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मानसून से पहले मुंबई में बड़ा खतरा! MMR की 827 इमारतें ‘बेहद जर्जर’, 18 हजार से ज्यादा घरों पर संकट

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 12
  • 4 min read

भारी बारिश से बढ़ सकती है तबाही, प्रशासन अलर्ट मोड में; हजारों परिवार अब भी खतरनाक भवनों में रहने को मजबूर


“मानसून से पहले मुंबई महानगर क्षेत्र की जर्जर और खतरनाक इमारतों का दृश्य”
“मानसून से पहले मुंबई महानगर क्षेत्र की जर्जर और खतरनाक इमारतों का दृश्य”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: मुंबई, 12 मई| देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे जुड़े मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में मानसून से पहले पुराने और जर्जर भवनों को लेकर बड़ा खतरा सामने आया है। नगर निकायों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे एमएमआर क्षेत्र में 827 इमारतों को “बेहद खतरनाक” श्रेणी में रखा गया है, जबकि 18 हजार से अधिक घरों को रहने के लिए असुरक्षित माना गया है। प्रशासनिक रिपोर्ट और स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब अगले कुछ हफ्तों में मानसून दस्तक देने वाला है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश, सीलन, कमजोर ढांचे और रखरखाव की कमी के कारण इस बार मानसून के दौरान हादसों का खतरा पहले से अधिक गंभीर हो सकता है। यही वजह है कि नगर निकायों ने कई इमारतों को तत्काल खाली कराने के आदेश जारी किए हैं।

घनी आबादी वाले इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के अलावा ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी, मीरा-भयंदर और उल्हासनगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बड़ी संख्या में भवन अत्यंत खराब स्थिति में पहुंच चुके हैं।

नगर निकायों के अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई इमारतें 30 से 50 साल पुरानी हैं। वर्षों से मरम्मत न होने और लगातार बढ़ते भार के कारण उनकी संरचनात्मक क्षमता कमजोर हो चुकी है। कुछ इमारतों में दरारें, झुके हुए पिलर और जंग लगे लोहे के ढांचे पाए गए हैं।

स्ट्रक्चरल ऑडिट में सामने आई गंभीर स्थिति

स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने पाया कि अनेक इमारतों के बीम और पिलर अब भार सहने की स्थिति में नहीं बचे हैं। कई भवनों में छतों से पानी रिस रहा है और नींव कमजोर हो चुकी है।

रिपोर्ट के आधार पर नगर निकायों ने भवन मालिकों और निवासियों को नोटिस जारी कर इमारतें खाली करने को कहा है। हालांकि, बड़ी संख्या में लोग अब भी इन भवनों में रह रहे हैं।

सबसे बड़ी चुनौती: वैकल्पिक आवास

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी समस्या प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की है। हजारों परिवार आर्थिक मजबूरी, किराए के बढ़ते खर्च और ट्रांजिट कैंपों की कमी के कारण घर खाली नहीं करना चाहते।

कई निवासियों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए दूसरा विकल्प नहीं है। कुछ लोग वर्षों से पुनर्विकास परियोजनाओं का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कानूनी विवाद और बिल्डरों की देरी के कारण योजनाएं अटकी हुई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यही स्थिति हर साल मानसून के दौरान बड़े हादसों की आशंका को बढ़ा देती है।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है खतरा?

इमारत विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण पुराने भवनों में सीलन बढ़ती है, जिससे कंक्रीट कमजोर हो जाती है और लोहे में जंग लगने लगता है। यदि भवन पहले से ही कमजोर हो तो भारी बारिश के दौरान उसका ढहना आसान हो जाता है।

पिछले वर्षों में मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में कई इमारतें गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए प्रशासन इस बार पहले से अधिक सतर्क नजर आ रहा है।

प्रशासन का सख्त रुख

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और अन्य नगर निकायों ने साफ किया है कि खतरनाक घोषित भवनों को खाली कराना प्राथमिकता होगी। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नोटिस के बावजूद भवन खाली नहीं करने पर बिजली और पानी की सप्लाई काटी जा सकती है।

इसके अलावा आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है। मानसून के दौरान संभावित हादसों से निपटने के लिए राहत और बचाव टीमों की तैयारी शुरू कर दी गई है।

पुनर्विकास परियोजनाओं पर भी उठे सवाल

कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि पुनर्विकास योजनाओं में देरी के कारण लोग जोखिम भरे भवनों में रहने को मजबूर हैं। कुछ मामलों में बिल्डरों पर धोखाधड़ी और परियोजनाओं को अधूरा छोड़ने के आरोप भी लगे हैं।

शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुनर्विकास परियोजनाओं को तेज गति से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है।

Q&A : आपके मन में उठ रहे सवाल

Q1. MMR में कितनी इमारतें बेहद खतरनाक घोषित की गई हैं?

नगर निकायों के अनुसार 827 इमारतों को “बेहद खतरनाक” श्रेणी में रखा गया है।

Q2. कितने घर असुरक्षित माने गए हैं?

18 हजार से अधिक घरों को रहने के लिहाज से असुरक्षित माना गया है।

Q3. सबसे ज्यादा खतरा किन इलाकों में है?

मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी, मीरा-भयंदर और उल्हासनगर जैसे क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर बताई गई है।

Q4. प्रशासन क्या कार्रवाई कर रहा है?

नगर निकाय नोटिस जारी कर भवन खाली करा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर पानी-बिजली सप्लाई काटने की चेतावनी भी दी गई है।

Q5. लोग भवन खाली क्यों नहीं कर रहे?

आर्थिक मजबूरी, वैकल्पिक आवास की कमी और पुनर्विकास परियोजनाओं में देरी इसके प्रमुख कारण हैं।

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निष्कर्ष: मुंबई महानगर क्षेत्र में जर्जर इमारतों का संकट केवल भवनों की खराब स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन, पुनर्विकास नीति और आवासीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। मानसून नजदीक आने के साथ प्रशासनिक सतर्कता बढ़ी है, लेकिन असली चुनौती हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की होगी। आने वाले दिनों में सरकार, नगर निकाय और बिल्डरों के बीच समन्वय इस संकट की दिशा तय करेगा।

Source: नगर निकाय रिपोर्ट, स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट, प्रशासनिक बयान एवं स्थानीय प्राधिकरणों से प्राप्त जानकारी।

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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