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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • एशियन गेम्स में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का गोल्ड पर कब्जा, PM मोदी ने दी बधाई

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 22 सितंबर 2026 नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम को जीत की बधाई देते हुए इसे भारतीय क्रिकेट के लिए शानदार उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार भारतीय महिला क्रिकेट टीम का यह प्रदर्शन आत्मविश्वास, कौशल और शानदार टीमवर्क से जुड़ा रहा। इस जीत के साथ भारत को एशियन गेम्स के इस संस्करण में अपना पहला स्वर्ण पदक मिला है। महिला क्रिकेट टीम की इस उपलब्धि को भारतीय खेलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने पूरी टीम को आगे भी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह प्रदर्शन देश की युवा महिला क्रिकेटरों को प्रेरित करेगा।

  • छह साल बाद फिर जुड़ा दिल्ली-ग्वांगझोउ हवाई मार्ग, सीधी उड़ान सेवा शुरू

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026 भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। करीब छह वर्ष के अंतराल के बाद दिल्ली और ग्वांगझोउ के बीच सीधी यात्री उड़ान सेवा फिर शुरू हो गई है। यह सेवा 21 सितंबर 2026 से बहाल की गई है। सीधी उड़ान सेवा शुरू होने से दिल्ली और ग्वांगझोउ के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अब सीधा हवाई विकल्प उपलब्ध होगा। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय और कनेक्टिंग उड़ानों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। नई सेवा के तहत दिल्ली से ग्वांगझोउ के लिए निर्धारित उड़ान रात में रवाना होगी और अगले दिन सुबह ग्वांगझोउ पहुंचेगी। वापसी की उड़ान भी दोनों शहरों के बीच सीधा संपर्क उपलब्ध कराएगी। भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएं वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान बाधित हुई थीं। इसके बाद लंबे समय तक दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क सीमित रहा। अब प्रमुख एयरलाइनों की सेवाओं के दोबारा शुरू होने से दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क धीरे-धीरे बढ़ रहा है। दिल्ली-ग्वांगझोउ उड़ान सेवा की बहाली से कारोबार, पर्यटन, विद्यार्थियों और दोनों देशों के बीच यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों को सुविधा मिलने की संभावना है। ग्वांगझोउ चीन का एक प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र है, जिससे इस हवाई मार्ग का व्यावसायिक महत्व भी है। हवाई संपर्क में यह विस्तार भारत और चीन के बीच लोगों की आवाजाही को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • शैफाली के शतक से भारत एशियन गेम्स के फाइनल में

    भारतार्थ खबर www.bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026। एशियन गेम्स 2026 के महिला क्रिकेट सेमीफाइनल में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बांग्लादेश को 114 रन से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट पर 195 रन बनाए, जिसके जवाब में बांग्लादेश की टीम 81 रन पर सिमट गई। भारत की पारी की सबसे बड़ी उपलब्धि शैफाली वर्मा का नाबाद शतक रहा। उन्होंने 49 गेंदों पर 100 रन बनाए, जिसमें तीन चौके और नौ छक्के शामिल रहे। यह शैफाली का पहला टी-20 अंतरराष्ट्रीय शतक है और एशियन गेम्स की महिला क्रिकेट प्रतियोगिता में शतक लगाने वाली पहली बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज हुआ। भारतीय पारी में स्मृति मंधाना ने 37 रन और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 40 रन बनाए। मंधाना ने अपनी पारी के दौरान महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 छक्के पूरे करने वाली पहली भारतीय महिला का आंकड़ा भी हासिल किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 15.4 ओवर में 81 रन पर पूरी टीम पवेलियन लौट गई। भारत ने 114 रन से मुकाबला अपने नाम कर फाइनल में जगह बनाई। अब भारतीय महिला टीम का सामना स्वर्ण पदक के मुकाबले में श्रीलंका से होगा। भारत की टीम पिछले एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट का स्वर्ण पदक जीत चुकी है और इस बार भी स्वर्ण पदक के लिए मैदान में उतरेगी।

  • भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता 20 अक्टूबर से लागू, निर्यात को मिलेगा नया अवसर

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026 भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। इस समझौते के लागू होने के साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में व्यापक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले विभिन्न उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होने की संभावना है। व्यापार समझौते में वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं, निवेश तथा पेशेवरों और विद्यार्थियों की आवाजाही से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच कारोबारी गतिविधियों और आर्थिक सहयोग के विस्तार का रास्ता खुल सकता है। न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को आने वाले वर्षों में बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। समझौते में भारत के कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है। वहीं वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स सहित कई क्षेत्रों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में नए अवसर बनने की संभावना है। 20 अक्टूबर से लागू होने वाला यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • दिल्ली में 23-24 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी की दो दिवसीय चिंतन बैठक

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों की दो दिवसीय चिंतन बैठक आयोजित होने जा रही है। बैठक में शासन व्यवस्था, नीतियों के क्रियान्वयन और विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श होने की संभावना है। बैठक की तैयारी के लिए सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों को इन दोनों दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने के लिए कहा गया है। बैठक में कुछ मंत्रालयों की ओर से अपने-अपने विभागों में किए गए सुधारों और उठाए गए कदमों पर प्रस्तुतीकरण भी दिए जाने की संभावना है। सुधार और शासन व्यवस्था पर होगा मंथन दो दिवसीय बैठक में सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू करने, मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही नीति निर्माण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक कार्यों में समय प्रबंधन को बेहतर करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श की संभावना है। मंत्रालयों के कामकाज की होगी समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज और उनकी प्राथमिकताओं पर चर्चा हो सकती है। कुछ मंत्री अपने विभागों में किए गए कार्यों तथा सुधारों से संबंधित प्रस्तुतीकरण दे सकते हैं। आने वाले समय की प्राथमिकताओं और सरकार की कार्ययोजना को लेकर भी बैठक में विचार किया जा सकता है। हालांकि, बैठक में लिए जाने वाले किसी विशेष निर्णय या नई घोषणा की जानकारी बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी। मंत्रियों की मौजूदगी रहेगी महत्वपूर्ण 23 और 24 सितंबर की बैठक में केंद्रीय कैबिनेट के सभी मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। राज्य मंत्रियों की भागीदारी को लेकर उपलब्ध जानकारी में अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह बैठक सरकार के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और कार्यों की प्रगति पर सामूहिक विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगी।

  • ब्यावर संघ का गुरु दर्शन-वंदन कार्यक्रम, संतों का लिया आशीर्वाद

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com बेंगलुरु,19 सितंबर 2026। श्री ब्यावर संघ (बेंगलुरु) की ओर से शहर में चातुर्मास के लिए विराजित साधु-संतों एवं सतियाजी म. सा. के दर्शन-वंदन का विशेष कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संघ के सदस्यों के बीच आपसी परिचय और एकजुटता को बढ़ावा देने के साथ संतों के सान्निध्य एवं आशीर्वाद का लाभ प्राप्त करना बताया गया। संघ के अध्यक्ष ललित डाकलिया ने बताया कि इस श्रृंखला के प्रथम चरण में वी.वी. पुरम स्थित महावीर धर्मशाला में चातुर्मास के लिए विराजित श्री समकित मुनि जी म. सा. के दर्शन-वंदन का कार्यक्रम रखा गया। संघ के सदस्यों ने मुनिश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वाध्याय के लिए किया प्रेरित प्रवचन के बाद संघ के सदस्यों ने मुनिश्री से परिचय एवं चर्चा की। इस दौरान धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया गया। संघ के महामंत्री रुपचंद कुमट ने बताया कि प्रवचन के तत्काल बाद सदस्यों को म. सा. से संवाद का अवसर मिला और सभी ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनिश्री ने संघ के सदस्यों को नियमित रूप से स्वाध्याय करने तथा धर्म-अध्ययन के माध्यम से आत्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। ‘साधूनां दर्शनं पुण्यं’ का संदेश कार्यक्रम संयोजक टीकमचंद हिंगड़ एवं अर्चित पारख ने कहा कि जैन परंपरा में साधु-साध्वी भगवंत के दर्शन और वंदन को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने ‘साधूनां दर्शनं पुण्यं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों का सान्निध्य श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु में विराजित अन्य साधु-संतों एवं सतियाजी म. सा. के दर्शन-वंदन के कार्यक्रम भी आगे आयोजित किए जाएंगे। बड़ी संख्या में सदस्य रहे उपस्थित इस अवसर पर संघ के उपाध्यक्ष बहादुर कांकरिया, कोषाध्यक्ष दिनेश लोढा, सहमंत्री विनय राठौड़, पूर्व अध्यक्ष पदमराज बोहरा, लकी बोहरा, अरविन्द मेडतवाल, प्रकाश बोहरा, अनिल कोठारी, कुलदीप छाजेड़, विकास खटोड़, नरेश बोहरा, चेतन रेदासनी, चन्दू डाकलिया, मोनिका कुमट, सीमा बोहरा सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से संघ के सदस्यों ने संतों के दर्शन-वंदन का लाभ लेते हुए धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता का संकल्प व्यक्त किया।

  • एशियन गेम्स 2026 का आगाज, मनु भाकर और पवन सहरावत ने थामा तिरंगा

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नागोया, जापान | 19 सितंबर 2026 जापान के आइची-नागोया में शनिवार को 20वें एशियन गेम्स का भव्य आगाज हुआ। रंगारंग और हाईटेक उद्घाटन समारोह के साथ एशिया के इस बड़े खेल आयोजन की औपचारिक शुरुआत हुई। जापान के सम्राट नारुहितो ने खेलों के उद्घाटन की घोषणा की। उद्घाटन समारोह में भारत की ओर से ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर और स्टार कबड्डी खिलाड़ी पवन सहरावत ने तिरंगा थामकर भारतीय दल का नेतृत्व किया। दोनों ध्वजवाहकों के नेतृत्व में भारतीय खिलाड़ियों ने एथलीट परेड में हिस्सा लिया। पवन सहरावत को अंतिम समय में पुरुष ध्वजवाहक बनाया गया। इससे पहले शॉटपुट खिलाड़ी ताजिंदरपाल सिंह तूर को यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन समारोह के लिए जरूरी आधिकारिक किट समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें ध्वजवाहक की भूमिका से हटना पड़ा। इस बार एशियन गेम्स में 45 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं और प्रतियोगिताएं 43 खेलों में आयोजित की जा रही हैं। भारतीय दल पिछले एशियन गेम्स के प्रदर्शन के बाद एक बार फिर पदक तालिका में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद के साथ मैदान में उतरा है। मनु भाकर ने भारतीय खिलाड़ियों से प्रतियोगिता के अनुभव का आनंद लेने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का संदेश भी दिया है। एशियन गेम्स के शुरू होने के साथ अब भारतीय खिलाड़ियों की नजरें विभिन्न खेलों में पदक जीतने पर रहेंगी।

  • 51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र, रोजगार मेले में बड़ा रोजगार अपडेट

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 19 सितंबर 2026 देश के युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। 20वें रोजगार मेले के दौरान 51 हजार से अधिक नवनियुक्त युवाओं को सरकारी सेवा के नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन देशभर के 45 स्थानों पर किया गया। नवनियुक्त युवाओं को केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में जिम्मेदारी मिलेगी। इनमें रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वित्तीय सेवा विभाग और रक्षा मंत्रालय सहित विभिन्न सरकारी संस्थान शामिल हैं। 20वें रोजगार मेले के साथ अब तक विभिन्न रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 12.75 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है। रोजगार मेले का उद्देश्य सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज करना और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवनियुक्त युवाओं से नागरिक-केंद्रित सेवा और जिम्मेदारी के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं की प्रतिभा, कौशल और रोजगार के नए अवसरों पर भी बात की। रोजगार से जुड़ी यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवा नई भर्तियों और नियुक्तियों से संबंधित अपडेट पर नजर रखते हैं। यही वजह है कि रोजगार मेले से जुड़ी जानकारी युवाओं और नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच खास चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • संन्यास, सत्ता और उत्तर प्रदेश के बदलते आर्थिक परिदृश्य पर एक संपादकीय दृष्टि

    लेखक एवं संपूर्ण श्रेय: अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश प्रेषितकर्ता: श्री राम सोनी, गोपालगंज, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन व्यवस्था को लेकर पिछले वर्षों में अनेक प्रकार की बहसें होती रही हैं। विशेष रूप से 2017 के बाद प्रदेश की कानून-व्यवस्था, निवेश, औद्योगिक विकास, बुनियादी ढाँचे और प्रशासनिक कार्यशैली में हुए बदलावों को लेकर समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में यह सवाल भी उठता रहा है कि क्या एक संन्यासी के रूप में सार्वजनिक जीवन में आए व्यक्ति के नेतृत्व में आर्थिक विकास और प्रशासनिक परिवर्तन की कोई अलग अवधारणा विकसित हो सकती है? इस लेख का मूल विचार इसी प्रश्न के इर्द-गिर्द घूमता है। संन्यास और राजधर्म का संबंध भारतीय परंपरा में संन्यास को सामान्यतः त्याग, वैराग्य और व्यक्तिगत मोह से दूरी के रूप में देखा जाता है। किंतु भारतीय राजधर्म की परंपरा में शासक की जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत संयम तक सीमित नहीं मानी गई, बल्कि प्रजा की सुरक्षा, संपदा की रक्षा और राज्य की समृद्धि को भी शासन का महत्वपूर्ण दायित्व माना गया। मनुस्मृति में अर्थ-संपदा के संबंध में एक सूत्र उद्धृत किया जाता है— “अलब्धं चैव लिप्सेत लब्धं रक्षेत्प्रयत्नतः।रक्षितं वर्धयेच्चैव वृद्धं पात्रेषु निक्षिपेत्॥” इसका व्यापक आशय यह माना जाता है कि जो प्राप्त नहीं हुआ है उसे प्राप्त किया जाए, प्राप्त संपदा की रक्षा की जाए, उसका संवर्धन किया जाए और बढ़ी हुई संपदा का उपयोग उचित एवं जनहितकारी कार्यों में किया जाए। इसी विचार को लेख में आधुनिक शासन और आर्थिक नीति के संदर्भ से जोड़कर देखा गया है। 2017 के बाद कानून-व्यवस्था और निवेश की बहस उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक अपराध, रंगदारी, राजनीतिक संरक्षण और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस होती रही है। प्रयागराज, कानपुर, मेरठ और प्रदेश के दूसरे औद्योगिक तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में अपराधी गिरोहों के प्रभाव को लेकर भी अलग-अलग समय पर चर्चाएँ सामने आती रही हैं। वर्तमान शासन के समर्थकों का तर्क रहा है कि अपराध और माफिया के विरुद्ध कठोर कार्रवाई ने प्रदेश में कारोबारी वातावरण को बदलने में भूमिका निभाई है। दूसरी ओर, आलोचक ऐसी कार्रवाइयों की वैधानिक प्रक्रिया और उनके व्यापक प्रभाव पर प्रश्न उठाते रहे हैं। इसलिए किसी भी परिवर्तन को समझने के लिए कानून-व्यवस्था के आँकड़ों, निवेश के वास्तविक क्रियान्वयन और रोजगार के अवसरों को एक साथ देखना आवश्यक है। निवेश और औद्योगिक विकास उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में बड़े निवेश प्रस्तावों, औद्योगिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और रक्षा उत्पादन जैसी परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तथा विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं को प्रदेश के आर्थिक विस्तार के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है। बुंदेलखंड के संदर्भ में रक्षा उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। ब्रह्मोस से जुड़ी उत्पादन गतिविधियों सहित रक्षा क्षेत्र में निवेश को प्रदेश में नई औद्योगिक संभावनाओं के रूप में देखा गया है। इन परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव केवल निवेश घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर स्थापित इकाइयों, उत्पादन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था में हुए परिवर्तन से मापा जाना चाहिए। माफिया कार्रवाई और संपत्ति पर बहस प्रदेश में संगठित अपराध से जुड़े लोगों की संपत्तियों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी पिछले वर्षों में सार्वजनिक विमर्श का प्रमुख विषय रही है। सरकार समर्थक पक्ष इसे कानून के शासन को मजबूत करने और अपराध से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई के रूप में देखता है। वहीं आलोचक यह प्रश्न उठाते हैं कि ऐसी कार्रवाइयों में कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक समीक्षा का पूरी तरह पालन होना आवश्यक है। इस विषय में आंकड़ों और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। राजस्व और वित्तीय व्यवस्था उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में राज्य के अपने कर राजस्व की भूमिका महत्वपूर्ण है। पिछले वर्षों में राज्य के बजट और कर संग्रह के आकार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लेख में राज्य के कर राजस्व को लगभग 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर ढाई लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँचने का उल्लेख किया गया है। इस तरह के आँकड़ों को समझने के लिए संबंधित वित्तीय वर्षों, कर मदों और बजट दस्तावेजों को साथ रखकर देखना जरूरी है। फिर भी व्यापक स्तर पर यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी आबादी और विशाल अर्थव्यवस्था वाले राज्य के लिए राजस्व संग्रह बढ़ाना तथा विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना शासन की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ और स्थानीय अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की पारंपरिक हस्तकला और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी पहल को बढ़ावा दिया गया है। भदोही की कालीन उद्योग, मुरादाबाद की पीतल कला, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताला उद्योग जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की कोशिशें प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसी योजनाओं की सफलता का आकलन निर्यात, उत्पादन, कारीगरों की आय, रोजगार और बाजार विस्तार जैसे ठोस संकेतकों के आधार पर किया जाना चाहिए। बुनियादी ढाँचे से बदलती तस्वीर उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर पिछले वर्षों में विशेष जोर दिया गया है। जेवर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की परियोजना, विभिन्न एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर जैसी योजनाएँ प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजनाएँ हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में परिवहन, व्यापार, उद्योग और निवेश की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। हालांकि अंतिम प्रभाव का मूल्यांकन परियोजनाओं के पूर्ण संचालन और उनके आर्थिक परिणामों के बाद अधिक स्पष्ट रूप से किया जा सकेगा। एक अलग राजनीतिक और प्रशासनिक मॉडल की बहस इस पूरे विमर्श का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि क्या उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में हुआ परिवर्तन केवल सरकार बदलने का परिणाम है या प्रशासनिक प्राथमिकताओं, कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढाँचे और निवेश नीति में हुए व्यापक बदलाव का हिस्सा है? समर्थक इसे निर्णायक परिवर्तन के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक कई दावों और उपलब्धियों के स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर देते हैं। इसीलिए किसी भी शासन का मूल्यांकन केवल भाषणों या राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश के वास्तविक क्रियान्वयन, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिक उत्पादन, अपराध के आँकड़ों, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व जैसे मापदंडों से किया जाना अधिक उपयोगी होगा। निष्कर्ष उत्तर प्रदेश की यात्रा एक लंबे सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की कहानी है। प्रदेश ने अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से लेकर औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढाँचे और स्थानीय उत्पादों के वैश्विक बाजार तक पहुँचने की दिशा में कई प्रयास देखे हैं। इस परिवर्तन को लेकर राजनीतिक और वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं। लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि उपलब्धियों के दावों की जाँच ठोस आँकड़ों से हो और आलोचनाओं का परीक्षण भी प्रमाणों के आधार पर किया जाए। संन्यास और सत्ता के संबंध पर भारतीय परंपरा में लंबे समय से विमर्श होता आया है। आधुनिक लोकतंत्र में इस विमर्श को संविधान, कानून, आर्थिक परिणाम और जनकल्याण के वास्तविक मापदंडों के साथ जोड़कर देखना ही अधिक सार्थक होगा। प्रेषितकर्ता -श्री राम सोनी गोपालगंज आज़मगढ़ उत्तर प्रदेश लेखक एवं संपूर्ण श्रेय: अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

  • "बलमा जी का स्टूडियो" कहानी संग्रह की समीक्षा

    समीक्षक- लालबहादुर चौरसिया लाल, आजमगढ़, 9452088890 साहित्य शब्दों का मकड़जाल नहीं, वरन साहित्यकार की मनोवृत्ति, देश-काल, समाज, संस्कार एवं परिस्थितियों का एक विशाल दस्तावेज होता है, जिसे पढ़कर पाठक साहित्यकार की साहित्य साधना,लेखन-शैली के साथ-साथ सामाजिक विसंगतियों, कुरीतियों, प्रथाओं, रिवाज एवं मानवीय मूल्यों से परिचित होता है। साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज की दशा-दिशा का यथार्थ चित्रण करते हुए उसे पटल पर लाने का महनीय कार्य करता है, जिससे संपूर्ण जनमानस रू-ब-रू होता है। अभी हाल में मैंने ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. सोनी पांडेय द्वारा लिखा गया कहानी संग्रह "बलमा जी का स्टूडियो" पढ़ा। सन् 2018 में रश्मि प्रकाशन, लखनऊ से प्रकाशित यह कुल 10 कहानियों का एक मजबूत कहानी संग्रह है। आज स्मार्टफोन एवं इंटरनेट के सोशल मीडिया के भरे जाल में उलझा पाठक वर्ग पुस्तकों से दूर होता जा रहा है, जो दुखद है। जिसका शिकार मैं भी हूँ। पिछले दिनों मैं डॉ. श्यामवृक्ष मौर्य जी की तीन पुस्तकों की पांडुलिपियाँ लेकर 'स्पीच पब्लिकेशन', आजमगढ़ पहुँचा। जहाँ मेरी मुलाकात स्पीच पब्लिकेशन के मालिक श्री सत्यम प्रजापति से हुई। सत्यम जी मेरे पुराने परिचित थे। अतः काफी सम्मान मिला। वहाँ पर अनेक साहित्यिक पुस्तकों का जखीरा पड़ा था। वहीं मुझे कहानी संग्रह "बलमा जी का स्टूडियो" हाथ लगा। कुछ गुदगुदी पैदा करता शीर्षक, पुस्तक पढ़ने की अभिलाषा जगा गया। डॉ अजय गौतम को भेंट किया गया यह कहानी संग्रह सत्यम जी से मांगकर मैं घर ले आया। अगले दिन कहानी संग्रह का पन्ना पलटते ही मेरी मुलाकात उषा किरण खान जी द्वारा लिखी गई भूमिका से हुई। साहित्य जगत में एक बड़ा नाम उनका सुन रखा था। सो भूमिका पढ़ने की इच्छा हुई और पढ़ गया। मात्र एक पृष्ठ में समायी भूमिका पूरी 118 पृष्ठों एवं 10 कहानियों के विस्तार को समेटने में सक्षम थी। अगला पन्ना पलटा। मोटे अक्षरों में शीर्षक था "दो बातें रचनाकार की"। तभी हमारे अत्यंत प्रिय कवि मित्र श्री राकेश पांडे 'सागर' जी मेरी दुकान पर आ गए। किताब को बंद करते हुए मैंने उनका अभिवादन किया। उन्होंने पूछा, "क्या पढ़ रहे थे भाई साहब?" मैं पुस्तक को दिखाते हुए बताया, "यही एक कहानी संग्रह है - 'बलमा जी का स्टूडियो'।" वे चौंक पड़े, "अरे! यह कहानी संग्रह सोनी पांडेय द्वारा लिखा गया बड़ा ही मजेदार कहानी संग्रह है। हमने भी पढ़ा है।" आव-भगत, हाल-चाल और कुछ बातें हुईं। आधे घंटे का समय बीत गया। कवि मित्र चले गए। लेकिन एक बात दिमाग में नाच उठी - "बड़ा ही मजेदार कहानी संग्रह है"। मैं दुकानदारी में व्यस्त हो गया, लेकिन उनकी बात मेरे दिमाग में नाचती रही। अगले दिन अपनी स्टेशनरी की दुकान पर खाली बैठा था। एकाध ग्राहक आ रहे थे। सोचा, वह कहानी संग्रह ही पढ़ लूँ। यह क्या, दुकान से किताब ही गायब! इधर-उधर ढूंढा, कहीं पता ही नहीं चला। यहीं तो रखा था, किताब गई तो कहाँ गई? मुझे परेशान देखकर मेरे ज्येष्ठ पुत्र ने मुझसे पूछा, "क्या हुआ? क्यों इतना परेशान है? क्या ढूंढ रहे हैं?" मैंने झुंझलाते हुए, "एक कहानी की किताब थी - 'बलमा जी का स्टूडियो'। यहीं रखा था, मिल नहीं रही है।" वह मुस्कुराते हुए बोला, "अरे उसे तो हम ले गए हैं। बड़ी मजेदार कहानी है उसमें।" मेरा माथा ठनका। सभी कह रहे हैं "बड़ी मजेदार कहानी है"। आखिर क्या है इसमें? बेटे पर बाप का रौब दिखाते हुए किताब अपने कब्जे में लिया और पढ़ने में लीन हो गया। कई दिनों तक यह पुस्तक मेरी सहयात्री बनी रही। किताबें पढ़ना मेरे लिए कठिन काम है। किंतु व्यक्ति को जब किसी चीज की ललक हो जाए तो कठिनाईयां रफूचक्कर हो जाती हैं। पहली कहानी 'बलमा जी का स्टूडियो' चार दिन में खत्म हुई। दूसरी कहानी 'टूटती वर्जनाएँ' दो दिन में, तीसरी 'स्वर्ग-नरक' एक दिन में। इसी तरह धीरे-धीरे "अंजुमन खाला को गुस्सा क्यों आता है" "बुद्धि शुद्धि महायज्ञ" "जाजिम" "कील" "सूरमा भोपाली" "एही ठैयां मुनरी हेरानी हो रामा" और "मोरा साड़ी अनाड़ी ना माने राजा" अर्थात दसों कहानी पढ़कर मुझे असीम सुख मिला। कितना गहरा अनुभव एवं श्रमसाध्य रहा होगा इस कहानी संग्रह का लेखन! इस कहानी संग्रह की पहली कहानी में विशुद्ध ग्रामीण जीवन, अभाव एवं सीमित संसाधनों के साथ-साथ खिलखिलाता गाँव है। किशोरों व किशोरियों के मन में प्रेमांकुरण एवं उनकी मनोदशा का बड़ा ही यथार्थ वर्णन है। यह कहानी आज से लगभग 25-30 वर्ष पहले से लेकर आज तक के बदलते परिवेश से दग्ध ग्रामीण संस्कृतियों, मान्यताओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों का एक रूपहला गुलदस्ता है, जहाँ भिन्न-भिन्न मनोभावों वाले ग्रामीण एवं उनका दृष्टिकोण नज़र आता है। लगभग सभी कहानियाँ गाँव की विशालता समेटे हुए मह-मह महक रही हैं। लेखिका डॉ सोनी पांडेय ने अपने कहानी संग्रह में गाँव को गाँव जैसा ही उतारा है। कोई बनावटीपन नहीं। कोई दिखावटी नक्काशी नहीं। यही इस कहानी संग्रह की मुख्य विशेषता है। पहली कहानी का एक अंश देखें - पृष्ठ संख्या 10 (कोली में साइकिल के पुराने टायर को सिटकुन से मार-मार भागते नग-धड़ंग बच्चे। इनार की जगत पर गोंटी खेलती, खपर-खपर झोंटा खजुआती लड़कियाँ। कुछ कांख में भाई-भतीजे को दबाए खड़ी होकर तमाशा देखतीं..., कुछ डाली में अनाज लेकर बनिए की दुकान से तेल-मसाले की खरीद को जातीं। औरतें सुबह-शाम नियम से खेत की ओर निकलतीं निबटने और डगर में रुककर टोह-टक्कर, इनकी-उनकी लेते चलतीं। मर्द किसानी से निजात पाकर रात को चौबे जी के बरामदे में बैठ गायकी करते। कभी फगुआ, कभी चैता, कभी भजन-कीर्तन। नवयुवकों का भी अपना मंगल दल था, जो समय-समय पर नौटंकी खेलता। जब बरखा नहीं होती, शिव जी की पिंडी इनार में रस्सी से लटका कर रात भर कीर्तन होता, इस आस में कि अकबका के डूबे रहने पर शिव जी जागेंगे और इंद्र को ललकार कर बरखा कराएंगे।) लेखिका डॉ. सोनी पांडेय ने अपनी बेबाक लेखनी से आज के बदलते ग्रामीण परिवेश का बड़ा ही मर्मस्पर्शी वर्णन किया है। कहानी पढ़ते समय पाठक को अपना गाँव, अपना बचपन, अपने मित्र, अपने खेत-खलिहान, अपना सिवान, अपनी पगडंडी, अपना बाजार सब कुछ दृश्यमान हो उठेगा तथा आज उनमें हो रहे बदलाव से आत्मसात करता उनका मन ज़रूर मसोस उठेगा। यह कहानी संग्रह ठेठ गंवई शब्दों के विशाल शब्द-भंडार का भंडारण है। स्मृतियों से ओझल हुए देशज शब्द मुस्कुरा-मुस्कुरा कर हमारा अभिनंदन करने को आतुर से लगते हैं। गाँव की सोंधी मिट्टी की चाशनी में पगे वाक्य ग्रामीण विरासत का चरम गुणगान करते प्रतीत होते हैं। 'टूटती वर्जनाएँ' कहानी में सोनी पांडेय जी ने सिर्फ एक गलत कुल-परंपरा के माध्यम से समाज में व्याप्त हज़ारों पाखंडी परंपराओं पर कुठाराघात करने का सफल प्रयास किया है। कुल की परंपरा के हवन-कुंड में स्वाहा होती एक पढ़ी-लिखी स्त्री की मन:स्थिति के माध्यम से लेखिका ने समाज को जगाने का पुनीत कार्य किया है। घर में आई नवेली वधू को एक सिवान में स्थित किसी काल्पनिक 'चमइया माई' के स्थान पर अपने पति के साथ नग्न होकर पूजन करना - एक विकृत परंपरा का निर्वहन नहीं तो क्या है? डॉ. सोनी सिर्फ कहानी नहीं बुनतीं, बल्कि दूसरे पक्ष के साथ खड़ी होकर तमाम तर्कों द्वारा विकृत परंपरा का खंडन-मंडन भी करती हैं। मातृसत्ता पर पितृसत्ता के दबदबे पर भी उनकी गहरी दृष्टि है। कहानी लिखते समय अमर्यादित शब्द भी मर्यादित, ज़रूरी और चमत्कारिक हो उठते हैं। तभी तो लेखिका लिखती हैं - *पृष्ठ संख्या 41* (एक दिन ज्योत्सना ने पूछा, "चाची जी, आप चमइया माई की पूजा करते, असहज नहीं हुई थीं?" "काहे की असहजता, बहिनी! देहिये न देखेगी छिनरी। कोठरी में घुसकर उसके कपार पर टांग पसरकर खड़ी हो गई। साया उठा दिया और गाने लगी... 'देखो देखो चमइया हमार सुतुही... देखो'"... और ठठाकर हंसते-हंसते लोटपोट हो गईं।) कहानी 'स्वर्ग-नरक' में सोनी पांडेय ने ग्रामीण संपन्न व्यवसायी परिवार के माध्यम से बुजुर्गों की दशा का बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया है, जो हमें सोचने पर मजबूर करता है। चार-चार पुत्रों व बहुओं के बाद भी परिवार की रीढ़ बुढ़िया की स्थिति के माध्यम से सोनी जी ने कहानी की जो बुनावट की है, वह बिल्कुल यथार्थ और आज की सच्चाई है। देखें पृष्ठ संख्या 48 (अंततः पिछले तीस सालों से जिस आँगन की खूबसूरत कोठरी में विमला देवी रहती आ रही थीं, जिसे पति ने बड़े शौक से उनके लिए बनवाया था, उससे निकाल दी गईं। ऊपर की कोठरी में एक पलंग और ज़रूरत की चीजें रख दी गईं। भयंकर गर्मी में एक कूलर रख तो दिया गया, पर उसमें पानी डालने और चलाने की सुध किसी को नहीं रही।) डॉ. सोनी पांडेय कहानी में सिर्फ समस्याओं का वर्णन नहीं करतीं, बल्कि समस्याओं का कारुणिक बोध भी कराती हैं। अंततः वही वृद्धा देख-रेख के अभाव में मर जाती है। समाज के समक्ष परिवार का बनावटीपन वर्णन करने से डॉ. सोनी नहीं चूकतीं, कह ही जाती हैं। पृष्ठ 55 (दोपहर तक लाश उठ गई। हज़ारों की संख्या में लोग शवयात्रा में शामिल हुए। तेरहवीं के दिन दान का आलम देखने लायक था। ट्रक से महिला मंडल ने साड़ियाँ, कंबल, बर्तन, फल और राशन के पैकेट मंगाए। दिनभर गरीबों में बाँटा। मनोरमा सफेद सिल्क की साड़ी पहने एक सौ एक ब्राह्मणों के पाँव खुद पखार रही थी। सेज-दान में पूरी रसोई के उपयोग के बर्तन, एक साल का राशन, पलंग, गद्दा, रजाई, तकिया विशेष ऑर्डर देकर बनवाया गया था।) सोनी जी को अपनी कहानी में पक्ष और विपक्ष साथ में लेकर चलने की क्षमता है। इसी कहानी में एक और परिवार है - संजय और रेखा जो कि पति-पत्नी हैं तथा संजय की माँ अर्थात रेखा की सास भी हैं। रेखा एक कुलीन पुत्रवधू एवं आदर्श पत्नी धर्म का निर्वहन बड़ी ही तन्मयता से कर रही है, जहाँ रेखा को अपनी सास में साक्षात अपनी माँ के दर्शन हो रहे थे। निश्चित रूप से यह कहानी समाज की दिशा बदलने में भावनात्मक बदलाव पैदा कर सकती है। 'अंजुमन खाला को गुस्सा क्यों नहीं आता' नामक कहानी के माध्यम से सोनी जी ने अपनी उत्कृष्ट लेखन-शैली का शानदार नमूना पेश किया है। गंगा-जमुनी तहजीब में डूबती-उतराती यह कहानी प्रेरणा से भरपूर है। वाक्यों की फुलवारी लगाना तो कोई लेखिका सोनी से सीखे। एक बानगी देखें, *पृष्ठ संख्या 60* (दिन, महीने, साल बीते। हरसिंगार खिलकर झर गए। सावन के झूले उतरे और औरतें फगुआ की फुनगी पर बैठ सपनों की सतरंगी ओढ़नी ताने फुदकती-महकती-गमकती जीने लगीं, अपने औरत होने के तमाम रंजो-गम सहेजे। गली-मोहल्ले में धीरे-धीरे रौनक लौटने लगी। रंगरेज गली फिर से गुलज़ार हो उठी।) समाज में व्याप्त भेदभाव, जाति-पाँति एवं छुआछूत की विशाल खाई की तरफ ध्यान आकृष्ट कराते हुए लेखिका ने बड़े ही पेचीदगी से उसे पाटने का प्रयास किया है। देखें पृष्ठ संख्या 61 (सना चने दाल का हलवा, खुरमा और चिप्स लिए चारपाई पर आकर बैठ गई। हिंदू लड़कियाँ कुछ खाने में संकोच कर रही थीं। सभी असहज थीं इस भय से कि "कैसे खाएँ, मुसलमान के घर का?" खासकर तीन पंडित और दो ठाकुर घरों की लड़कियों - पाँचों ने मना कर दिया। बची मैं और दो-तीन। सना ने न जाने क्या सोचकर बर्फी के आकार में कटा चने दाल का हलवा मेरी तरफ बढ़ाया। प्यार भरी सजल आँखें देख संकोचते, अम्मा से डरते हुए एक पीस उठा लिया और पहला टुकड़ा काटते ही तारीफ करने लगी - "सच में, हलवा हमारे घरों के बेसन के हलवे से अलग और स्वादिष्ट है।" मैं खा रही थी। धीरे-धीरे सबके हाथ बढ़ने लगे - "कि यदि ये पंडित होकर खा सकती हैं तो हम क्यों नहीं?") कहानी 'जाजिम' इस कहानी संग्रह की प्राण है। चारदीवारी से घिरे एक घर में भाइयों का आपसी प्रेम, बहुओं का आपसी मेल-मिलाप और फिर उसमें एक विधवा का होना, वैधव्य जीवन की विभीषिका, कुछ समय बाद दरकती संबंधों की दीवारों तथा शहरी पलायन में विभाजित परिवारों का दंश झेलती एवं अकेलापन महसूस करती एक बेवा गृहिणी की मनोदशा का व्यापक एवं मर्मस्पर्शी वर्णन है। इस कथा संग्रह की प्रत्येक कहानी का कथानक हमें भीतर तक झकझोर कर रख देता है। सभी कहानियां ग्रामीण परिवेश के विभिन्न ताने-बाने के साथ एक नए बिंदु की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं। कहानी का मूल तत्व सभी कहानियों में विद्यमान है। कहानी में प्रवाह निरंतर बना हुआ है। जो सदैव जिज्ञासा उत्पन्न करता है। किंतु कहानी में कहीं-कहीं दोहराव की स्थिति है। भारी मात्रा में देशज शब्दों के प्रयोग से आजकल की युवा पीढ़ी कथा के मर्म को समझने में अकुलाहट अवश्य महसूस करेगी। हालांकि इसमें कहानीकार का कोई दोष नहीं है। कुल मिलाकर "बलमा जी का स्टूडियो" कथा संग्रह एक ऐसा सफल साहित्य पुष्प है जो निरंतर अपनी महक से साहित्य जगत को महकाता रहेगा। इस महत्वपूर्ण एवं श्रमसाध्य कृति के लिए मैं कथाकार डॉ सोनी पांडेय जी को हृदय से धन्यवाद देता हूँ। आप निरंतर साहित्य जगत में नये नये किर्तिमान गढ़ती रहें। समीक्षक -लालबहादुर चौरसिया लाल, साहित्यकार एवं कवि (महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई)

  • देशभर में सेवा और जनभागीदारी के कार्यक्रमों के बीच मना प्रधानमंत्री मोदी का 76वां जन्मदिन

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन 17 सितंबर को देशभर में विभिन्न सेवा, जनभागीदारी और सामाजिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अलग-अलग राज्यों में रक्तदान शिविर, दीप प्रज्ज्वलन, धार्मिक आयोजन और अन्य जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाने की घोषणा की गई है। इसके अंतर्गत विभिन्न सेवा गतिविधियों और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए। इसी क्रम में वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर तक बाइक यात्रा का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी रेखांकित करना था। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर देश के विभिन्न हिस्सों में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। दिल्ली के कर्तव्य पथ सहित कई स्थानों पर बड़ी संख्या में दीप जलाए गए। उज्जैन में भी विशेष दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम हुआ। वाराणसी में भी जन्मदिन के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी से लोकसभा सांसद हैं। यहां विशेष प्रार्थना कार्यक्रम और वडनगर के लिए बाइक यात्रा सहित विभिन्न आयोजन हुए। दिनभर देशभर से प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने लोगों का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर से मिले स्नेह, शुभकामनाओं और आशीर्वाद से उन्हें लोगों की सेवा करने की नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने सेवा कार्यों में लगे लोगों की भी सराहना की और विकसित भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करते रहने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में जनभागीदारी, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक गतिविधियां प्रमुख रूप से दिखाई दीं। जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों के साथ एक महीने तक चलने वाले सेवा अभियान की शुरुआत भी हुई है।

  • UPI पर ₹2,000 से ज्यादा भुगतान पर ₹5 चार्ज? जानिए वायरल खबर की पूरी सच्चाई

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026 देश में डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यमों में शामिल UPI को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करने पर ग्राहक से ₹5 चार्ज लिया जाएगा। इस दावे ने आम UPI उपयोगकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। हालांकि, वास्तविक नियम को समझने पर पता चलता है कि हर ₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर ग्राहक से ₹5 लेने की बात सही नहीं है। नए नियम में Merchant Discount Rate यानी MDR की व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जिसे ग्राहक से सीधे वसूले जाने वाले UPI शुल्क के रूप में समझना गलत होगा। क्या 15 अक्टूबर से UPI पर ₹5 का शुल्क लगेगा? नए MDR ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से कुछ निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर शुल्क व्यवस्था लागू होगी। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति ₹2,000 से अधिक UPI भुगतान करते ही ग्राहक के रूप में ₹5 अतिरिक्त देगा। ₹5 का फ्लैट MDR कुछ विशेष श्रेणियों के व्यापारी लेनदेन के लिए निर्धारित किया गया है। इनमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल और ईंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह शुल्क ग्राहक के UPI भुगतान में अलग से जोड़कर वसूलने का सामान्य प्रावधान नहीं है। सामान्य व्यापारी भुगतान में क्या होगा? ₹2,000 से अधिक के सामान्य पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है। उदाहरण के लिए यदि कोई पात्र व्यापारी भुगतान ₹10,000 का है तो MDR की गणना 0.4 प्रतिशत के हिसाब से की जाएगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को अपने ₹10,000 के भुगतान के ऊपर ₹40 अतिरिक्त देकर भुगतान करना होगा। MDR मुख्य रूप से व्यापारी और भुगतान व्यवस्था से संबंधित शुल्क है। ₹5 MDR किन क्षेत्रों में लागू होगा? नए ढांचे में कुछ आवश्यक सेवाओं और क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। इनमें प्रमुख रूप से— रेलवे भुगतान टेलीकॉम सेवाएं बीमा भुगतान पेट्रोल एवं ईंधन भुगतान कुछ अन्य निर्धारित व्यापारी श्रेणियां शामिल हैं। इन श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI व्यापारी भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। लेकिन यहां भी सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि यह ग्राहक से लिया जाने वाला सामान्य ₹5 UPI शुल्क नहीं है। व्यक्ति को UPI से पैसा भेजने पर क्या होगा? यदि कोई व्यक्ति अपने दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में UPI के माध्यम से पैसा भेजता है, तो यह Person-to-Person यानी P2P भुगतान कहलाता है। इस तरह के भुगतान पर नया MDR लागू नहीं होगा। यानी ₹2,000 से अधिक राशि किसी व्यक्ति को UPI से भेजने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को ₹5 अतिरिक्त देना पड़ेगा। ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर क्या बदलेगा? ₹2,000 तक के पात्र व्यापारी UPI भुगतान zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे। इसका अर्थ है कि रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए इस नए MDR ढांचे के कारण कोई नया ₹5 शुल्क निर्धारित नहीं किया गया है। छोटे व्यापारियों के लिए भी zero-MDR व्यवस्था जारी रखने का प्रावधान है। वायरल खबर में कहां हुआ भ्रम? सोशल मीडिया पर वायरल संदेश को यदि केवल एक लाइन में पढ़ा जाए तो ऐसा लगता है कि— “₹2,000 से ऊपर UPI किया तो ₹5 देना पड़ेगा।” यही बात भ्रम पैदा कर रही है। वास्तविक व्यवस्था इससे अलग है। ₹2,000 की सीमा सभी UPI भुगतानों पर ग्राहक शुल्क लगाने की सीमा नहीं है। यह कुछ व्यापारी लेनदेन में MDR व्यवस्था से जुड़ी सीमा है। इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने या सामान्य छोटे UPI भुगतान करने पर इसे ₹5 शुल्क के रूप में देखना सही नहीं होगा। आम ग्राहक के लिए चार जरूरी बातें 1. ₹2,000 से अधिक UPI भुगतान करने पर अपने आप ₹5 ग्राहक शुल्क नहीं लगेगा। 2. ₹5 MDR कुछ निर्धारित व्यापारी क्षेत्रों में लागू होगा। 3. सामान्य पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR की व्यवस्था है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन है। 4. व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान पर यह MDR लागू नहीं होगा। क्या UPI महंगा होने जा रहा है? UPI को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यही है कि नए MDR ढांचे के बाद हर डिजिटल भुगतान महंगा हो जाएगा। ऐसा कहना सही नहीं होगा। नए प्रावधान मुख्य रूप से निर्धारित व्यापारी लेनदेन से संबंधित हैं। सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान और ₹2,000 तक के पात्र व्यापारी भुगतान पर इस व्यवस्था के कारण नया ग्राहक शुल्क नहीं लगाया गया है। इसलिए UPI उपयोगकर्ताओं को वायरल संदेश देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। भुगतान करने से पहले यह समझना जरूरी है कि भुगतान व्यक्ति को किया जा रहा है या व्यापारी को, और वह किस श्रेणी में आता है। संपादकीय दृष्टिकोण डिजिटल भुगतान से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था को केवल सोशल मीडिया की एक तस्वीर या छोटी सी पोस्ट के आधार पर समझना मुश्किल हो सकता है। UPI के मामले में भी MDR और ग्राहक से वसूले जाने वाले शुल्क के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है। ₹5 MDR की व्यवस्था को “हर ₹2,000 से ऊपर UPI करने पर ग्राहक से ₹5 लिया जाएगा” के रूप में प्रस्तुत करना पूरी व्यवस्था को गलत तरीके से सरल बना देता है। वास्तविकता यह है कि नए MDR नियम चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू होने वाले हैं। ग्राहक के लिए हर UPI भुगतान पर ₹5 का कोई सामान्य शुल्क निर्धारित नहीं किया गया है। इसलिए वायरल दावे को पूरी तरह सच मानना उचित नहीं है। UPI पर ₹2,000 से अधिक भुगतान का मतलब अपने आप ₹5 ग्राहक शुल्क नहीं है। फैक्ट चेक वायरल दावा: ₹2,000 से ऊपर हर UPI भुगतान पर ग्राहक से ₹5 लिया जाएगा। फैक्ट: भ्रामक। सही जानकारी: कुछ निर्धारित व्यापारी क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI भुगतान पर ₹5 MDR की व्यवस्था है। सामान्य पात्र P2M भुगतान के लिए अलग MDR व्यवस्था है, जबकि व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान पर यह MDR लागू नहीं है।

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