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सावधान! सीसीटीवी बना सुरक्षा पर खतरा

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 13 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देशभर में सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे अब खुद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट्स के बाद सरकार देशव्यापी सीसीटीवी नेटवर्क का व्यापक ऑडिट कराने की तैयारी में है। आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में लगे विदेशी, विशेषकर चीनी कंपनियों के कैमरे जासूसी का माध्यम बन सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, भारत में वर्तमान में 30 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा चीनी कंपनियों का है। सरकारी संस्थानों में ही करीब 10 लाख ऐसे कैमरे सक्रिय बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपकरणों के जरिए संवेदनशील डेटा विदेशी सर्वरों तक पहुंच सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।


घरों तक पहुंचा खतरा

यह जोखिम केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है। एक सर्वे के मुताबिक, देश के लगभग 79 प्रतिशत घरों में चीनी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौजूद हैं। इनमें होम सीसीटीवी, स्मार्ट कैमरा और बेबी मॉनिटर शामिल हैं, जो क्लाउड आधारित तकनीक पर काम करते हैं। चूंकि इनका डेटा अक्सर विदेशी सर्वरों, खासकर चीन में स्टोर होता है, ऐसे में नागरिकों की निजी गतिविधियां भी बाहरी निगरानी में आ सकती हैं।


वैश्विक घटनाओं से बढ़ी चिंता

दुनियाभर में सीसीटीवी के जरिए जासूसी और हमलों के कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कैमरों से सैनिकों की लोकेशन ट्रैक करने के मामले सामने आए, वहीं पश्चिम एशिया में भी सीसीटीवी हैक कर संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की घटनाएं हुई हैं। भारत में भी गाजियाबाद और पंजाब से जुड़े जासूसी मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, जहां सीसीटीवी फुटेज विदेश भेजे जाने के आरोप सामने आए।


संवेदनशील स्थानों पर बड़ा जोखिम

मेट्रो स्टेशन, ट्रैफिक सिग्नल और सैन्य ठिकानों के आसपास लगे कैमरे विशेष रूप से संवेदनशील माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन कैमरों में ‘बैकडोर एक्सेस’ और कमजोर एन्क्रिप्शन जैसी खामियां पाई जाती हैं, जिससे हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है। चीन के 2017 के इंटेलिजेंस कानून के तहत वहां की कंपनियों को सरकार के साथ डेटा साझा करना अनिवार्य है, जिससे आशंकाएं और गहरी हो जाती हैं।


सरकार का सख्त रुख

केंद्र सरकार ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए 1 अप्रैल 2026 से अप्रमाणित सीसीटीवी कैमरों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। अब विदेशी कंपनियों को भारत में अपने उत्पाद बेचने के लिए सोर्स कोड की जांच, चिपसेट की जानकारी और साइबर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। भारत का सीसीटीवी बाजार करीब 4.8 अरब डॉलर का है, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी चीनी कंपनियों की है। हालांकि, विडंबना यह है कि देश में उपयोग होने वाले करीब 80 प्रतिशत सीसीटीवी कंपोनेंट्स अब भी चीन से आयात किए जाते हैं।


विशेषज्ञों की सलाह

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खतरे से निपटने के लिए सरकारी और निजी संस्थानों को नियमित रूप से डेटा सिक्योरिटी ऑडिट कराना चाहिए। साथ ही, संवेदनशील डेटा को स्थानीय सर्वरों में स्टोर करने और संदिग्ध कैमरों को चरणबद्ध तरीके से बदलने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो सुरक्षा के लिए लगाए गए ये कैमरे ही देश की गोपनीय जानकारी लीक होने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकते हैं।

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