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श्री राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि पर गूंजा भक्तिरस

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 11 अग॰
  • 4 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 12 अग॰

भजन संध्या, जागरण और महाप्रसादी के साथ श्रद्धापूर्वक हुआ पुण्य स्मरण; संतों के सान्निध्य में उमड़ा समाज


फोटो: श्री राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि समारोह की भक्ति संध्या, संतों का सान्निध्य एवं महाप्रसादी कार्यक्रम

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई | 11 अगस्त 2026 चेन्नई। साहूकारपेट स्थित श्री राजेश्वर भवन में श्री राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाई गई। पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित भव्य भजन संध्या एवं जागरण में संतों के पावन सान्निध्य के बीच देर रात तक भक्तिमय वातावरण बना रहा। समाजबंधुओं, महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए श्री राजेश्वर भगवान के चरणों में श्रद्धा अर्पित की।


श्री राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सोमवार रात्रि श्री राजेश्वर भवन में विशेष भजन संध्या एवं जागरण का आयोजन किया गया। शिकारपुरा धाम से पधारे संतश्री विष्णुजी एवं श्री ज्ञानप्रकाशजी महाराज के पावन सान्निध्य ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।


भक्ति जागरण का शुभारंभ प्रसिद्ध भजन गायक सोहनजी कलबी डोली ने गणेश वंदना से किया। इसके बाद श्री राजारामजी की महिमा, उनके प्रेरक उपदेश एवं भविष्यवाणियों से जुड़े भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दी गईं। सावन मास की आध्यात्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए शिव भक्ति से ओत-प्रोत मधुर भजनों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्तिरस में सराबोर रखा।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भक्ति गीतों में सहभागिता की और गुरु एवं आराध्य

के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। श्री राजारामजी की महिमा एवं उनके संदेशों पर आधारित भजनों ने उपस्थित समाजबंधुओं में आध्यात्मिक चेतना और श्रद्धा का संचार किया।


मध्यरात्रि आरती के बाद विशेष धार्मिक आयोजन


जागरण के दौरान मध्यरात्रि में गुरुदेव की विशेष आरती की गई। आरती के समय पूरा श्री राजेश्वर भवन भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आरती में भाग लेकर सुख, शांति, समृद्धि और समाज के कल्याण की मंगलकामना की।

मध्यरात्रि आरती के पश्चात अगले वर्ष के चढ़ावे की घोषणा एवं संबंधित धार्मिक परंपराएं पूरी की गईं। इसके बाद प्रभाती आरती के साथ रात्रि के धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम में संतों के प्रवचन, भक्ति संगीत और धार्मिक परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला। आयोजन का उद्देश्य केवल पुण्य स्मरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को धार्मिक मूल्यों, गुरु भक्ति और सामाजिक एकता से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।


मंगलवार को पूजा-अर्चना के बाद महाप्रसादी

पुण्यतिथि के मुख्य धार्मिक कार्यक्रम के अगले चरण में मंगलवार को श्रावण वदी चौदस के अवसर पर श्री राजेश्वर भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आराधना की और परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा-अर्चना के पश्चात महाप्रसादी का आयोजन किया गया। इसमें चेन्नई के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे समाजबंधुओं ने भाग लिया। महिलाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय सहभागिता रही। महाप्रसादी के दौरान

समाजबंधुओं ने एक-दूसरे से आत्मीय मुलाकात की और धार्मिक आयोजन को सामाजिक मिलन का स्वरूप प्रदान किया।


श्रद्धा के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश


श्री राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी प्रभावशाली उदाहरण बना। विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजबंधुओं की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया।

आयोजन में समाज के पदाधिकारियों, कमेटी सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी के सामूहिक सहयोग से भजन संध्या, जागरण, पूजा-अर्चना और महाप्रसादी सहित विभिन्न कार्यक्रम व्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुए।

समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज की नई पीढ़ी को अपनी आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब बच्चे और युवा धार्मिक कार्यक्रमों में परिवार के साथ सहभागी बनते हैं, तो उनमें संस्कार, सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।


भक्ति गीतों ने बांधा समां

मंच पर भक्ति संगीत मंडली, गायक व वादक; पीछे गणेश-शिव-राधा-कृष्ण चित्रों वाला बैनर, वातावरण आध्यात्मिक

भजन गायक सोहनजी कलबी डोली की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहीं। गणेश वंदना से शुरू हुई भक्ति यात्रा में श्री राजारामजी की महिमा, उपदेश और भविष्यवाणियों से जुड़े भजनों के साथ सावन मास की शिव भक्ति से संबंधित गीत प्रस्तुत किए गए।

भक्ति संगीत के दौरान श्रद्धालुओं ने तालियों और जयकारों के साथ अपनी सहभागिता दर्ज कराई। देर रात तक चले जागरण में भक्तिमय वातावरण बना रहा। मध्यरात्रि आरती के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह विशेष रूप से देखने को मिला।


संतों का सान्निध्य बना आध्यात्मिक आकर्षण


शिकारपुरा धाम के संतश्री विष्णुजी एवं श्री ज्ञानप्रकाशजी महाराज की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया। संतों के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने धर्म, गुरु भक्ति और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त की।

धार्मिक आयोजनों में संतों का सान्निध्य श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का अवसर माना जाता है। इसी भावना के साथ समाजबंधुओं ने संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और उनके आशीर्वाद प्राप्त किए।


हॉल में सफेद कपड़ों व लाल पगड़ियों वाले पुरुषों का समूह, पीछे हिंदी बैनर, उत्सव और सम्मान समारोह का माहौल

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

श्री राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि के अवसर पर बच्चों और महिलाओं की सहभागिता आयोजन की खास विशेषता रही। धार्मिक कार्यक्रमों में परिवार के सभी वर्गों की भागीदारी से सामाजिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

आयोजकों ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी परंपरा, संतों की शिक्षाओं और समाज की विरासत से परिचित कराया जा सकता है। इससे नई पीढ़ी में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान और जुड़ाव मजबूत होता है।

सफल आयोजन में सभी का सहयोग


भव्य आयोजन को सफल बनाने में समाज के पदाधिकारियों, कमेटी सदस्यों, कार्यकर्ताओं और समाजबंधुओं का विशेष सहयोग रहा। आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में सभी ने जिम्मेदारी के साथ योगदान दिया।

भजन संध्या से लेकर पूजा-अर्चना और महाप्रसादी तक कार्यक्रमों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। समाजबंधुओं ने भी अनुशासन और उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।


पुण्य स्मरण से मिला सेवा और संस्कार का संदेश


श्री राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को अपने आराध्य और संत परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर दिया। भक्ति, आरती, पूजा-अर्चना और महाप्रसादी के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पुण्य स्मरण किया।

यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि धार्मिक परंपराएं केवल उत्सव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज में संस्कार, सेवा, सद्भाव और एकता को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।

चेन्नई के साहूकारपेट स्थित श्री राजेश्वर भवन में आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धा और उल्लास का केंद्र बना रहा। समाजबंधुओं ने श्री राजेश्वर भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए धार्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने और समाज की एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।

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