लैंड-फॉर-जॉब्स केस में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बड़ा झटका, कोर्ट ने याचिका की खारिज—बोला, “मुकदमे को उलझाने की कोशिश”
- धन्ना राम चौधरी

- 19 मार्च
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट से लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों नेताओं द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि आरोपियों को हर प्रकार के दस्तावेज प्राप्त करने का अधिकार नहीं है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष पहले अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगा और उसी आधार पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि बिना ठोस आधार के अतिरिक्त दस्तावेज मांगना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
अन्य आरोपियों की याचिकाएं भी खारिज
अदालत ने इस मामले में अन्य आरोपियों—लालू प्रसाद के निजी सचिव आर. के. महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर—की याचिकाएं भी खारिज कर दीं। महाजन ने एक और कपूर ने 23 ‘अविश्वसनीय दस्तावेज़’ उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
‘अविश्वसनीय दस्तावेज’ पर कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
अदालत ने कहा कि ‘अविश्वसनीय दस्तावेज’ वे होते हैं जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं, लेकिन अभियोजन पक्ष अपनी शिकायत में उन पर भरोसा नहीं करता। ऐसे दस्तावेजों को एकमुश्त उपलब्ध कराने की मांग को न्यायाधीश ने “उलटी गंगा बहाने” जैसा बताते हुए खारिज कर दिया।
‘मुकदमे को पेचीदा बनाने की कोशिश’
अपने 35 पृष्ठों के आदेश में न्यायाधीश गोगने ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों की याचिकाओं से यह प्रतीत होता है कि वे मुकदमे को प्रारंभिक चरण में ही “पेचीदगियों की भूलभुलैया” में धकेलना चाहते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि कार्यवाही को लंबा खींचने का “गुप्त इरादा” है।
न्यायिक प्रक्रिया पर नहीं लगेगी शर्त
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी जिरह शुरू करने से पहले सभी ‘अविश्वसनीय दस्तावेज’ उपलब्ध कराने की शर्त नहीं रख सकते। न्यायालय ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर किसी प्रकार की शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पहले ही मिल चुका है पर्याप्त अवसर
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है, जो अभियोजन की शिकायत का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग न्यायसंगत नहीं है।
आगे क्या
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामले में अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगा, जिसके आधार पर आगे की सुनवाई जारी रहेगी। इस आदेश से स्पष्ट है कि अदालत इस मामले की सुनवाई को बिना अनावश्यक देरी के आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
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