मंदिरों का पैसा अब सिर्फ धार्मिक कार्यों पर, CM विजय ने रद्द किए 46 प्रोजेक्ट
- धन्नाराम चौधरी

- 22 जून
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थलपति विजय सरकार का बड़ा फैसला, ₹245 करोड़ के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स पर लगी रोक CM Vijay Cancels Temple Commercial Projects In Tamil Nadu
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई (तमिलनाडु) | 22 जून, 2026। तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री थलपति विजय ने एक ऐसा ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लिया है, जिसने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय सरकार ने पूर्ववर्ती डीएमके सरकार के उस बड़े फैसले को पलट दिया है, जिसके तहत मंदिरों के फंड से कमर्शियल प्रोजेक्ट्स बनाए जाने थे। टीवीके (तमिलगा वेत्री कझगम) सरकार ने ₹245.85 करोड़ की लागत वाले 46 प्रोजेक्ट्स की प्रशासनिक मंजूरी पूरी तरह रद्द कर दी है। इस फैसले के बाद मंदिर प्रशासन, धार्मिक संस्थाओं और हिंदू संगठनों के बीच खुशी की लहर देखी जा रही है।
HR&CE विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार रद्द किए गए प्रोजेक्ट्स में 29 मैरिज हॉल और 17 कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल थे। इन परियोजनाओं पर करीब ₹245 करोड़ खर्च किए जाने थे। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं पर अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था और मंदिरों को आर्थिक बोझ व वित्तीय संकट से बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। अब यह राशि मंदिरों के जीर्णोद्धार, सुरक्षा व्यवस्था, धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च की जाएगी।
मुख्यमंत्री थलपति विजय के इस फैसले को हिंदू संगठनों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने वाला कदम माना जा रहा है। लंबे समय से कई धार्मिक संगठन यह मांग कर रहे थे कि मंदिरों से मिलने वाला पैसा केवल धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों में ही उपयोग होना चाहिए। उनका तर्क था कि मंदिरों के फंड से शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और कमर्शियल भवन बनाना धार्मिक परंपराओं के विपरीत है।
एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी पूर्व डीएमके सरकार पर मंदिरों के पैसों के गलत उपयोग का आरोप लगाया था। अब विजय सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और धार्मिक प्राथमिकताओं को केंद्र में रखने का संकेत दिया है।
इस फैसले के पीछे कोर्ट के स्टे ऑर्डर और मंदिरों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को भी अहम कारण बताया गया है। हाल ही में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विधानसभा संबोधन में HR&CE विभाग में बड़े सुधारों की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि मंदिरों की चल-अचल संपत्तियों का उपयोग केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय की अंतिम मंजूरी के बाद आदेश जारी होते ही सोशल मीडिया पर उनकी जमकर सराहना शुरू हो गई। समर्थकों का कहना है कि यह फैसला मंदिर प्रशासन को मजबूत, पारदर्शी और धार्मिक मूल्यों के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
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