शिकारपुरा धाम में संत देवारामजी महाराज को श्रद्धांजलि, कलबी समाज ने किया कोटि-कोटि नमन
- धन्नाराम चौधरी

- 3 जुल॰
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30वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सागर, गुरुवाणी के संदेशों को याद कर भावुक हुआ समाज
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा धाम | 03 जुलाई, 2026 पावन तीर्थ धाम शिकारपुरा में कलबी समाज के परम आराध्य गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजारामजी महाराज के प्रथम शिष्य एवं गुरु गादीपति संत श्री श्री 1008 श्री देवारामजी महाराज की 30वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और भावनात्मक वातावरण में मनाई गई। विक्रम संवत् 2053 आषाढ़ वदी 2 को ब्रह्मलीन हुए संत देवारामजी महाराज को समाज के श्रद्धालुओं ने दंडवत प्रणाम करते हुए कोटि-कोटि वंदन और नमन किया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संत देवारामजी महाराज के त्याग, तपस्या और समाज उत्थान के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गुरुवाणी के प्रचार-प्रसार और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। गुरु महाराज श्री राजारामजी महाराज की समाधि के बाद विक्रम संवत् 2000 में संत देवारामजी महाराज को गुरु गादी पर विराजित कर “महंत श्री” की उपाधि प्रदान की गई थी।
संत देवारामजी महाराज ने अपने गुरु भाइयों श्री लच्छीरामजी, श्री गणेशरामजी और श्री शंभुरामजी के साथ देशभर में भ्रमण करते हुए गुरु महाराज की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाया। उनके उपदेशों ने समाज में संस्कारयुक्त शिक्षा, नशामुक्ति, मातृशक्ति सम्मान, आध्यात्मिक जीवन और सामाजिक समरसता का संदेश फैलाया।
उन्होंने हमेशा गुरुवाणी के माध्यम से सरल, सात्विक और धर्मपरायण जीवन अपनाने की प्रेरणा दी। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि आज भी शिकारपुरा धाम से प्रवाहित गुरुवाणी लाखों लोगों को नैतिकता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
संत देवारामजी महाराज के संदेशों में “नशा मुक्त समाज”, “अहंकार मुक्त मानव”, “आडंबर और पाखंड मुक्त जीवन” तथा “संस्कारयुक्त शिक्षा” जैसे विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना, भजन एवं गुरुवाणी पाठ कर संत देवारामजी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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