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महिला आरक्षण से पहले परिसीमन पर बवाल

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 16 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई, 16 अप्रैल। संसद में महिला आरक्षण विधेयक पेश किए जाने से ठीक पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। एम.के. स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े विधेयक की प्रति जलाकर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसे विपक्षी एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस कदम के जरिए साफ संदेश दिया कि दक्षिणी राज्यों के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। उनका आरोप है कि परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण विधेयक से जोड़ना संघीय ढांचे और राज्यों के बीच संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित महिला आरक्षण विधेयक में 33 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि परिसीमन के बाद जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होगा, जिससे दक्षिणी राज्यों की प्रतिनिधित्व क्षमता प्रभावित हो सकती है। स्टालिन ने अपने संबोधन में कहा कि यह केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण भारत की आवाज है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के लागू किया जाए और परिसीमन को अलग विषय के रूप में देखा जाए।


इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई विपक्षी दलों ने भी स्टालिन के रुख का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि महिला सशक्तिकरण के इस ऐतिहासिक कदम का विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है। संसद में विधेयक पेश होने से पहले ही शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है, जिससे महिला आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है।

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