्कि विभिन्न मतों के बीच सहमति बनाने की भी है। भारत के लिए BRICS एक ऐसा मंच है जहां वह विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक संस्थाओं में सुधार, व्यापारिक सहयोग और बहुपक्षीय संवाद को आगे बढ़ा सकता है। पुतिन का दिल्ली आगमन इसी व्यापक कूटनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है। मोदी-पुतिन वार्ता में होने वाले निर्णय और BRICS सम्मेलन से निकलने वाले साझा संदेश यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत किस तरह बदलती वैश्विक शक्ति-संरचना के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है। फिलहाल दुनिया की नजर दिल्ली पर है। लेकिन इस सम्मेलन की वास्तविक सफलता किसी एक देश के दूसरे पर भारी पड़ने में नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक क्षमता, BRICS की एकजुटता और वैश्विक चुनौतियों पर व्यावहारिक सहयोग की दिशा तय करने में होगी।

  • PMAY-U 2.0: शहरों में 1 करोड़ परिवारों को घर का सहारा

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026। शहरी क्षेत्रों में अपना पक्का घर बनाने या खरीदने का सपना देख रहे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) महत्वपूर्ण सरकारी आवास योजना बनकर सामने आई है। केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में एक करोड़ अतिरिक्त पात्र शहरी परिवारों को घर बनाने, खरीदने या किफायती किराये के आवास से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। योजना के लिए कुल 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 2.30 लाख करोड़ रुपये की सरकारी सहायता का प्रावधान किया गया है। चार माध्यमों से मिलेगा आवास का लाभ PMAY-U 2.0 को चार प्रमुख घटकों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इनमें लाभार्थी आधारित आवास निर्माण (BLC), साझेदारी में किफायती आवास (AHP), किफायती किराये का आवास (ARH) और ब्याज सब्सिडी योजना (ISS) शामिल हैं। पात्र परिवार अपनी पात्रता और जरूरत के अनुसार संबंधित विकल्प का लाभ उठा सकते हैं। योजना का उद्देश्य केवल मकान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शहरी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सुरक्षित तथा सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। किसे मिल सकता है लाभ? योजना के तहत ऐसे पात्र शहरी परिवारों को लक्षित किया गया है, जिनके पास देश में कहीं भी अपना पक्का मकान नहीं है। PMAY-U 2.0 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के पात्र परिवारों को शामिल किया गया है। हालांकि प्रत्येक घटक के लिए आय, आवास और अन्य पात्रता शर्तें अलग हो सकती हैं। ब्याज सब्सिडी वाले घटक के तहत EWS, LIG और MIG परिवारों के लिए निर्धारित आय सीमा और ऋण संबंधी शर्तें लागू होती हैं। इसलिए किसी भी परिवार को आवेदन से पहले आधिकारिक पात्रता नियमों की जांच करना जरूरी है। महिलाओं की भागीदारी पर जोर PMAY-U में महिलाओं के स्वामित्व या सह-स्वामित्व को विशेष महत्व दिया गया है। आवासीय संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का उद्देश्य उन्हें परिवार के भीतर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी है। केंद्र सरकार के अनुसार, अगस्त 2026 तक PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत 1.25 करोड़ से अधिक मकान स्वीकृत किए जा चुके थे, जबकि एक करोड़ से अधिक मकान पूरे कर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके थे। सरकार ने बताया कि PMAY-U के तहत एक करोड़ मकान महिलाओं को आवंटित किए गए हैं। किराये के मकानों का भी विकल्प PMAY-U 2.0 की खास बात यह है कि इसमें केवल मकान बनाने या खरीदने पर ही जोर नहीं है। किफायती किराये के आवास (ARH) को भी योजना का अलग घटक बनाया गया है। इससे शहरी प्रवासी श्रमिकों, कामकाजी महिलाओं, औद्योगिक श्रमिकों, बेघर लोगों और अन्य जरूरतमंद समूहों को किफायती किराये के आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार की बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता केंद्र सरकार ने PMAY-U 2.0 के लिए 10 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश का अनुमान रखा है, जिसमें 2.30 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सरकारी सहायता शामिल है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ अतिरिक्त पात्र शहरी परिवारों की आवासीय जरूरत पूरी करना है। सरकार की ओर से योजना के तहत BLC और AHP जैसे घटकों में प्रति आवास केंद्रीय सहायता का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि वास्तविक लाभ राशि और पात्रता संबंधित घटक, राज्य/केंद्रशासित प्रदेश तथा लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती है। आवेदन से पहले पात्रता जांच जरूरी PMAY-U 2.0 का लाभ स्वतः सभी परिवारों को नहीं मिलता। आवेदक की आय, परिवार की स्थिति, पहले से पक्का मकान होने या नहीं होने तथा संबंधित योजना घटक की शर्तों का सत्यापन किया जाता है। इसलिए पात्र परिवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक PMAY-Urban पोर्टल और संबंधित नगर निकाय/राज्य की आवास एजेंसी से वर्तमान दिशा-निर्देशों की पुष्टि करनी चाहिए। योजना की आधिकारिक गाइडलाइन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के PMAY-Urban पोर्टल पर उपलब्ध है। शहरी आवास की बढ़ती जरूरत के बीच PMAY-U 2.0 सरकार की बड़ी आवासीय पहल है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि पात्र परिवारों तक सहायता कितनी तेजी, पारदर्शिता और प्रभावी तरीके से पहुंचती है।

  • रेलवे को बड़ी मंजूरी, 9 राज्यों में 1200 किमी से ज्यादा ट्रैक का विस्तार

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 10 सितंबर 2026 भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने करीब ₹20,804 करोड़ की लागत वाली आठ मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत लगभग 1,196 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क में अतिरिक्त ट्रैक जोड़े जाएंगे। इन परियोजनाओं का विस्तार 9 राज्यों के 31 जिलों तक होगा। इनमें पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना शामिल हैं। सरकार के अनुसार इससे करीब 6,900 से अधिक गांवों की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। दक्षिण भारत के रेल नेटवर्क को भी बड़ा फायदा परियोजनाओं के दूसरे हिस्से में दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण रेल मार्ग शामिल हैं। अरक्कोनम-रेनिगुंटा, व्हाइटफील्ड-बंगारपेट, होसुर-ओमलूर, सेलम-करूर-दिंडीगुल और सिकंदराबाद-घाटकेसर-काजीपेट जैसे मार्गों पर अतिरिक्त लाइन या मल्टी-ट्रैकिंग का काम किया जाएगा। इनमें कर्नाटक के व्हाइटफील्ड-बंगारपेट मार्ग और होसुर-ओमलूर परियोजना भी शामिल हैं, जिससे दक्षिण भारत में यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से रेलवे की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता करीब 74 मिलियन टन प्रति वर्ष बढ़ सकती है। इससे कोयला, सीमेंट, लौह-इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, खाद्यान्न और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुओं के परिवहन में मदद मिलने की उम्मीद है। ट्रेनों की आवाजाही में राहत की उम्मीद मौजूदा व्यस्त रेल मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैक बनने से ट्रेनों के संचालन में लचीलापन बढ़ सकता है। इससे यात्री और मालगाड़ियों को एक ही नेटवर्क पर बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी और व्यस्त मार्गों पर दबाव कम करने का लक्ष्य है। सभी आठ परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि बेहतर रेल नेटवर्क से लॉजिस्टिक्स व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों के साथ-साथ माल की आवाजाही भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

  • BRICS Summit से पहले दिल्ली में हलचल,

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 10 सितंबर 2026 नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारत 12 और 13 सितंबर को इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। सम्मेलन में प्रमुख BRICS देशों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी इस सम्मेलन को विशेष महत्व दे रही है। इन नेताओं के बीच संभावित बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष का असर वैश्विक राजनीति के साथ-साथ ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में BRICS देशों के बीच आपसी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण बनाने की चुनौती भी महत्वपूर्ण होगी। बैठक में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत BRICS देशों के बीच डिजिटल भुगतान और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा से जुड़ी संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। BRICS के विस्तार के साथ संगठन का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ा है। हालांकि सदस्य देशों के बीच अलग-अलग रणनीतिक और राजनीतिक हित भी हैं। ऐसे माहौ

  • भारत जोड़ो यात्रा की पांचवीं सालगिरह पर बीके हरिप्रसाद ने गिनाईं यात्रा की वजहें

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 9 सितंबर 2026। भारत जोड़ो यात्रा की पांचवीं सालगिरह के अवसर पर कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि देश में सामाजिक सद्भाव, शांति और एकता का संदेश देना था। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। हरिप्रसाद ने अपने संबोधन में देश में जाति और धर्म के आधार पर होने वाली हिंसा, सामाजिक भेदभाव तथा अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासनकाल में नफरत का माहौल बढ़ा और इन घटनाओं के खिलाफ पर्याप्त आवाज नहीं उठाई गई। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इन पर भाजपा की प्रतिक्रिया को इस वक्तव्य में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने गुजरात के बिलकिस बानो मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकरण में दोषियों की रिहाई और उनके स्वागत को लेकर देश में गंभीर सवाल उठे थे। इसी तरह उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय के शोधार्थी रोहित वेमुला की आत्महत्या का जिक्र करते हुए सामाजिक भेदभाव के मुद्दे को उठाया। हरिप्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी के लिए भारत जोड़ो यात्रा प्रधानमंत्री पद हासिल करने का अभियान नहीं था। उनके अनुसार, यात्रा का मूल उद्देश्य देश में शांति, भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान किसानों, छात्रों, मजदूरों, महिलाओं, सफाई कर्मचारियों और देवदासी समुदाय से जुड़े लोगों से बातचीत की गई। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि देवदासी प्रथा पर बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने संबंधित महिला की बात ध्यान से सुनी और उसकी पीड़ा को समझने का प्रयास किया। हरिप्रसाद के मुताबिक, इस बातचीत ने राहुल गांधी को भावुक कर दिया। यात्रा के विस्तार का किया उल्लेख KPCC अध्यक्ष ने भारत जोड़ो यात्रा और उसके बाद की पदयात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने देश के विभिन्न हिस्सों में पैदल यात्रा कर आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने महात्मा गांधी की दांडी यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि पैदल यात्रा भारतीय राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों की महत्वपूर्ण परंपरा रही है। हरिप्रसाद ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने आम लोगों के बीच जाकर उनके अनुभव सुने और सामाजिक तथा आर्थिक समस्याओं को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यात्रा का संदेश नफरत के बजाय आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना था। कर्नाटक की राजनीति और सामाजिक सौहार्द का मुद्दा कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के संदर्भ में हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी केवल गारंटी योजनाओं के आधार पर सत्ता में नहीं आई, बल्कि उसने राज्य में शांति और सामाजिक सौहार्द कायम करने का वादा भी किया था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से राज्य में शांति और भाईचारे का माहौल बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा कि कार्यकर्ताओं को किसी व्यक्ति विशेष के पीछे चलने के बजाय पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों को समझना चाहिए। NEET और युवाओं के मुद्दे पर निशाना हरिप्रसाद ने अपने संबोधन में NEET परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में अनियमितताओं से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ और युवा कांग्रेस तथा छात्र कांग्रेस को इस विषय पर संघर्ष तेज करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखे राजनीतिक आरोप लगाए। हरिप्रसाद ने केंद्र सरकार की नीतियों और विपक्ष के साथ उसके व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहना चाहिए। गांधी और अंबेडकर के विचारों का किया उल्लेख हरिप्रसाद ने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीति का लक्ष्य समाज के कमजोर और वंचित लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पार्टी के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और भारत की एकता से जुड़े विचारों को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के शांति और भाईचारे के संदेश को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना ही भारत जोड़ो यात्रा की भावना को आगे बढ़ाने का प्रभावी तरीका होगा। हरिप्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नफरत के माहौल का जवाब आपसी प्रेम, सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों से देना चाहिए।

  • ‘बल्लारी चलो’ कल होगा पूरा, संघर्ष रहेगा जारी : बी.वाई. विजयेंद्र

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बल्लारी, 9 सितंबर 2026।भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के नेतृत्व में राज्य सरकार के कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निकाली गई ‘बल्लारी चलो’ पदयात्रा का पहला चरण 10 सितंबर को समाप्त होगा। विजयेंद्र ने कहा कि पदयात्रा को मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों का व्यापक समर्थन मिला है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि संघर्ष के पहले चरण का समापन है। बल्लारी में पत्रकारों से बातचीत में विजयेंद्र ने बताया कि पदयात्रा के दौरान करीब 9 किलोमीटर की यात्रा कर वाल्मीकि सर्कल पहुंचा जाएगा। इसके बाद 10 सितंबर की सुबह विभिन्न मंदिरों में दर्शन के पश्चात वाल्मीकि सर्कल से सम्मेलन स्थल तक मार्च निकाला जाएगा। शाम करीब 4:30 बजे मुख्य कार्यक्रम शुरू होने की जानकारी दी गई। वरिष्ठ भाजपा नेताओं की मौजूदगी विजयेंद्र के अनुसार, सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, बसवराज बोम्मई, जगदीश शेट्टार, आर. अशोक, चलवाड़ी नारायणस्वामी, भाजपा के कर्नाटक प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। सम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। विजयेंद्र ने कहा कि दस दिन की पदयात्रा पूरी होने के बाद भी भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं के खिलाफ भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर विकास कार्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतियों से गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और पिछड़े वर्गों के हित प्रभावित हो रहे हैं। ‘पदयात्रा राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव’ विजयेंद्र ने ‘बल्लारी चलो’ को अपने राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने महिलाओं, किसानों, युवाओं और विभिन्न वंचित समुदायों के लोगों से सीधे संवाद किया। उनके अनुसार, इस दौरान आम लोगों की समस्याओं और उनकी परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिला। उन्होंने सम्मेलन में करीब 40 से 50 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई। साथ ही कार्यक्रम के लिए प्रशासन द्वारा शाम 6:30 बजे तक समय निर्धारित किए जाने पर आपत्ति जताई। विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा कानून का उल्लंघन नहीं करेगी, लेकिन प्रशासन को कानूनी प्रावधानों के नाम पर शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम में अनावश्यक बाधा नहीं डालनी चाहिए। बैनर फाड़े जाने का आरोप विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि पदयात्रा के दौरान भाजपा के बैनर रातों-रात हटाए या फाड़े गए। उन्होंने कहा कि सरकार दबाव में है और अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया इस बयान में सामने नहीं आई। वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का दावा आगामी चुनावों को लेकर विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा वरिष्ठ नेताओं के सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए संगठन की एकजुटता पर जोर दिया। नवाली रिजर्वॉयर को लेकर भाजपा का समर्थन नवाली रिजर्वॉयर परियोजना के मुद्दे पर विजयेंद्र ने भाजपा की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में परियोजना का निर्माण किया जाना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा विशेष विधानसभा सत्र बुलाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को सदन में प्रमुखता से उठाएगी और किसानों के हित में अपनी मांग रखेगी। ‘किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष’ प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुद्दे को लेकर भाजपा पर कांग्रेस नेताओं को निशाना बनाने के आरोपों को विजयेंद्र ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि ‘बल्लारी चलो’ किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं था, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और किसानों, युवाओं तथा आम जनता के अधिकारों की बात रखने के उद्देश्य से किया गया। विजयेंद्र ने कहा कि ‘बल्लारी चलो’ का पहला चरण भले ही समाप्त हो रहा है, लेकिन जनता के मुद्दों को लेकर भाजपा का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप सरकार बनाने के लिए लगातार राजनीतिक और लोकतांत्रिक स्तर पर संघर्ष करेगी।

  • मोदी-शी मुलाकात पर नजर

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 9 सितंबर 2026 भारत और चीन के रिश्तों में हाल के महीनों में आए बदलाव के बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है। भारत में होने वाले आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना के बीच दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। सात साल बाद भारत आ सकते हैं शी शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। दोनों देशों के बीच 2020 के सीमा तनाव के बाद संबंधों में काफी खटास आई थी। अब सीमा क्षेत्र में संवाद और उच्चस्तरीय बातचीत के जरिए रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश जारी है। सीमा विवाद पर भी बातचीत जारी भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच पूर्वी क्षेत्र में हाल ही में दो दिन की उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्र में सीमा से जुड़े मुद्दों और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा थी। दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी संवाद को आगे बढ़ाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संपर्क जारी है। रिश्तों में सुधार की कोशिश विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। ऐसे में मोदी और शी जिनपिंग की संभावित बातचीत भारत-चीन संबंधों के अगले चरण के लिए अहम संकेत दे सकती है। कारोबार और सीमा पर रहेगी नजर भारत और चीन के बीच राजनीतिक संबंधों के साथ व्यापार और सीमा पर शांति भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार का असर आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। हालांकि सीमा विवाद सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी दोनों देशों के सामने मौजूद हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि BRICS के मंच पर मोदी और शी के बीच संभावित बातचीत भारत-चीन संबंधों को कितना नया रास्ता देती है। दुनिया की निगाहें इस मुलाकात और उसके संभावित संदेश पर टिकी हैं।

  • मोदी-पुतिन की बड़ी बैठक

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 9 सितंबर 2026 भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर शुक्रवार को दिल्ली में महत्वपूर्ण बातचीत होने जा रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। यह बैठक 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले होगी और इसमें दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। रक्षा और ऊर्जा पर नजर मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा और ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दों में रहने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोग रहा है। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में भारत और रूस के बीच बढ़ते सहयोग को भी बातचीत में महत्वपूर्ण स्थान मिलने की उम्मीद है। Su-57 पर भी चर्चा संभव रूसी पक्ष के अनुसार, भारत को Su-57 लड़ाकू विमान की संभावित बिक्री भी बातचीत के एजेंडे में शामिल है। इसके साथ ही दोनों देश रक्षा सहयोग के अन्य पहलुओं पर भी विचार कर सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसलों को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा। BRICS से पहले अहम मुलाकात भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। पुतिन की भारत यात्रा इसी सम्मेलन के दौरान हो रही है। ऐसे में मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय बैठक को BRICS से पहले भारत-रूस संबंधों की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के तौर पर देखा जा रहा है। यूक्रेन और वैश्विक मुद्दों पर भी नजर दोनों नेताओं की बातचीत में यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी उठ सकते हैं। भारत लगातार संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात करता रहा है। मोदी-पुतिन की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं। इसलिए शुक्रवार की बातचीत से निकलने वाले संकेतों पर भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी।

  • BRICS शिखर सम्मेलन: दुनिया की नजर भारत पर

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 9 सितंबर 2026 भारत की राजधानी नई दिल्ली अगले कुछ दिनों में दुनिया की बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है। 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और विभिन्न मंत्रीस्तरीय तथा आधिकारिक बैठकों के बाद अब संगठन के शीर्ष नेताओं का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। BRICS से भारत की बड़ी उम्मीदें BRICS आज केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, पर्यावरण और विकास जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हुई है। भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष BRICS सहयोग को लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित बैठकों से यह संकेत मिला है कि भारत अपनी अध्यक्षता को केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक सहयोग और परिणामों पर केंद्रित करना चाहता है। वैश्विक दक्षिण की आवाज का मंच BRICS की बढ़ती भूमिका का एक महत्वपूर्ण पहलू विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूती देना है। भारत की अध्यक्षता में भी लोगों-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं, क्षेत्रीय संघर्षों, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार से जुड़े बदलावों का सामना कर रही है, BRICS देशों के बीच संवाद का महत्व और बढ़ जाता है। मोदी-पुतिन मुलाकात भी अहम शिखर सम्मेलन से पहले भारत-रूस संबंध भी चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 31 अगस्त को बिश्केक में मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने 12-13 सितंबर के BRICS शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन का भारत में स्वागत करने की बात कही थी। इससे आगामी सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ BRICS के व्यापक एजेंडे पर भी नजर बढ़ गई है। सिर्फ सम्मेलन नहीं, भारत की कूटनीतिक परीक्षा भारत के लिए यह सम्मेलन एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन से कहीं अधिक है। अध्यक्ष देश के रूप में भारत के सामने अलग-अलग हितों और प्राथमिकताओं वाले देशों को एक साझा मंच पर साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। व्यापार और निवेश से लेकर ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, पर्यावरण और वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका तक—BRICS के सामने कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सदस्य देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन उनके अपने राष्ट्रीय हित भी हैं। यही कारण है कि दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन केवल नेताओं की बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे निकलने वाले संदेश यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि आने वाले समय में BRICS वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है। भारत की अध्यक्षता का असली मूल्यांकन परिणामों से किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन की अध्यक्षता का मूल्यांकन केवल बैठकों और घोषणाओं की संख्या से नहीं होता। असली कसौटी यह होती है कि उन बैठकों से आम लोगों, व्यापार, तकनीक, शिक्षा, पर्यावरण और आर्थिक सहयोग के स्तर पर क्या ठोस परिणाम निकलते हैं। भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान शिक्षा, पर्यावरण, संचार, बौद्धिक संपदा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में कई बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इससे यह स्पष्ट है कि BRICS एजेंडा कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। अब नजर 12 और 13 सितंबर के शिखर सम्मेलन पर है। दुनिया यह देखना चाहेगी कि भारत की अध्यक्षता में BRICS कितने ठोस और दीर्घकालिक सहयोग की दिशा तय करता है। संपादकीय निष्कर्ष BRICS शिखर सम्मेलन भारत के लिए अपनी कूटनीतिक क्षमता, वैश्विक नेतृत्व और विकासशील देशों की आवाज को प्रभावी ढंग से सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे दौर में हो रहा है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे में भारत की सबसे बड़ी सफलता यही होगी कि वह अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच संवाद और सहयोग की ऐसी दिशा तैयार करे, जिसका असर घोषणाओं से आगे वास्तविक दुनिया में दिखाई दे।

  • ‘हनुमान अंश’ की टीम CM योगी से मिली

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) लखनऊ | 9 सितंबर 2026 नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद फिल्म की टीम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और अभिनेता शोभिनव सत्य सहित फिल्म से जुड़े लोगों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता के बीच यह मुलाकात चर्चा का विषय बनी हुई है। छोटे बजट की फिल्म की बड़ी कमाई उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार फिल्म का निर्माण करीब ₹2 करोड़ के बजट में किया गया था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। 8 सितंबर तक सामने आए आंकड़ों में इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब ₹169.20 करोड़ और भारत में नेट कलेक्शन करीब ₹143.13 करोड़ बताया गया। कम बजट और बड़े बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के अंतर ने फिल्म को खास चर्चा में ला दिया है। हालांकि इसे सभी हिंदी या क्षेत्रीय फिल्मों को पीछे छोड़ने वाली “सबसे ऐतिहासिक” फिल्म कहना फिलहाल तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। नीम करोली बाबा से जुड़ी कहानी ‘हनुमान अंश’ की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित बताई गई है। इसी आध्यात्मिक और सामाजिक विषय के कारण फिल्म को दर्शकों के एक वर्ग से विशेष प्रतिक्रिया मिली है। UP में टैक्स-फ्री होगी फिल्म? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश में फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने की चर्चा भी तेज हुई है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से फिल्म को टैक्स-फ्री करने की आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल मांग और चर्चा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। वहीं, उत्तराखंड में फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। असली उपलब्धि क्या है? ‘हनुमान अंश’ की कहानी और इसकी कम लागत के मुकाबले बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है—क्या मजबूत विषय और दर्शकों से जुड़ाव बड़े बजट से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है? फिलहाल फिल्म की टीम की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात और उत्तर प्रदेश में टैक्स-फ्री किए जाने की संभावित चर्चा पर दर्शकों की नजर बनी हुई है।

  • टूटी कॉलोनियों के वोटरों को राहत, फॉर्म-8 से जुड़ सकेगा नाम

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच उन लोगों के लिए राहत की खबर है, जिनके मकान हाल के महीनों में अदालती आदेश के बाद तोड़े गए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाता केवल मकान टूटने या पता बदलने के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होंगे। पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-8 भरकर अपना नाम नए पते पर मतदाता सूची में दर्ज करा सकते हैं। रजिस्टर्ड पते पर एन्यूमरेशन फॉर्म देने के निर्देश दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची में दर्ज पते पर रहने वाले पात्र मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराया जाए। अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के लिए संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना प्रमुख शर्त है। चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19 का हवाला देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी कारण से अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास नहीं कर रहा है, तो वह पता बदलने के लिए फॉर्म-8 के माध्यम से आवेदन कर सकता है। नए पते पर जुड़ेगा नाम फॉर्म-8 के माध्यम से आवेदन करने पर मतदाता का नाम नए निवास स्थान की संबंधित मतदाता सूची में स्थानांतरित किया जा सकता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुराने निर्वाचन क्षेत्र की सूची से उसका नाम हटाया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाता केवल आवास टूटने या स्थान परिवर्तन के कारण मताधिकार से बाहर न हो। करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं को बांटे गए फॉर्म दिल्ली में 30 जून से 17 अगस्त तक घर-घर जाकर SIR के तहत सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराए गए। जिन मतदाताओं से बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म प्राप्त नहीं कर सके, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जो घर पर नहीं मिले, पंजीकृत पते से दूसरे स्थान पर चले गए, जिनकी मृत्यु हो चुकी है अथवा जिन्हें किसी अन्य स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकृत पाया गया है। इसके अलावा बीएलओ द्वारा अनुपस्थित, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाता के रूप में चिह्नित किए गए मामलों में भी संबंधित व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है। मताधिकार सुरक्षित रखने पर जोर चुनाव आयोग की इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना और स्थान परिवर्तन के मामलों में रिकॉर्ड को सही करना है। ऐसे मतदाताओं को अपने वर्तमान निवास स्थान के अनुसार फॉर्म-8 के जरिए नाम स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

  • छह महीने राशन नहीं लिया तो कार्ड हो सकता है निष्क्रिय

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026। राशन कार्ड धारकों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से लगातार छह महीने तक अपने खाद्यान्न का उठाव नहीं करने वाले लाभार्थियों के राशन कार्ड को अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया जा सकता है। केंद्र सरकार के संशोधित लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) नियंत्रण आदेश में ऐसे लाभार्थियों के कार्ड को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करने और इसके बाद ई-केवाईसी के माध्यम से पात्रता का पुनर्मूल्यांकन करने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार, “साइलेंट राशन कार्ड” और डुप्लिकेट लाभार्थियों के लिए जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अस्थायी निष्क्रियता के बाद तीन महीने की ई-केवाईसी पुनर्वैधीकरण अवधि उपलब्ध रहेगी। यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से SMART-PDS में लागू की जाएगी। किसके कार्ड पर हो सकती है कार्रवाई? ऐसे लाभार्थी इस प्रक्रिया के दायरे में आ सकते हैं, जिन्होंने पिछले छह महीनों में अपने राशन कार्ड पर मिलने वाले खाद्यान्न का लाभ नहीं उठाया है। केंद्र के नियम के अनुसार राज्य सरकारों को ऐसे कार्डों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करने के बाद अगले तीन महीनों में फील्ड सत्यापन और ई-केवाईसी के जरिए लाभार्थी की पात्रता की दोबारा जांच करनी होगी। इसका उद्देश्य लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे कार्डों, डुप्लिकेट लाभार्थियों और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान कर सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है। 1 अक्टूबर से SMART-PDS में लागू होगी व्यवस्था खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई SOP के तहत साइलेंट कार्डों की अस्थायी निष्क्रियता और उसके बाद ई-केवाईसी से पुनर्वैधीकरण की सुविधा 1 अक्टूबर 2026 से SMART-PDS में सक्रिय होगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर ऐसा राशन कार्ड स्थायी रूप से रद्द हो जाएगा। नियम में अस्थायी निष्क्रियता के बाद लाभार्थी को अपनी पहचान और पात्रता साबित करने का अवसर दिया गया है। 21 सितंबर की तारीख को लेकर राज्यवार स्थिति देखें कुछ राज्यों में छह महीने से राशन नहीं लेने वाले “साइलेंट कार्डधारकों” को 21 सितंबर तक राशन उठाने की समयसीमा बताई गई है। उदाहरण के तौर पर झारखंड में 21 सितंबर 2026 तक राशन उठाने और उसके बाद 1 अक्टूबर से ऐसे कार्डों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई है। इसलिए राशन कार्ड धारकों को यह समझना जरूरी है कि 21 सितंबर की तारीख सभी राज्यों के लिए समान अंतिम तारीख मानना उचित नहीं होगा। अपने राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग अथवा अधिकृत PDS दुकान से स्थानीय समयसीमा की पुष्टि करना बेहतर होगा। कार्ड निष्क्रिय हुआ तो क्या होगा? यदि किसी पात्र लाभार्थी का कार्ड इस प्रक्रिया के तहत अस्थायी रूप से निष्क्रिय होता है, तो उसके लिए ई-केवाईसी और फील्ड सत्यापन का अवसर रहेगा। संबंधित राज्य सरकार पात्रता की दोबारा जांच कर उचित कार्रवाई कर सकती है। इसलिए जिन परिवारों ने लंबे समय से राशन नहीं लिया है, उन्हें अपने राशन कार्ड की स्थिति जांचनी चाहिए। परिवार के सदस्यों की ई-केवाईसी पूरी है या नहीं, इसकी भी पुष्टि करना जरूरी है। नियमित राशन लेने वालों को घबराने की जरूरत नहीं जो पात्र लाभार्थी नियमित रूप से PDS दुकान से अपना राशन प्राप्त कर रहे हैं, उनके लिए इस विशेष “साइलेंट कार्ड” प्रक्रिया को लेकर सामान्यतः चिंता का कारण नहीं है। कार्रवाई मुख्य रूप से लंबे समय से अपने निर्धारित खाद्यान्न अधिकार का उपयोग नहीं करने वाले कार्डों की समीक्षा से जुड़ी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने यह भी बताया है कि 30 जुलाई 2026 तक राशन कार्ड लाभार्थियों की ई-केवाईसी कवरेज 90.64 प्रतिशत थी। विभाग लगातार राशन कार्ड डेटा को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सोशल मीडिया के संदेशों पर न करें भरोसा राशन कार्ड को लेकर सोशल मीडिया पर “कार्ड हमेशा के लिए रद्द” होने जैसी सूचनाएं प्रसारित हो सकती हैं। ऐसे संदेशों पर बिना पुष्टि के भरोसा करने के बजाय लाभार्थियों को अपने राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, अधिकृत राशन दुकान या सरकारी पोर्टल से कार्ड की वास्तविक स्थिति जांचनी चाहिए। खास तौर पर किसी अनजान व्यक्ति को आधार, राशन कार्ड या बैंक संबंधी दस्तावेज सौंपने से बचें। किसी भी ई-केवाईसी या सत्यापन प्रक्रिया को अधिकृत माध्यम से ही पूरा करें।

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