'लॉरेंस ऑफ पंजाब' पर बैन की मांग, सांसद का नोटिस
- धन्ना राम चौधरी

- 22 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
लुधियाना, 22 अप्रैल 2026। रिलीज से ठीक चार दिन पहले डायरेक्टर राघव डार की आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' सियासी और कानूनी विवादों के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने इसे कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के अपराधी जीवन को महिमामंडित करने वाला बताते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 को कानूनी नोटिस थमा दिया है। सांसद की इस कार्रवाई से पंजाब में गैंगस्टर संस्कृति को लेकर बहस तेज हो गई है।
ट्रेलर रिलीज होते ही भड़का विवाद
सीरीज का ट्रेलर सामने आते ही हंगामा मच गया। वारिंग ने दावा किया कि यह कुख्यात अपराधी लॉरेंस बिश्नोई के लाइफस्टाइल पर आधारित है, जिस पर अदालतों में हत्या, अपहरण, वसूली और धमकी जैसे कई गंभीर मामले लंबित हैं। 2018 में सलमान खान को खुलेआम धमकी देकर राष्ट्रीय सुर्खियों में आए बिश्नोई ने जेल से ही अपना अपराधी साम्राज्य चलाने का सिलसिला जारी रखा है। सांसद का कहना है, "किसी अपराधी की गाथा को नाटकीय ढंग से पेश करना उसके कुकर्मों को हीरोइक बनाने जैसा है। इससे युवाओं में अपराध के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और पंजाब की कानून-व्यवस्था दांव पर लग जाएगी।"
पंजाब पहले से गैंगस्टर संस्कृति से जूझ रहा
वारिंग ने जोर देकर कहा कि पंजाब लंबे समय से गैंगस्टर संस्कृति और युवाओं के अपराध की ओर झुकाव की समस्या से त्रस्त है। नोटिस में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और संविधान के अनुच्छेद 19(2) का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। "समाज में अशांति फैलाने वाले कंटेंट पर रोक जरूरी है," उन्होंने कहा। सांसद ने ZEE5 से स्ट्रीमिंग रोकने और ट्रेलर हटाने की मांग की है, वरना कोर्ट का रुख करेंगे।
डायरेक्टर का बचाव: अपराध की जड़ों पर फोकस
दूसरी ओर, डायरेक्टर राघव डार ने सफाई दी कि सीरीज अपराध का महिमामंडन नहीं, बल्कि उसके मूल कारणों की गहन पड़ताल है। "हमने स्टूडेंट पॉलिटिक्स, सोशल मीडिया और सामाजिक माहौल को जोड़कर दिखाया है कि कोई व्यक्ति अपराध के रास्ते पर कैसे भटक जाता है," उन्होंने कहा। सीरीज 27 अप्रैल को ZEE5 पर हिंदी में प्रीमियर होगी। इस विवाद ने ओटीटी कंटेंट पर सेंसरशिप और अपराधी जीवनों को ग्लैमराइज करने की बहस को नई जान दे दी है। क्या कोर्ट इस पर रोक लगाएगा या रचनात्मक स्वतंत्रता को प्राथमिकता मिलेगी—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
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