भवानीपुर से लेकर मालदा तक गरमाई सियासत, टीएमसी की मांग– आरओ हटाओ, रोड शो विवाद में 3 एफआईआर
- धन्ना राम चौधरी

- 4 अप्रैल
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भवानीपुर सीट से लेकर मालदा और कोलकाता तक कई घटनाओं ने चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।
सबसे पहले भवानीपुर विधानसभा सीट को लेकर नया विवाद सामने आया है। टीएमसी ने निर्वाचन अधिकारी (आरओ) को हटाने की मांग करते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा है। पार्टी का आरोप है कि संबंधित अधिकारी के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से करीबी संबंध हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। टीएमसी का कहना है कि अधिकारी पहले नंदीग्राम-2 में पदस्थ थे और सार्वजनिक मंचों पर उनकी निकटता देखी गई थी। इस सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ शुभेंदु अधिकारी चुनाव मैदान में हैं, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया है।
वहीं कूच बिहार जिले की मथाभंगा सीट से भाजपा प्रत्याशी निसीथ प्रामाणिक भी चर्चा में हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ हत्या, दंगा भड़काने और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े 16 आपराधिक मामले लंबित हैं। हालांकि अभी तक किसी भी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। भाजपा का दावा है कि ये मामले राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दर्ज किए गए हैं, खासकर तब जब प्रामाणिक ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।
इधर कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के दौरान हंगामा हो गया। भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी के नामांकन के अवसर पर आयोजित इस रोड शो का टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया, जिससे कई इलाकों में तनाव की स्थिति बन गई। कालीघाट और हजरा क्षेत्रों में नारेबाजी और टकराव देखने को मिला। पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें दो अलीपुर थाने और एक कालीघाट थाने में दर्ज की गई है। एक मामला आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा है।
चुनाव आयोग ने भी सख्ती दिखाते हुए पूर्व मेदिनीपुर जिले में तैनात संयुक्त बीडीओ ज्योत्सना खातून को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सिफारिश पर की गई है। हालांकि आयोग ने निलंबन के कारणों का खुलासा नहीं किया, लेकिन चुनाव से पहले इसे प्रशासनिक सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है।
उधर मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले ने राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है। इस मामले में एआईएमआईएम के पूर्व उम्मीदवार मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया है, जिन्हें मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। अब तक इस प्रकरण में 35 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 19 मामले दर्ज किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना के लिए एआईएमआईएम, भाजपा और आईएसएफ को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। यह पूरा विवाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध से शुरू हुआ था, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठा।
इस बीच टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने मतदाताओं के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम पूरक मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने भाजपा पर निर्वाचन आयोग पर दबाव बनाकर वैध मतदाताओं के नाम हटाने और बाहरी लोगों को जोड़ने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से मतदान प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है, जहां प्रशासनिक कार्रवाई, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कानून-व्यवस्था की घटनाएं मिलकर चुनाव को और अधिक संवेदनशील बना रही हैं।
_edited.jpg)



टिप्पणियां