लुधियाना में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: दो फर्जी कॉल सेंटरों पर रेड, 126 गिरफ्तार; दिल्ली से चलता था नेटवर्क
- धन्ना राम चौधरी

- 15 मई
- 4 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
डेटलाइन: लुधियाना/चंडीगढ़, 14 मई। पंजाब के लुधियाना में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने फिरोजपुर रोड स्थित संधू टावर के पास चल रहे दो अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 126 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में युवक-युवतियां शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहा था।
पुलिस के अनुसार आरोपित खुद को नामी कंपनियों के कस्टमर केयर अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि या टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। इसके बाद तकनीकी समस्या, बैंक सुरक्षा खतरे या ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम में गड़बड़ी का डर दिखाकर लोगों से डॉलर में भुगतान करवाया जाता था।
दिल्ली से ऑपरेट होता था पूरा नेटवर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस साइबर फ्रॉड रैकेट का मास्टरमाइंड दिल्ली में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। दिल्ली में मुख्य कंट्रोल सेंटर बनाया गया था, जबकि पंजाब सहित कई राज्यों में इसके सब-ऑफिस चल रहे थे। पुलिस ने दिल्ली में दबिश भी दी, लेकिन मुख्य संचालक फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। कुछ सदस्य विदेशी नागरिकों को ईमेल भेजते थे, जबकि अन्य लोग कॉल के जरिए उन्हें फंसाने का काम करते थे। इसके अलावा अलग टीम ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से ट्रांसफर करती थी।
ऐसे फंसाए जाते थे विदेशी नागरिक
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपित पहले विदेशी नागरिकों को फर्जी ईमेल भेजते थे। इन ईमेल में दावा किया जाता था कि उनके बैंक खाते, कार्ड या ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम में तकनीकी समस्या आ गई है। ईमेल में टोल-फ्री नंबर भी दिए जाते थे, जिन पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था।
जैसे ही कोई व्यक्ति नंबर पर कॉल करता, कॉल सेंटर में बैठे युवक धाराप्रवाह अंग्रेजी में बातचीत कर खुद को टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बताते थे। इसके बाद पीड़ितों को डराया जाता था कि उनका बैंक अकाउंट हैक हो सकता है या खाते से रकम गायब हो सकती है।
“समस्या समाधान” के नाम पर पहले 10 डॉलर की ट्रायल पेमेंट ली जाती थी। इसके बाद ग्राहकों के कंप्यूटर या मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया जाता था। रिमोट एक्सेस मिलते ही आरोपित बैंक डिटेल, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी चुरा लेते थे और खातों से रकम ट्रांसफर कर देते थे।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने रेड के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट डिवाइस, फर्जी दस्तावेज और फर्जी आईडी पर जारी किए गए सिम कार्ड बरामद किए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए अधिकांश युवक-युवतियां 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के हैं। शुरुआती पूछताछ में कई आरोपितों ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन जॉब विज्ञापनों के जरिए भर्ती किया गया था। आकर्षक सैलरी, इंसेंटिव और पार्ट-टाइम नौकरी का लालच देकर उन्हें इस नेटवर्क में जोड़ा गया।
साइबर अपराध पर बढ़ी चिंता
इस कार्रवाई के बाद साइबर सुरक्षा और फर्जी कॉल सेंटरों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही साइबर ठगी में अब भारत के कई शहरों का नाम सामने आने लगा है। ऐसे में युवाओं को फर्जी ऑनलाइन नौकरी विज्ञापनों और संदिग्ध कंपनियों से सतर्क रहने की जरूरत है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, विदेशी संपर्कों और अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य (Fact Box)
लुधियाना में दो अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटरों पर पुलिस रेड
126 आरोपित गिरफ्तार, कई युवतियां भी शामिल
विदेशी नागरिकों को बनाया जाता था निशाना
दिल्ली से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क
फर्जी सिम कार्ड, लैपटॉप और कंप्यूटर बरामद
करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का शक
Q&A : आपके मन में उठ रहे सवाल
Q1. आरोपित लोगों को कैसे ठगते थे?
वे खुद को टेक्निकल सपोर्ट या बैंक अधिकारी बताकर ग्राहकों को डराते थे और रिमोट एक्सेस लेकर बैंक जानकारी चुरा लेते थे।
Q2. क्या इस गिरोह का नेटवर्क अन्य राज्यों में भी फैला था?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दिल्ली समेत कई राज्यों में इनके सब-ऑफिस संचालित हो रहे थे।
Q3. पुलिस को क्या-क्या मिला?
मोबाइल फोन, लैपटॉप, इंटरनेट उपकरण, फर्जी दस्तावेज और फर्जी आईडी पर जारी सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
Q4. क्या गिरफ्तार युवक-युवतियां जानबूझकर इस काम में शामिल थे?
कुछ आरोपितों ने दावा किया कि उन्हें ऑनलाइन नौकरी विज्ञापनों के जरिए भर्ती किया गया था, हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
Q5. आम लोग ऐसे फ्रॉड से कैसे बचें?
अनजान कॉल, संदिग्ध ईमेल, रिमोट एक्सेस ऐप और बैंक डिटेल साझा करने से बचें। किसी भी समस्या के लिए आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन का ही उपयोग करें।
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Meta Description: लुधियाना में पुलिस ने दो अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटरों पर छापा मारकर 126 लोगों को गिरफ्तार किया। विदेशी नागरिकों से करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा।
निष्कर्ष : लुधियाना में सामने आया यह मामला केवल एक साइबर फ्रॉड का खुलासा नहीं, बल्कि तेजी से फैलते डिजिटल अपराध के खतरनाक नेटवर्क की ओर संकेत है। जिस तरह युवाओं को आकर्षक नौकरी और इंसेंटिव के नाम पर ऐसे गिरोहों से जोड़ा जा रहा है, वह चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में साइबर अपराध के खिलाफ राज्यों के बीच संयुक्त अभियान और डिजिटल जागरूकता अभियान और तेज किए जा सकते हैं।
Source: पंजाब पुलिस प्रारंभिक जांच, स्थानीय पुलिस अधिकारियों की जानकारी एवं मीडिया रिपोर्ट्स।
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