मुंबई में 100 करोड़ घोटाले के आरोप से सियासी तूफान, किरीट सोमैया के निशाने पर किशोरी पेडनेकर
- धन्ना राम चौधरी

- 14 मई
- 4 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
डेटलाइन: मुंबई, 14 मई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर कोविड काल के दौरान हुए खर्च और ठेकों को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा नेता Kirit Somaiya ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुंबई महापौर Kishori Pednekar पर 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। सोमैया का दावा है कि कोविड महामारी के दौरान मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा किए गए कुछ ठेकों और परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि महालक्ष्मी रेसकोर्स कोविड सेंटर समेत कई परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी कर ठेके दिए गए और संबंधित कंपनियों को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया। वहीं शिवसेना (यूबीटी) ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।
कोविड सेंटर और ठेकों पर उठे सवाल
सोमैया ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि कोविड महामारी के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों का फायदा उठाकर कुछ निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। उनके अनुसार, महालक्ष्मी रेसकोर्स कोविड सेंटर और अन्य अस्थायी स्वास्थ्य परियोजनाओं में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन सुविधाओं के लिए भारी रकम जारी की गई, उनमें से कई परियोजनाएं पूरी क्षमता से शुरू भी नहीं हो सकीं। भाजपा नेता का कहना है कि पूरे मामले में दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जांच आवश्यक है।
हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी जांच एजेंसी या अदालत द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फर्जी दस्तावेज और प्रभाव इस्तेमाल करने का आरोप
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि कथित घोटाले में फर्जी दस्तावेजों और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। सोमैया के अनुसार, कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया।
उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो संबंधित एजेंसियों के समक्ष अतिरिक्त दस्तावेज भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
शिवसेना (UBT) का पलटवार
Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्षी नेताओं को बदनाम करने की राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है।
शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने कहा कि कोविड काल में मुंबई महानगरपालिका ने कठिन परिस्थितियों में काम किया और लाखों लोगों की जान बचाने के लिए त्वरित फैसले लेने पड़े थे। पार्टी का आरोप है कि अब उन्हीं फैसलों को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
पहले भी विवादों में आया था नाम
यह पहला मौका नहीं है जब किशोरी पेडनेकर विवादों में घिरी हों। इससे पहले कोविड बॉडी बैग खरीद मामले और एसआरए (Slum Rehabilitation Authority) फ्लैट विवाद में भी उनका नाम चर्चा में आया था।
हालांकि, हर बार पेडनेकर ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। इस बार भी उन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
मुंबई की राजनीति में बढ़ी गर्मी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई महानगरपालिका चुनावों से पहले इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं। बीएमसी देश की सबसे समृद्ध नगरपालिकाओं में गिनी जाती है और उसका राजनीतिक नियंत्रण महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
कोविड काल के दौरान किए गए खर्च, मेडिकल खरीद और आपातकालीन ठेकों को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नया आरोप राजनीतिक बहस को और तीखा बना सकता है।
आपके मन में उठ रहे सवाल
हालिया घटनाक्रम के बाद आम लोगों के मन में कई अहम सवाल उठ रहे हैं—
क्या कोविड काल के ठेकों की स्वतंत्र जांच होगी?
क्या BMC के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे?
क्या आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी हैं या इनमें तथ्यात्मक आधार भी है?
क्या चुनावों से पहले ऐसे और खुलासे सामने आ सकते हैं?
क्या किसी जांच एजेंसी ने प्राथमिक जांच शुरू की है?
Q&A / FAQ सेक्शन
Q1. किरीट सोमैया ने क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया है कि कोविड काल के दौरान मुंबई महानगरपालिका की परियोजनाओं में लगभग 100 करोड़ रुपये की अनियमितताएं हुईं।
Q2. आरोप किस परियोजना से जुड़े हैं?
मुख्य रूप से महालक्ष्मी रेसकोर्स कोविड सेंटर और अन्य कोविड परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है।
Q3. क्या आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। अभी तक किसी अदालत या जांच एजेंसी द्वारा आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Q4. किशोरी पेडनेकर की प्रतिक्रिया क्या है?
उन्होंने और उनकी पार्टी ने आरोपों को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है।
Q5. क्या पहले भी विवाद हुए थे?
हाँ। कोविड बॉडी बैग खरीद और एसआरए फ्लैट विवाद में भी उनका नाम सामने आ चुका है।
निष्कर्ष: मुंबई की राजनीति में कोविड काल से जुड़े खर्च और प्रशासनिक फैसले एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में यदि जांच एजेंसियां इस मामले में सक्रिय होती हैं, तो कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल मामला राजनीतिक आरोपों और जवाबी बयानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
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