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पंजाब में नशे पर हाई कोर्ट सख्त: “हर समस्या के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं”, सरकार से मांगा जवाब

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 9
  • 4 min read
पंजाब में बढ़ते नशे के मामलों को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया। punjab-high-court-drug-case-bathinda.jpg
पंजाब में बढ़ते नशे के मामलों को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया। punjab-high-court-drug-case-bathinda.jpg

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चंडीगढ़ | पंजाब में बढ़ते नशे के कारोबार और युवाओं की मौतों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा पाकिस्तान और ISI का जिक्र किए जाने पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि “क्या हर समस्या के लिए पाकिस्तान और ISI ही जिम्मेदार हैं? आपने खुद नशा तस्करी रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?”

कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राज्य में नशे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बाहरी ताकतों को दोष देकर राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती। कोर्ट ने सरकार से नशा तस्करी रोकने के लिए किए गए ठोस प्रयासों, दर्ज मामलों की जांच और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

स्वतः संज्ञान लेकर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

मामला तब चर्चा में आया जब एक समाचार पत्र में “यहां खुलेआम चिट्टा बिकता है” शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित हुई। रिपोर्ट में मौर कलां गांव की स्थिति का जिक्र किया गया था, जहां ग्रामीणों ने कथित नशा तस्करों के खिलाफ दीवारों पर काले रंग से संदेश लिखकर विरोध जताया था।

रिपोर्ट के अनुसार, गांव में नशे की खुलेआम बिक्री और एक युवक की संदिग्ध ओवरडोज से मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार से जवाब मांगा।

“बठिंडा बॉर्डर एरिया नहीं, फिर क्यों नहीं रुक रहा नशा?”

सुनवाई के दौरान अदालत ने पंजाब सरकार से पूछा कि जब बठिंडा सीमा क्षेत्र में नहीं आता, तो फिर राज्य सरकार नशे की सप्लाई और तस्करी पर नियंत्रण क्यों नहीं कर पा रही है।

कोर्ट ने कहा कि सरकार हर बार पाकिस्तान और ISI का नाम लेकर अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:

“इनका नाम इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि हम उनसे जवाब नहीं मांग सकते।”

अदालत ने यह भी पूछा कि पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के लिए कौन-कौन से नए कदम उठाए जा रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या स्थायी तंत्र विकसित किया गया है।

पंजाब सरकार ने क्या जानकारी दी?

पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक केवल मौर कलां गांव में नशा तस्करी से जुड़े 82 FIR दर्ज किए गए हैं और 152 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं पूरे बठिंडा जिले में 1673 FIR दर्ज होने की जानकारी भी सरकार ने अदालत को दी। हालांकि अदालत ने पूछा कि इतनी कार्रवाई के बावजूद जमीनी स्तर पर नशे की उपलब्धता क्यों बनी हुई है।

कोर्ट ने अगली सुनवाई में जांच की स्थिति, चालान दाखिल करने की प्रगति और नशा रोकने के लिए बनाई गई रणनीति की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

पंजाब में नशे की समस्या कितनी गंभीर?

पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी, सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी नेटवर्क, संगठित अपराध और कमजोर पुनर्वास प्रणाली इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।

हाल के वर्षों में “चिट्टा” जैसे सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल ने युवाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचे पर गहरा असर डाला है। कई सामाजिक संगठनों ने भी राज्य सरकार से सख्त और दीर्घकालिक नीति लागू करने की मांग की है।

क्या कहते हैं कानूनी और सामाजिक विशेषज्ञ?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाई कोर्ट की टिप्पणी केवल सरकार की आलोचना नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश है। अदालत यह जानना चाहती है कि FIR दर्ज करने के अलावा जमीनी स्तर पर रोकथाम, पुनर्वास और नेटवर्क तोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। युवाओं के लिए रोजगार, नशा मुक्ति केंद्रों की क्षमता बढ़ाना और गांव स्तर पर जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं।

जनता के मन में उठ रहे सवाल (Q&A)

Q1. हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को क्यों फटकार लगाई?

कोर्ट ने नशा तस्करी रोकने में नाकामी और हर समस्या के लिए पाकिस्तान व ISI को जिम्मेदार ठहराने पर सवाल उठाए।

Q2. मामला किस गांव से जुड़ा है?

यह मामला बठिंडा जिले के मौर कलां गांव से जुड़ा है।

Q3. सरकार ने अदालत को क्या जानकारी दी?

सरकार ने बताया कि मौर कलां में 82 FIR और पूरे बठिंडा में 1673 FIR दर्ज की गई हैं।

Q4. कोर्ट ने अगली सुनवाई में क्या मांगा है?

नशा रोकने के लिए उठाए गए कदम, जांच की स्थिति और चालान संबंधी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

Q5. पंजाब में “चिट्टा” क्या है?

“चिट्टा” सिंथेटिक ड्रग्स का स्थानीय नाम है, जिसका इस्तेमाल राज्य में गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

निष्कर्ष : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने एक बार फिर राज्य में नशे की गंभीर समस्या को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि केवल बाहरी ताकतों को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पंजाब सरकार नशा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण और युवाओं को बचाने के लिए कितनी ठोस और दीर्घकालिक रणनीति पेश करती है।

Source: मीडिया रिपोर्ट, पुलिस अधिकारियों के बयान, न्यायालयीय दस्तावेज पक्ष।

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अब आपकी बारी!

  • क्या आपको लगता है कि पंजाब में नशे के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जरूरत है?

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