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मित्तल पर ईडी का शिकंजा, एलपीयू समेत कई ठिकानों पर छापे

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 15 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जालंधर/चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल के ठिकानों पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। एजेंसी ने पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) परिसर सहित लवली ग्रुप से जुड़े कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फ़ेमा) के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में की गई है। ईडी की जालंधर और चंडीगढ़ टीमों ने संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। खास बात यह रही कि इस दौरान केंद्रीय एजेंसी ने स्थानीय पुलिस की कोई सहायता नहीं ली, जिससे कार्रवाई की गोपनीयता और संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा रहा है। अशोक मित्तल, जो एलपीयू के संस्थापक एवं चांसलर हैं, अपने भाइयों रमेश मित्तल और नरेश मित्तल के साथ इस शैक्षणिक समूह का संचालन करते हैं। छापेमारी की जद में यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक दफ्तरों के अलावा समूह से जुड़े अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान भी आए।


इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि ईडी ने एलपीयू परिसर के साथ-साथ जालंधर स्थित मित्तल के निजी आवास पर भी छापा मारा है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि यह “मोदी सरकार की सामान्य कार्यशैली” का हिस्सा है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में आप नेतृत्व ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में डिप्टी लीडर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इस पद पर राघव चड्ढा का स्थान लिया है। इस बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चाएं भी सामने आई थीं, हालांकि मित्तल ने इसे संगठन की सामान्य प्रक्रिया बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राघव चड्ढा पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। मित्तल ने कहा कि आप एक लोकतांत्रिक दल है, जहां समय-समय पर नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। ईडी की इस कार्रवाई ने जहां एक ओर कानूनी और आर्थिक पहलुओं पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर यह मामला आगामी चुनावी परिदृश्य में राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। फिलहाल एजेंसी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और खुलासे होने की संभावना है।

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