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चुप रहो, बेकार लोग…’ नारेबाजी पर भड़के खरगे, कांग्रेस कार्यक्रम में दिखी अंदरूनी कलह

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • Jun 22
  • 2 min read
डीके शिवकुमार के समर्थन में लगे नारों से नाराज हुए मल्लिकार्जुन खरगे, अनुशासनहीनता पर दी कार्रवाई की चेतावनी Mallikarjun Kharge Angry Over Slogans At Congress Event In Bengaluru

डीके शिवकुमार के समर्थन में लगे नारों से नाराज हुए मल्लिकार्जुन खरगे, अनुशासनहीनता पर दी कार्रवाई की चेतावनी Mallikarjun Kharge Angry Over Slogans At Congress Event In Bengaluru

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु (कर्नाटक) | 22 जून, 2026। कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर खुलकर सामने आ गई, जब बेंगलुरु में आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कार्यकर्ताओं पर भड़क उठे। नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरीप्रसाद के पदभार ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगने लगे, जिससे नाराज होकर खरगे ने मंच से ही कार्यकर्ताओं को फटकार लगा दी। उनका गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने कहा, “चुप रहो! बैठ जाओ! बेकार लोग… ऐसा लग रहा है जैसे पूरा देश तुम्हारे हाथ में आ गया हो।”


इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे नाराज नजर आ रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भीड़ को शांत कराने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाथ के इशारे से कार्यकर्ताओं को बैठने और शांति बनाए रखने का संकेत दिया।


खरगे ने मंच से स्पष्ट कहा कि यह कार्यक्रम किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी का है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता यदि अलग-अलग नेताओं के नाम के नारे लगाएंगे तो संगठन कमजोर होगा। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “अगर एक व्यक्ति एक नाम चिल्लाए और दूसरा दूसरा नाम, तो बाकी लोग यहां क्या कचरा साफ करने आए हैं?” खरगे का यह बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।


कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि नारेबाजी करने वाले कार्यकर्ताओं का पूरा फुटेज मौजूद है और पार्टी अनुशासन तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी हलचल देखी गई।


यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक कांग्रेस पहले से ही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व संघर्ष से गुजर रही है। मई 2028 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी हाईकमान ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया था। लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान जारी थी।


2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच टकराव खुलकर सामने आया था। उस समय हाईकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया था। बाद में रोटेशनल फॉर्मूले की चर्चाएं भी सामने आईं, जिसके तहत डीके शिवकुमार को ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कही गई थी।


पिछले कुछ महीनों में डीके शिवकुमार खेमे ने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार दबाव बनाया। आखिरकार कांग्रेस हाईकमान को झुकना पड़ा और 28 मई को सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता दिखाना चाहती है, लेकिन मंच से सामने आया यह विवाद पार्टी की अंदरूनी चुनौती को उजागर कर रहा है।

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