वेदासंदूर: तमिलनाडु की सत्ता का भरोसेमंद संकेतक
- धन्ना राम चौधरी

- 14 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
वेदासंदूर। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में वेदासंदूर सीट एक बार फिर राजनीतिक विश्लेषकों और दलों के लिए खास महत्व रखती नजर आ रही है। भले ही इसे ‘किंगमेकर’ कहना पूरी तरह सटीक न हो, लेकिन पिछले पांच दशकों का चुनावी इतिहास इस सीट को राज्य की सत्ता के रुझान का एक विश्वसनीय बैरोमीटर जरूर साबित करता है।
1971 से दिखता आ रहा स्पष्ट ट्रेंड
वेदासंदूर का राजनीतिक महत्व 1971 से उभरकर सामने आया, जब डीएमके के पी. मुथुसामी ने यहां जीत दर्ज की। इसके बाद 1977 से 1984 के बीच एआईएडीएमके के एस.एम. वासन और वी.पी. बालासुब्रमण्यम की जीत उस दौर की सत्ता के साथ मेल खाती रही, जब राज्य में एम.जी. रामचंद्रन के नेतृत्व में सरकार थी। 1989 में डीएमके की वापसी के साथ मुथुसामी ने फिर यह सीट जीती, जो सत्ता परिवर्तन का संकेत बनी।
हर बार सत्ता के साथ कदमताल
1991 से 2001 के बीच वेदासंदूर सीट पर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच मुकाबला होता रहा, लेकिन एक खास बात हर चुनाव में देखने को मिली—जिस दल ने यहां जीत दर्ज की, वही राज्य की सत्ता तक पहुंचा। इस निरंतरता ने इस सीट को ‘राजनीतिक संकेतक’ के रूप में स्थापित कर दिया।
2006: अपवाद, पर संकेत कायम
2006 का चुनाव इस पैटर्न में एक अपवाद जरूर रहा, जब कांग्रेस के एम. धनदापानी ने सीट जीती, जबकि डीएमके ने सहयोगियों के साथ सरकार बनाई। हालांकि, यह परिणाम भी व्यापक गठबंधन समीकरणों के कारण उसी राजनीतिक धड़े की ओर इशारा करता रहा, जो अंततः सत्ता में आया।
हालिया चुनावों में भी बरकरार रहा ट्रेंड
2011 और 2016 में एआईएडीएमके के एस. पलानीचामी और वीपीबी परमासिवम की जीत पार्टी की सरकार बनने के साथ मेल खाती रही। वहीं, 2021 में डीएमके के एस. गांधिराजन की जीत के साथ राज्य में डीएमके की सत्ता में वापसी हुई। इन नतीजों ने वेदासंदूर की ‘सत्ता संकेतक’ की छवि को और मजबूत किया है।
‘तटस्थ मतदाता’ बनाते हैं खास
राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय नेताओं का मानना है कि वेदासंदूर का मतदाता वर्ग अपेक्षाकृत तटस्थ और जागरूक है। यहां जातीय या भावनात्मक ध्रुवीकरण की बजाय विकास, शासन और स्थानीय मुद्दों पर मतदान अधिक प्रभावी रहता है। यही कारण है कि यह सीट राज्य के व्यापक जनमत का प्रतिबिंब बन जाती है।
2026: सीधा मुकाबला, बड़े संकेत
विधानसभा चुनाव 2026 में यहां डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला है। डीएमके जहां अपनी सरकार के कामकाज और कल्याणकारी योजनाओं के आधार पर जनसमर्थन बनाए रखने का दावा कर रही है, वहीं एआईएडीएमके एंटी-इंकंबेंसी और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।
‘किंगमेकर’ नहीं, पर असरदार संकेतक
स्पष्ट है कि वेदासंदूर को ‘किंगमेकर’ कहना भले अतिशयोक्ति हो, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी संभव नहीं। यह सीट तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा को समझने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। 2026 में भी इसके नतीजे राज्य की सत्ता के रुख का संकेत देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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