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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • कॉकपिट में हमले के बाद भी डटे रहे कैप्टन स्मित मच्छार, फ्लाईदुबई विमान की सुरक्षित लैंडिंग

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह दुबई, 1 अक्टूबर 2026। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में 30 सितंबर को कॉकपिट के भीतर हुई गंभीर घटना के बाद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार चर्चा में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर कथित तौर पर हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में भूमिका निभाई, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान को बाद में सऊदी अरब के ताबूक में सुरक्षित उतारा गया। घायल होने के बावजूद कॉकपिट खोलने में निभाई अहम भूमिका रिपोर्टों के मुताबिक, घटना के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक भारी गिरावट आई। इसी दौरान कॉकपिट के अंदर कैप्टन मच्छार घायल हुए। यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मदद से स्थिति पर नियंत्रण पाने की कोशिश की गई। कैप्टन मच्छार द्वारा कॉकपिट का दरवाजा खोलने के बाद यात्रियों को अंदर पहुंचने और हमलावर को काबू करने का मौका मिला। इसके बाद विमान में मौजूद अन्य प्रशिक्षित पायलटों ने विमान को नियंत्रित करने में सहायता की और उड़ान को सऊदी अरब के ताबूक की ओर मोड़ा गया। विमान की सुरक्षित आपात लैंडिंग के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया। 174 यात्रियों की सुरक्षा में अहम भूमिका रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विमान में 174 यात्री सवार थे। घटना के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार के साहस की सार्वजनिक रूप से सराहना की। नेतन्याहू ने उन्हें असाधारण बहादुरी दिखाने वाला पायलट बताया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनके साहस और दूसरों की जान बचाने के प्रयास की प्रशंसा की। घटना के बाद कैप्टन मच्छार का उपचार कराया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी हालत स्थिर बताई गई है और भारतीय अधिकारी सऊदी अधिकारियों के साथ उनके उपचार एवं आवश्यक सहायता के लिए समन्वय कर रहे हैं। विमानन क्षेत्र का अनुभव भी आया काम कैप्टन स्मित मच्छार भारतीय विमानन क्षेत्र से जुड़े अनुभवी पायलट हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने फ्लाईदुबई से पहले स्पाइसजेट में भी काम किया था और उनके पास बोइंग 737 विमानों को उड़ाने का व्यापक अनुभव है। घटना के दौरान विमान में मौजूद अन्य यात्रियों और ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यात्रियों ने कथित हमलावर को काबू करने में मदद की, जबकि विमान को सुरक्षित उतारने की प्रक्रिया में उपलब्ध प्रशिक्षित पायलटों ने नियंत्रण संभाला। घटना के कारणों की जांच जारी फ्लाईदुबई की ओर से घटना के बाद जांच में सहयोग किए जाने की जानकारी सामने आई है। एयरलाइन ने इजरायल से जुड़ी अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित किया है, ताकि संबंधित अधिकारी घटना की परिस्थितियों और उसके कारणों की जांच कर सकें। घटना के पीछे सह-पायलट के कथित हमले के कारण और उद्देश्य को लेकर जांच जारी है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी संभावित मकसद के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संकट की घड़ी में सामूहिक प्रयास FZ1073 की घटना ने विमानन सुरक्षा और आपात परिस्थितियों में चालक दल तथा यात्रियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज कर दी है। कैप्टन मच्छार के घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में उनकी भूमिका, यात्रियों द्वारा हमलावर को काबू करना और अन्य पायलटों द्वारा विमान को सुरक्षित उतारना—पूरी घटना में कई स्तरों पर किए गए प्रयासों को सामने लाता है। हालांकि घटना की विस्तृत जांच अभी जारी है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि संकट की उस घड़ी में कैप्टन मच्छार सहित विमान में मौजूद कई लोगों के त्वरित प्रयासों ने विमान को सुरक्षित रूप से ताबूक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • श्रीलंका को 124 रन से रौंदकर फाइनल में भारत, अब पाकिस्तान से गोल्ड मेडल की टक्कर

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com निशिन, जापान, 1 अक्टूबर 2026। एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 124 रन से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 169 रन बनाए। जवाब में भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की पारी को महज 45 रन पर 9.5 ओवर में समेट दिया। इस जीत के साथ भारत ने स्वर्ण पदक के मुकाबले में जगह पक्की कर ली है। ईशान किशन की नाबाद 80 रन की पारी भारत की पारी में ईशान किशन ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 46 गेंदों पर नाबाद 80 रन बनाए, जिसमें चार चौके और पांच छक्के शामिल रहे। शुरुआती झटकों के बाद किशन ने एक छोर संभालते हुए पारी को मजबूती दी और भारत को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाया। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने भी आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 21 गेंदों पर 38 रन बनाए। उनकी पारी में छह चौके और दो छक्के शामिल रहे। किशन और सूर्यवंशी की पारियों ने भारतीय पारी को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गेंदबाजों ने श्रीलंका को 45 रन पर समेटा 170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल ने शुरुआती ओवरों में दो-दो विकेट लेकर दबाव बनाया, जबकि अभिषेक शर्मा ने भी दो विकेट हासिल किए। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट लेकर श्रीलंका की रन गति पर अंकुश बनाए रखा। श्रीलंका की पूरी टीम 9.5 ओवर में 45 रन पर ऑलआउट हो गई। यह स्कोर टेस्ट खेलने वाली टीम के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे कम स्कोरों में शामिल है। फाइनल में पाकिस्तान से मुकाबला भारत की जीत के साथ एशियन गेम्स पुरुष क्रिकेट का स्वर्ण पदक मुकाबला तय हो गया है। फाइनल में भारत का सामना पाकिस्तान से होगा। पाकिस्तान ने पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। स्वर्ण पदक के लिए दोनों टीमों के बीच मुकाबला 3 अक्टूबर 2026 को होगा। भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एशियन गेम्स में पिछली बार स्वर्ण पदक जीतने वाला गत चैंपियन है। अब टीम के सामने अपने खिताब को बरकरार रखने का अवसर होगा। बल्लेबाजी और गेंदबाजी का संतुलित प्रदर्शन श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने दोनों विभागों में प्रभावी प्रदर्शन किया। एक ओर ईशान किशन की नाबाद अर्धशतकीय पारी और वैभव सूर्यवंशी की तेज बल्लेबाजी ने 169 रन का स्कोर खड़ा किया, वहीं दूसरी ओर गेंदबाजों ने श्रीलंकाई बल्लेबाजी को शुरुआत से ही दबाव में रखा। अब भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें 3 अक्टूबर के फाइनल पर रहेंगी, जहां एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे।

  • चातुर्मास पूर्ण कर चेण्डा धाम पहुंचीं साध्वी भगवती बाई जी, समाजबंधुओं ने किया भव्य स्वागत

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com चेण्डा धाम /पाली, 1 अक्टूबर 2026। पीठाधीश्वर परम तपस्विनी साध्वी श्री भगवती बाई जी (माताजी) ने चातुर्मास पूर्ण करने के बाद आज श्री राजेश्वर भगवान के पुराने मंदिर, चेण्डा धाम में आगमन किया। उनके पहुंचने पर समाजबंधुओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। साध्वी श्री भगवती बाई जी के चेण्डा धाम पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में समाजबंधु मंदिर परिसर में एकत्र हुए। श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर धार्मिक वातावरण बना रहा और समाजबंधुओं में उत्साह दिखाई दिया। चातुर्मास के दौरान साध्वी श्री भगवती बाई जी ने धर्म, आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन से जुड़े विषयों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान किया। चातुर्मास पूर्ण होने के पश्चात उनके श्री राजेश्वर भगवान पुराने मंदिर पहुंचने को लेकर समाज में विशेष उत्साह रहा। समाजबंधुओं ने साध्वीश्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ, मंगलमय एवं आध्यात्मिक जीवन की कामना की। स्वागत एवं अभिनंदन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप साध्वीश्री का सम्मान किया।

  • येलहंका न्यू टाउन में स्वच्छता अभियान, सफाई के लिए जनजागरूकता का संदेश

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह बेंगलुरु, 1 अक्टूबर 2026। येलहंका न्यू टाउन स्थित आरडब्ल्यूएफ व्हील कारखाना क्षेत्र में कारखाने के सभी कार्यकर्ताओं की ओर से स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में विश्व हिंदू धर्म रक्षक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित जितेंद्र कुमार ‘जीतू’ दुबे तथा महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष लता दुबे सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान उपस्थित लोगों ने गलियों, नालियों और कॉलोनी के आसपास नियमित सफाई रखने तथा कचरे का उचित निस्तारण करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान भारतार्थ खबर के संवाददाता अशोक कुमार सिंह ने पंडित जितेंद्र कुमार ‘जीतू’ दुबे से स्वच्छता अभियान और क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल किए। अध्यक्ष दुबे ने स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से अपने घरों के साथ-साथ गलियों और नालियों की सफाई व्यवस्था पर भी ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ कॉलोनी और स्वच्छ वातावरण के लिए केवल प्रशासन या सफाई कर्मचारियों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय नागरिकों और संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैलाने और आसपास के क्षेत्र को साफ रखने का आग्रह किया गया। महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष लता दुबे ने भी स्वच्छता के प्रति महिलाओं और परिवारों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए घर से ही स्वच्छता की आदत विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने और अपने आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वच्छता को लेकर सामूहिक भागीदारी का संदेश दिया गया।

  • जिला स्तरीय वॉलीबॉल स्पर्धा में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, महेंद्र मुणोत ने बढ़ाया उत्साह

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 1 अक्टूबर 2026। चामराजपेट स्थित सेंट जोसेफ शिक्षण संस्थान के खेल मैदान में कर्नाटक शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी एवं सरकारी अनुदानित विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए जिला स्तरीय वॉलीबॉल क्रीड़ा स्पर्धा आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे युवा खिलाड़ियों ने उत्साह और खेल भावना के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और टीम भावना का प्रदर्शन करते हुए मुकाबलों में शानदार खेल दिखाया। मैदान पर खिलाड़ियों के उत्साह और प्रतिस्पर्धात्मक जज्बे ने आयोजन को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महेंद्र मुणोत ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग ले रहे छात्र-छात्राओं से खेल को केवल जीत-हार तक सीमित न रखते हुए अनुशासन, मेहनत और टीम भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर आयोजित खेल प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करती हैं। खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में सहयोग, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जैसे गुण भी विकसित होते हैं। सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिला मंच जिला स्तरीय प्रतियोगिता के आयोजन से सरकारी और सरकारी अनुदानित विद्यालयों के विद्यार्थियों को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। ऐसे आयोजनों के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें आगे की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में मदद मिलती है। सेंट जोसेफ शिक्षण संस्थान के खेल मैदान में आयोजित इस स्पर्धा में खिलाड़ियों, शिक्षकों और आयोजकों के बीच उत्साह का माहौल रहा। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने खेल भावना के साथ मुकाबलों में भाग लिया और बेहतर प्रदर्शन के लिए अपना पूरा प्रयास किया। शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस तरह की जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर से आगे बढ़कर उच्च स्तरीय खेल मंचों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करती हैं।

  • दो महीने में 20,980 टन कचरा साफ, बेंगलुरु दक्षिण में 885 ट्रिप के जरिए चला बड़ा अभियान

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 1 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु दक्षिण नगर निगम क्षेत्र में शहर को स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष सफाई अभियान के तहत पिछले दो महीनों में 20,980.84 मीट्रिक टन कचरे का निपटारा किया गया। यह जानकारी निगम आयुक्त के.एन. रमेश ने दी। ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के निर्देशों के अनुसार चल रहे ‘वेस्ट-फ्री फ्रीडम कैंपेन’ के तहत निगम क्षेत्र में कचरे के ढेर और चिन्हित ब्लैक स्पॉट को हटाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया। 885 ट्रिप में हटाया गया कचरा निगम के अनुसार, 1 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चले विशेष सफाई अभियान के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से कचरा हटाने के लिए टिपर वाहनों ने कुल 885 ट्रिप किए। इन वाहनों के माध्यम से विट्टासंद्रा तथा अनेकल के समीप कल्लूबालू क्षेत्र में एकत्रित कचरे को हटाकर निर्धारित व्यवस्था के तहत निपटाया गया। निगम के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में कुल 20,980.84 मीट्रिक टन कचरा साफ किया गया। 1,601 शिकायतों और अनुरोधों पर कार्रवाई अभियान के दौरान नागरिकों और निगम अधिकारियों की ओर से कचरा हटाने से संबंधित कुल 1,601 अनुरोध पोर्टल पर दर्ज किए गए। इनमें से 928 अनुरोध सहायक अभियंताओं (AE) और 339 अनुरोध मार्शलों द्वारा दर्ज किए गए। निगम का कहना है कि प्राप्त शिकायतों और अनुरोधों के आधार पर संबंधित कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर कचरा हटाने और उसके निपटारे की कार्रवाई की। इससे विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से जमा कचरे को हटाने में मदद मिली। नागरिकों से सहयोग की अपील आयुक्त के.एन. रमेश ने नागरिकों से शहर को स्वच्छ बनाए रखने में सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि अभियान के परिणामस्वरूप मुख्य सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर में कमी आई है, लेकिन स्थायी स्वच्छता के लिए नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें तथा गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके निगम की कचरा संग्रहण व्यवस्था को ही सौंपें। निगम प्रशासन के अनुसार, नियमित सफाई व्यवस्था के साथ नागरिकों की जिम्मेदार भागीदारी से बेंगलुरु दक्षिण क्षेत्र को स्वच्छ और बेहतर मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।

  • बेंगलुरु नॉर्थ में जलभराव पर स्थायी समाधान, मान्यता टेक पार्क से HBR लेआउट तक ड्रेनेज सुधार

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता टी मदनलाल, बेंगलुरु, 1 अक्टूबर 2026। बारिश के दौरान जलभराव की वर्षों पुरानी समस्याओं से निपटने के लिए बेंगलुरु नॉर्थ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने विभिन्न इलाकों में ड्रेनेज और वर्षाजल निकासी से जुड़े कार्य किए हैं। निगम के कमिश्नर पोम्माला सुनील कुमार के मार्गदर्शन में मान्यता टेक पार्क, अत्तूर-पुत्तेनहल्ली, HBR लेआउट, सर्वज्ञनगर, टाटा नगर, डायनेस्टी और डिफेंस लेआउट सहित कई क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपाय किए गए हैं। मान्यता टेक पार्क के पास वर्षों पुरानी समस्या का समाधान मान्यता टेक पार्क, वीरन्नापाल्या और आसपास के क्षेत्रों में हेब्बल आउटर रिंग रोड (ORR) तथा वीरन्नापाल्या सर्विस रोड के करीब एक किलोमीटर हिस्से में लंबे समय से बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या सामने आती रही थी। इससे वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को परेशानी होती थी। निगम के अनुसार, वीरन्नापाल्या सर्विस रोड से अतिक्रमण हटाकर नहर क्षेत्र को मुख्य हेब्बल नहर से जोड़ने के लिए 1.6 किलोमीटर लंबी कृत्रिम नहर तैयार की गई। इससे वर्षाजल को मुख्य नहर की ओर प्रवाहित करने की व्यवस्था हुई है। निगम के मुताबिक, 30 सितंबर को करीब 75-80 मिलीमीटर बारिश के बावजूद करियान्नापाल्या और वीरन्नापाल्या के आउटर रिंग रोड क्षेत्र में जलभराव नहीं हुआ। वर्षाजल के आउटर रिंग रोड से मुख्य हेब्बल नहर की ओर प्रवाहित होने की बात भी निगम ने दर्ज की है। अत्तूर-पुत्तेनहल्ली में वर्षाजल निकासी की नई व्यवस्था पुत्तेनहल्ली-अत्तूर क्षेत्र के रमनश्री कैलिफोर्निया लेआउट में वर्षाजल और सीवेज के प्रवाह से जुड़ी समस्या को दूर करने के लिए भी काम किया गया है। निगम के अनुसार, निजी संपत्ति मालिकों की सहमति से 145 मीटर लंबी और 600 मिलीमीटर व्यास वाली NP3 RCC पाइपलाइन बिछाकर उसे डायवर्जन ड्रेन से जोड़ा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सीवेज को झील में जाने से रोकना और वर्षाजल के प्रवाह को अलग दिशा देना है। इसके अतिरिक्त नेशनल डिजास्टर मिटिगेशन फंड के तहत 60 मीटर लंबा वर्षाजल नाला बनाया गया है, जिससे अनंतपुर और अत्तूर कैचमेंट क्षेत्र से वर्षाजल को पुत्तेनहल्ली झील की ओर ले जाने की व्यवस्था की गई है। निगम के अनुसार, 30 सितंबर की बारिश के दौरान इस क्षेत्र में जलभराव या बाढ़ की कोई सूचना नहीं मिली। HBR लेआउट में नया स्टॉर्मवॉटर ड्रेन कनेक्शन HBR लेआउट के 5वें ब्लॉक की 18वीं मेन रोड पर BESCOM कार्यालय के पास से गुजर रही HN वैली से जुड़ी 1.5 मीटर व्यास की MS पाइपलाइन के कारण पिछले कई वर्षों से वर्षाजल के सुचारु प्रवाह में बाधा की समस्या बताई गई थी। निगम ने सड़क की ढलान के अनुरूप नया RCC पुलिया और नाला तैयार कर उसे नजदीकी मुख्य स्टॉर्मवॉटर ड्रेन से जोड़ा है। निगम के अनुसार, इससे सड़क पर वर्षाजल जमा होने की समस्या को दूर करने में मदद मिली है। वहीं सर्वज्ञनगर क्षेत्र में स्टॉर्मवॉटर ड्रेन की नियमित सफाई भी की जा रही है। सफाई के दौरान निकली गाद और अन्य सामग्री को हटाकर जल निकासी का मार्ग साफ रखने के उपाय किए जा रहे हैं। टाटा नगर और डायनेस्टी लेआउट में बाढ़ नियंत्रण टाटा नगर, डायनेस्टी लेआउट और डिफेंस लेआउट में वर्ष 2024 की भारी बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी थी। निगम के अनुसार, उस दौरान लोगों को लगातार कई दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ा था। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचाव के लिए नेशनल डिजास्टर मिटिगेशन फंड और विश्व बैंक की सहायता से स्टॉर्मवॉटर ड्रेन के किनारे RCC बैरियर दीवारें बनाई गई हैं। डायनेस्टी लेआउट के निचले भू-भाग को ध्यान में रखते हुए सड़क से पानी की निकासी और बाढ़ नियंत्रण के लिए जमीन पर दो जल भंडारण टैंक भी बनाए गए हैं। कई इलाकों में जारी हैं वर्षाजल प्रबंधन के कार्य बेंगलुरु नॉर्थ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के विभिन्न क्षेत्रों में जल निकासी को मजबूत करने के लिए कई प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। इनमें आवश्यकता के अनुसार झीलों को जोड़ना, स्टॉर्मवॉटर ड्रेन का निर्माण और झीलों का पुनरुद्धार, खुले नालों के किनारे RCC बैरियर, U-शेप ड्रेन तथा आवश्यकता के अनुसार पुराने या संकरे पुलों के स्थान पर RCC पुलों का निर्माण शामिल है। निगम के अनुसार, निचले इलाकों में जलभराव रोकने और वर्षाजल के सुचारु प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए ये कार्य विश्व बैंक की सहायता, नेशनल डिजास्टर मिटिगेशन फंड तथा तकनीकी समीक्षा के आधार पर नगर निगम के संसाधनों से किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य बारिश के दौरान पानी के प्राकृतिक और निर्मित प्रवाह को बेहतर बनाना तथा लंबे समय से जलभराव की समस्या झेल रहे इलाकों में स्थायी एवं व्यावहारिक जल निकासी व्यवस्था तैयार करना है।

  • सर्वज्ञता पर जैन दर्शन का गहन विवेचन, आत्मा के परम स्वरूप को समझाया

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 1 अक्टूबर 2026। “क्या सारी दुनिया को जानने वाला कोई भगवान हो सकता है?” इस गहन आध्यात्मिक प्रश्न पर निर्यापक श्रमण श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने जैन दर्शन के संदर्भ में सर्वज्ञता, केवलज्ञान, कर्म सिद्धांत और आत्मा के परम स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। बेंगलुरु में चल रहे चातुर्मास प्रवास के दौरान आयोजित प्रवचन में उन्होंने श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं को सर्वज्ञता की अवधारणा को तार्किक एवं सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। मुनि श्री ने कहा कि जैन दर्शन में भगवान किसी बाहरी शक्ति द्वारा निर्मित या संसार को अपनी इच्छा से संचालित करने वाली सत्ता नहीं हैं। परमात्मा आत्मा की वह सर्वोच्च अवस्था है, जिसमें कर्मबंधनों का पूर्ण क्षय होने के बाद उसके स्वाभाविक अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन और अन्य गुण पूर्ण रूप से प्रकट हो जाते हैं। कर्मावरण हटने पर प्रकट होता है अनंत ज्ञान मुनि श्री ने बताया कि जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक जीवात्मा में अनंत ज्ञान और अनंत दर्शन की क्षमता विद्यमान है। कर्मों के आवरण के कारण यह शक्ति वर्तमान अवस्था में पूरी तरह प्रकट नहीं हो पाती। विशेष रूप से ज्ञानावरणीय कर्म ज्ञान की अभिव्यक्ति को तथा दर्शनावरणीय कर्म दर्शन की शक्ति को बाधित करते हैं। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए साधक संयम, तप और वैराग्य के माध्यम से कर्मों का क्षय करता है। कर्मावरणों के पूर्ण क्षय की अवस्था में आत्मा में केवलज्ञान प्रकट होता है। जैन दर्शन में केवलज्ञानी आत्मा को समस्त द्रव्यों और उनकी अनंत पर्यायों का पूर्ण ज्ञान होने की अवधारणा बताई गई है। यह ज्ञान सामान्य इंद्रियों या मन के माध्यम से प्राप्त होने वाला सीमित ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मा की पूर्ण विकसित ज्ञानशक्ति का प्राकट्य माना गया है। जैन दर्शन में भगवान सृष्टिकर्ता नहीं प्रवचन में भगवान और सृष्टि के संबंध को लेकर जैन दर्शन की विशिष्ट अवधारणा भी स्पष्ट की गई। मुनि श्री के अनुसार जैन दर्शन संसार को किसी एक सृष्टिकर्ता द्वारा निर्मित नहीं मानता। लोक और उसमें विद्यमान द्रव्यों को अनादि माना गया है तथा जीव अपने कर्मों के अनुसार विभिन्न अवस्थाओं का अनुभव करता है। इस दृष्टिकोण में भगवान किसी जीव को मनमाने ढंग से सुख या दुःख प्रदान करने वाले निर्णायक नहीं हैं। भगवान वीतराग और कर्मबंधन से मुक्त होते हैं। उन्होंने अरिहंत और सिद्ध अवस्था का उल्लेख करते हुए बताया कि अरिहंत अवस्था में आत्मा केवलज्ञान प्राप्त कर संसार में रहते हुए वीतरागता को प्राप्त करती है, जबकि सिद्ध अवस्था में समस्त कर्मों से पूर्णतः मुक्त आत्मा सिद्ध पद को प्राप्त करती है। सर्वज्ञ जानते हैं, लेकिन हस्तक्षेप नहीं करते प्रवचन में यह प्रश्न भी उठाया गया कि यदि भगवान सर्वज्ञ हैं और प्रत्येक जीव की स्थिति तथा उसके कर्मों को जानते हैं, तो वे संसार के दुःखों को समाप्त क्यों नहीं कर देते? मुनि श्री ने समझाया कि सर्वज्ञता और हस्तक्षेप अलग-अलग अवधारणाएं हैं। वीतराग भगवान राग-द्वेष से रहित होते हैं। जीव ने जिन कर्मों का बंध किया है, उनके परिणामों का अनुभव भी उसे अपने कर्मानुसार करना पड़ता है। किसी के कर्मफल को व्यक्तिगत इच्छा या पक्षपात के आधार पर बदलना जैन दर्शन की वीतरागता की अवधारणा से मेल नहीं खाता। इस प्रकार जैन दर्शन व्यक्ति को बाहरी सत्ता पर निर्भर रहने के बजाय अपने कर्म, आचरण और आत्मशुद्धि के प्रति स्वयं जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देता है। निर्मल दर्पण से समझाई सर्वज्ञता सर्वज्ञता की अवधारणा को सरल बनाने के लिए मुनि श्री ने निर्मल दर्पण का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि दर्पण उसके सामने उपस्थित वस्तुओं को प्रतिबिंबित करता है, लेकिन किसी वस्तु के प्रति आकर्षण या घृणा का भाव नहीं रखता। इसी प्रकार केवलज्ञानी आत्मा के संबंध में जैन दर्शन की मान्यता है कि वह समस्त अस्तित्व को जानती है, लेकिन किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना के प्रति राग-द्वेष उत्पन्न नहीं करती। पूर्ण ज्ञान के साथ आसक्ति का अभाव सर्वज्ञता और वीतरागता के समन्वय को स्पष्ट करता है। हर आत्मा में परम ज्ञान की संभावना प्रवचन में मुनि श्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सर्वज्ञता को किसी एक व्यक्ति या सीमित वर्ग तक सीमित समझना जैन दर्शन की मूल अवधारणा नहीं है। प्रत्येक जीवात्मा में अनंत ज्ञान और शक्ति की संभावना विद्यमान है। उन्होंने कहा कि साधना का उद्देश्य किसी बाहरी शक्ति को प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मा पर पड़े कर्मावरणों को दूर कर उसके शुद्ध स्वरूप को प्रकट करना है। राग, द्वेष, अहंकार, लोभ और मोह में कमी के साथ आत्मा का वास्तविक स्वरूप अधिक स्पष्ट होता जाता है। भक्ति का अर्थ आत्मगुणों का विकास मुनि श्री ने आध्यात्मिक विचारों को आधुनिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि आत्मिक उन्नति केवल शास्त्रों के अध्ययन तक सीमित नहीं है। सत्य, संयम, क्षमा, करुणा और आत्मनिरीक्षण को व्यवहार में उतारना भी आत्मशुद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति का अर्थ केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करना नहीं, बल्कि भगवान के गुणों को देखकर अपने जीवन में उन गुणों को विकसित करने की प्रेरणा लेना है। वीतरागता को समझने वाला व्यक्ति अपने भीतर राग-द्वेष कम करने और शांति विकसित करने का प्रयास कर सकता है। मुनि श्री ने आधुनिक जीवन में बढ़ते तनाव, प्रतिस्पर्धा और भौतिक अपेक्षाओं के बीच आत्मनिरीक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उनके अनुसार बाहरी परिस्थितियों को बदलने के साथ-साथ व्यक्ति जब अपने भीतर के विकारों को पहचानने और नियंत्रित करने का प्रयास करता है, तभी वास्तविक आत्मपरिवर्तन की दिशा बनती है। जिज्ञासाओं का किया समाधान प्रवचन के बाद संवादात्मक सत्र में श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं ने आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक विषयों से जुड़े प्रश्न रखे। मुनि श्री ने दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से इन जिज्ञासाओं का समाधान किया और आत्मचिंतन, संयम तथा आत्मशुद्धि की दिशा में मार्गदर्शन दिया। प्रवचन का केंद्रीय संदेश यह रहा कि जैन दर्शन में परमात्मा को किसी बाहरी शक्ति के रूप में देखने के बजाय आत्मा की पूर्ण और कर्ममुक्त अवस्था के रूप में समझा जाता है। सर्वज्ञता केवल ज्ञान की पराकाष्ठा नहीं, बल्कि वीतरागता और आत्मशुद्धि से जुड़ी परम अवस्था के रूप में प्रस्तुत की गई।

  • LPU हिंसा: छात्रों के सवाल पर राजनीति की आवाज क्यों बदल जाती है?

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में 27 सितंबर को छात्र विरोध के हिंसक रूप लेने की घटना ने विश्वविद्यालयों में छात्र सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता, सोशल मीडिया पर फैलती अपुष्ट सूचनाओं और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, एक छात्रा के साथ कथित यौन अपराध से संबंधित सोशल मीडिया संदेश के बाद विरोध शुरू हुआ। बाद में परिसर में तोड़फोड़,आगजनी और जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के अवरुद्ध होने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। कथित यौन अपराध की पुष्टि जांच से होनी बाकी है। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है—आरोप गंभीर है, लेकिन आरोप और प्रमाण एक ही बात नहीं हैं। पत्रकारिता और प्रशासन, दोनों की जिम्मेदारी है कि वे जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत न करें। छात्र असंतोष को केवल कानून-व्यवस्था के चश्मे से नहीं देखा जा सकता किसी विश्वविद्यालय में छात्र सुरक्षा, हॉस्टल व्यवस्था या प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। लेकिन शांतिपूर्ण विरोध और हिंसा के बीच स्पष्ट अंतर है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार LPU में विरोध के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचा, आगजनी हुई और राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हुआ। ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही, हिंसा में शामिल लोगों की पहचान को पूरे छात्र समुदाय पर लागू करना भी उचित नहीं होगा। जिसने हिंसा की, उसकी जवाबदेही तय हो; जिसने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी शिकायत रखी, उसे अलग दृष्टि से देखा जाए। लोकतांत्रिक प्रशासन का वास्तविक कौशल इसी संतुलन में दिखाई देता है। सोशल मीडिया की अफवाह और प्रशासन की चुप्पी LPU प्रकरण में सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेश ने घटनाक्रम को तेजी से प्रभावित किया। पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि कथित घटना की पुष्टि जांच के स्तर पर नहीं हुई थी। इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताया, जबकि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। यह स्थिति एक बड़ी प्रशासनिक सीख देती है—सूचना के खाली स्थान को अफवाह बहुत तेजी से भर देती है। आज विश्वविद्यालयों में हजारों विद्यार्थी सोशल मीडिया से सूचना प्राप्त करते हैं। यदि किसी गंभीर घटना पर प्रशासन तत्काल स्पष्ट, तथ्यात्मक और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं कराता, तो अपुष्ट संदेश छात्रों के बीच भय और असंतोष बढ़ा सकते हैं। इसलिए प्रत्येक बड़े शिक्षण संस्थान में संकट-प्रबंधन की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें पुलिस, प्रशासन, विश्वविद्यालय और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तत्काल संवाद संभव हो। छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो कथित घटना की सत्यता जांच का विषय है, लेकिन छात्राओं की सुरक्षा का प्रश्न उससे कहीं व्यापक है। विश्वविद्यालयों और छात्रावासों में प्रवेश नियंत्रण, CCTV, शिकायत निवारण प्रणाली, आपातकालीन संपर्क, महिला सुरक्षा कर्मी और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी होनी चाहिए। किसी छात्र की शिकायत को संस्थान की प्रतिष्ठा के विरुद्ध आरोप मानने के बजाय पहले सुरक्षा और तथ्य के दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है। यदि शिकायत सही है तो पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए। यदि आरोप गलत पाया जाता है तो उसकी वास्तविकता भी प्रमाण के साथ सामने आनी चाहिए। दोनों परिस्थितियों में पारदर्शिता ही विश्वास बहाल कर सकती है। राजनीति का पैमाना समान क्यों नहीं होना चाहिए? LPU प्रकरण ने राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। विभिन्न दल समय-समय पर छात्र आंदोलनों को लोकतांत्रिक अधिकार और युवाओं की आवाज बताते रहे हैं। लेकिन किसी भी छात्र आंदोलन के प्रति राजनीतिक प्रतिक्रिया सरकार या दल की राजनीतिक स्थिति के आधार पर बदलनी नहीं चाहिए। यह सवाल किसी एक दल तक सीमित नहीं है। सत्ता पक्ष, विपक्ष और क्षेत्रीय दल—सभी के लिए एक समान लोकतांत्रिक कसौटी होनी चाहिए। यदि छात्र किसी विरोधी दल की सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करते हैं तो उनकी आवाज को लोकतांत्रिक अधिकार कहा जाए, लेकिन किसी अन्य सरकार के समय वही छात्र केवल कानून-व्यवस्था की समस्या बन जाएं, तो लोकतांत्रिक दृष्टिकोण में असंगति दिखाई देगी। छात्र किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। वे नागरिक हैं और उनकी सुरक्षा, शिक्षा तथा अभिव्यक्ति के अधिकार का मूल्य राजनीतिक सत्ता बदलने के साथ नहीं बदलना चाहिए। राजनीतिक नेताओं से सवाल हों, लेकिन सभी से LPU मामले में विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऐसे में पत्रकारिता का काम किसी नेता के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी जिम्मेदार पक्षों से समान प्रश्न पूछना है। क्या राज्य सरकार जांच को समयबद्ध और पारदर्शी बनाएगी? क्या विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के साथ नियमित संवाद की व्यवस्था करेगा? क्या पुलिस कथित अपराध और हिंसा—दोनों की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी? क्या राजनीतिक दल छात्रों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर समान भाषा अपनाएंगे? क्या हिंसा में शामिल लोगों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाएगा? ये प्रश्न लोकतंत्र में किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन नहीं करते। बल्कि जवाबदेही की मांग करते हैं। जांच ही अंतिम कसौटी हो पंजाब पुलिस ने SIT गठित की है और जांच जारी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SIT में पुलिस अधिकारियों के साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। अब आवश्यकता है कि जांच तथ्यों, डिजिटल साक्ष्यों, CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शी बयानों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़े। कथित अपराध हुआ या नहीं, सोशल मीडिया संदेश की उत्पत्ति क्या थी, हिंसा कैसे फैली और उसमें कौन लोग शामिल थे—इन सभी प्रश्नों का उत्तर प्रमाण से मिलना चाहिए। साथ ही, यदि पुलिस कार्रवाई को लेकर कोई शिकायत सामने आती है, तो उसका भी निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए। संपादकीय दृष्टिकोण LPU की घटना को केवल “छात्र हिंसा” या केवल “प्रशासन की विफलता” के एक वाक्य में समेटना वास्तविक समस्या को छोटा कर देगा। इसके भीतर कई स्तर हैं—छात्र सुरक्षा, प्रशासनिक संवाद, सोशल मीडिया की जिम्मेदारी, पुलिस की भूमिका, विश्वविद्यालय की जवाबदेही और राजनीति की प्रतिक्रिया। सबसे पहले सत्य सामने आना चाहिए। उसके बाद जवाबदेही तय होनी चाहिए। किसी गंभीर यौन अपराध के आरोप को हल्के में लेना अन्याय होगा, लेकिन बिना जांच के आरोप को सत्य मान लेना भी न्यायसंगत नहीं है। इसी प्रकार हिंसा को छात्र आक्रोश कहकर उचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन हिंसा के आधार पर पूरे छात्र समुदाय की आवाज को दबाना भी लोकतांत्रिक समाधान नहीं है। राजनीतिक दलों के लिए भी यह अवसर है कि छात्र अधिकारों को राजनीतिक सुविधा से ऊपर रखें। छात्र जब सवाल पूछें तो उनकी आवाज सत्ता के रंग के अनुसार नहीं बदलनी चाहिए। निष्कर्ष LPU की घटना का सबसे बड़ा सबक यही है कि अफवाह का जवाब पारदर्शी सूचना है, छात्र असंतोष का जवाब संवाद है, अपराध का जवाब निष्पक्ष जांच है और हिंसा का जवाब कानून है। राजनीति का काम इन प्रक्रियाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रश्न उठाना होना चाहिए। लोकतंत्र में सवाल पूछना समस्या नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब सवाल का जवाब तथ्य के बजाय राजनीतिक सुविधा से दिया जाने लगे। LPU के छात्रों के सवालों का उत्तर नारों से नहीं, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई से मिलना चाहिए। यही विश्वविद्यालयों में विश्वास बहाल करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने का रास्ता है।

  • मोदी-ट्रंप के बीच अहम बातचीत, व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। बातचीत के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने आपसी हित से जुड़े अन्य विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत को उपयोगी बताया। दोनों पक्षों ने भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और गहरा करने के लिए निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही। मोदी और ट्रंप ने क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। इस दौरान वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। ऐसे समय में दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी व्यापार समझौते से जुड़े विषयों पर अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत के लिए अमेरिका के दौरे पर हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा और महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को भी भविष्य की साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। फोन वार्ता के अंत में दोनों नेताओं ने लगातार संपर्क में रहने पर सहमति जताई।

  • मेरी दृष्टि में - "काव्य विवेक और निबंध लालित्य"

    साहित्य सदैव समाज को बिखरने से बचाता है। जो समाज में बिखराव उत्पन्न करें वह 'साहित्य' कदापि नहीं हो सकता। साहित्य का शाब्दिक अर्थ है "जिसमें सबका हित हो"।'सबका' से सिर्फ मानव मात्र ही नहीं अपितु जो संपूर्ण ब्रह्मांड के हित की बात करें वही साहित्य है। साहित्य के मूल रूप से तीन उद्देश्य हैं,लोकमंगल,लोकरक्षण व लोकरंजन। इन्हीं उद्देश्यों से अनुप्राणित 'साहित्य' ही 'लोक' के साथ अनंत काल तक यात्रा करता है। "काव्य विवेक और निबंध लालित्य" साहित्यकार डॉ० जितेंद्र पांडेय जी की बीस समीक्षाओं व अट्ठारह निबंधों से संकलित एक विशिष्ट पुस्तक है। पुस्तक का विस्तार कबीर दास से लेकर समकालीन कवियों तक फैला है। डॉ० जितेंद्र पांडेय जी का विचार मंथन चयनित कवियों व उनकी कविताओं तथा उनके काव्य धर्म पर केंद्रित है। जिस प्रकार धरती पर विचरण करने वाला व्यक्ति भूगर्भ में छिपे खनिजों व जल स्रोतों से अनभिज्ञ होता है किंतु जब आधुनिक कैमरे की आँखों से देखता है तो भूगर्भ में छिपी सारी वस्तुए दृश्यमान हो उठती हैं। ठीक उसी प्रकार डॉ० जितेंद्र पांडेय जी ने चयनित कवियों तथा उनके काव्य धर्म व उनकी कविताओं की व्यापकता को गहराई से निरूपित किया है। जिसे पढ़कर पाठक गण कवियों के चिंतन व कविता की व्यापकता के केंद्र तक पहुंच सकते हैं। इस पुस्तक में साहित्यकार डॉ० जितेंद्र पांडेय जी ने प्रथम शीर्षक के रूप में कबीर दास को चुना है और शीर्षक का नाम दिया "कबीर का स्वाधीन विवेक" यह सर्वविदित है कि कबीर दास जी निर्गुण भक्ति शाखा के क्रांतिकारी कवि थे। उन्होंने जाति-पाति, भेद-भाव, धार्मिक-कट्टरता, अंधविश्वास, आडंबर व पाखंड पर अपनी बेबाक लेखनी चलाई है। उनका आत्मविश्वास व लेखन कभी पराधीन नहीं रहा। कबीर दास जी ने अपने स्वतंत्र विवेक से समाज में फैली कुरीतियों पर कुठाराघात किया है। डॉ० जितेंद्र पांडेय जी ने कबीर के तमाम दोहों व अपने तर्कों द्वारा इस बात की पुष्ट करते हैं कि कबीर दास का स्वाधीन विवेक कितना प्रबल और क्रांतिकारी था। इसी क्रम में डॉ० जितेंद्र पांडेय जी ने गोस्वामी तुलसीदास पर एक पुष्ट समीक्षा "तुलसीदास एक युग प्रवर्तक" शीर्षक से प्रस्तुत किया है। समीक्षा पढ़ने पर हम तुलसीदास को एक युग परिवर्तक के रूप में स्वीकार करने पर विवश हो जाते हैं। तीसरे अध्याय में विश्व विख्यात महाकाव्य रामचरितमानस पर "मानस का राजधर्म" शीर्षक से डॉ० जितेंद्र जी ने जोरदार लेखनी चलाई है। मानस की अनेकों चौपाइयों व दोहों की व्यापक समीक्षा प्रस्तुत करते हुए मानस के राजधर्म को निरूपित किया है। जो हमें ज्ञान के साथ-साथ आनन्दानुभूति प्रदान करता है। "सतसई की मूल प्रवृत्ति" डॉ० जितेंद्र पांडेय जी की चौथी समीक्षा है। शृंगार रस के शीर्ष कवि बिहारी लाल द्वारा रचित पुस्तक बिहारी सतसई को खंगाल कर बिहारी सतसई की जड़ तक पहुंचने का सुंदर प्रयास ही नहीं किया है अपितु पहुँचा भी है। इसी शृंखला में लेखक ने "प्रेम की पीर के कवि घनानंद" पर अपनी बेबाक लेखनी चलाई है। इसमें उन्होंने घनानंद की अड़तीस प्रकाशित पुस्तकों का जिक्र व अनेक छंदों का व्यापक विशेषण किया है। जो लेखक की विद्वता का प्रमाण है। अगले अध्याय में "आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की बहुआयामी कविता" शीर्षक में विभिन्न कविताओं को व्याख्याित किया है। तदोपरांत अगले अध्याय में "सर्वोत्कृष्ट गीत काव्य है- सरोज स्मृति" नामक शीर्षक में लेखक ने अपनी समीक्षात्मक प्रतिभा का व्यापक नमूना प्रस्तुत किया है। इसी प्रकार डॉ जितेन्द्र पांडेय जी ने- "राष्ट्रीय चेतना के ओजस्वी गायक- रामधारी सिंह दिनकर" "कविता का व्यक्ति स्वातंत्र्य-अज्ञेय" "जनमानस की कविता-नागार्जुन" "बहुस्याम में निरूपित होती कविताएं" "बेकसूर आदमी का हालफनामा- धूमिल" "बेहतर दुनिया की चिंता के कवि -विश्वनाथ प्रसाद तिवारी" "कविता में जीवन-विश्वनाथ प्रसाद तिवारी" "नेति-नेति का विराट दर्शन है -फिर भी कुछ रह जाएगा" "संशयात्मा में निरूपित सभ्यता का की श्यामलता" "शोभनाथ यादव की कविता में सौंदर्य और संघर्ष का नया प्रयोग" "आवाँ विमर्श- एक विश्लेषण" "बवंडर में व्यक्त आक्रोश- श्री भगवान तिवारी" व "कविता के सरोकार" जैसे शीर्षकों की समीक्षाएं प्रस्तुत की है जो पुस्तक को विशिष्ठ बनाती है। अगले खंड में ललित निबंधों का विशाल संकलन है। निबंध गद्य साहित्य की एक उत्कृष्ट विधा है। इसमें लेखक किसी विशेष विषय पर अपना व्यापक विचार प्रस्तुत करता है। निबंध के कई प्रकार होते हैं जैसे-वर्णनात्मक निबंध, विवरणात्मक निबंध, तार्किक निबंध, आलोचनात्मक निबंध व ललित निबंध। इस पुस्तक के "निबंध खंड" में डॉ० जितेंद्र पांडेय जी ने अपने अट्ठारह ललित निबंधों को शामिल किया है। 'ललित निबंध' का मूल उद्देश्य पाठक को ज्ञान के साथ-साथ आनंद तथा उपयुक्त विषय पर चिंतन करने के लिए प्रेरणा प्रदान करना होता है। पुस्तक के सभी निबंधों के शीर्षक नवीनता को धारण किए हुए हैं। कई निबंध हमें समाज, साहित्य, अध्यात्म, शिक्षा, देश, सदी, स्वतंत्रता, यज्ञ, वेद, खेल व कृषि से जोड़ते हैं, तो कई निबंध हमें चिंतन करने पर विवश कर देते हैं। जिसमें "क्रोध पाप का मूल,"मौत पर फतह,"भारत- कल और आज,"आतंकवाद-जिम्मेदार कौन,"अराजकता की देन है आतंकवाद,"चरमराती शहरी सुविधाएं" हैं पुस्तक के अंत में दो निबंध "संगीतकार- रविंद्र जैन" व "अन्ना हजारे का जन आंदोलन" शीर्षक में भारत के दो महानायकों का व्यापक उल्लेख किया गया है। कुल मिलाकर डॉ० जितेंद्र पांडेय जी द्वारा लिखी गई समीक्षाओं व निबंधों से सुसज्जित "काव्य विवेक और निबंध ललित" पुस्तक विशिष्ट है। इस पुस्तक में शोधार्थियों के लिए व्यापक सामग्री विद्यमान है, तथा सामान्य पाठकों को आनंद व ज्ञान के झर-झर झर रहे जलप्रपातों में स्नान करने जैसा है। लालबहादुर चौरसिया 'लाल' महामंत्री- विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई

  • बडगाम में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, मुठभेड़ में लश्कर का वांटेड आतंकी मूसा ढेर

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com श्रीनगर, 30 सितंबर 2026। जम्मू-कश्मीर के मध्य कश्मीर स्थित बडगाम जिले में सुरक्षाबलों को मंगलवार देर रात बड़ी सफलता मिली। यूसमर्ग के ऊपरी इलाकों में चलाए गए संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक शीर्ष वांटेड आतंकवादी को मार गिराया गया। अधिकारियों ने मारे गए आतंकी की पहचान सुलेमान शाह उर्फ ‘मूसा’ के रूप में बताई है। हालांकि, शुरुआती सैन्य बयान में उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई थी। भारतीय सेना की चिनार कोर के अनुसार, विशेष खुफिया सूचना के आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने बडगाम के कोराग-यूसमर्ग इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। अभियान के दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी। सुरक्षा बलों ने संदिग्धों को चुनौती दी, जिसके बाद आतंकवादियों की ओर से गोलीबारी शुरू कर दी गई। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया। दुधपथरी के वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ अधिकारियों के मुताबिक, मुठभेड़ बडगाम के दुधपथरी के दुर्गम वन क्षेत्र में हुई। अभियान के बाद सुरक्षाबलों ने आसपास के इलाके में तलाशी अभियान जारी रखा, ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी या हथियारों एवं अन्य सामग्री का पता लगाया जा सके। शुरुआती रिपोर्टों में ऑपरेशन के जारी रहने की जानकारी दी गई थी। मारे गए आतंकी की पहचान को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में सुलेमान शाह उर्फ मूसा, फौजी मूसा तथा हाशिम मूसा जैसे नाम सामने आए हैं। सेना के प्रारंभिक आधिकारिक बयान में केवल एक आतंकवादी के मारे जाने की पुष्टि की गई थी, जबकि अधिकारियों और समाचार एजेंसियों ने बाद में उसकी पहचान सुलेमान शाह उर्फ मूसा के रूप में बताई। कई हमलों में संलिप्तता का आरोप अधिकारियों के अनुसार, मूसा जम्मू-कश्मीर में पिछले कई वर्षों के दौरान पीर पंजाल पर्वतमाला के दोनों ओर हुए कई हमलों में कथित रूप से शामिल था और सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, वह सितंबर की शुरुआत में यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई एक अन्य मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों की पकड़ से बच निकला था। उस अभियान में उसके करीबी सहयोगी यासिर के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले मंगलवार को शुरू हुए ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने खुफिया सूचना के आधार पर इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया था। सेना के अनुसार, संदिग्धों की ओर से पहले गोलीबारी किए जाने के बाद मुठभेड़ शुरू हुई। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभियान के दौरान बरामद हथियारों या अन्य सामग्री के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी आने का इंतजार है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि संयुक्त अभियान में एक आतंकवादी मारा गया है और इलाके में तलाशी एवं सुरक्षा अभियान जारी रखा गया है।

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