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भक्ति में डूबा भागवत कथा महोत्सव, “राधे-राधे” से गूंजा पंडाल

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 2 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
People stand on a stage at a Hindi religious event, with a seated speaker and banner reading Shri Mad Bhagwat Katha.

भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के कथा महोत्सव में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, देवी राजनंदनी जी ने दिया धर्म और संस्कार का संदेश

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 2 जुलाई, 2026 बेंगलुरु में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का तृतीय दिवस गुरुवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के अद्भुत वातावरण में संपन्न हुआ। भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा पंडाल “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” और “हरि बोल” के गगनभेदी जयघोषों से भक्तिमय हो उठा। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर सनातन संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की।


कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, मंगल आरती और मधुर भजन-कीर्तन के साथ हुई। पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भक्ति-रस में सराबोर नजर आए। आयोजन के दौरान भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रेम सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने आरती और भजन-कीर्तन में सहभागिता करते हुए संगठन द्वारा समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने के प्रयासों की सराहना की।


इस अवसर पर विख्यात राष्ट्रीय कथा वाचिका परम पूज्या देवी राजनंदनी जी ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, प्रेम, सेवा, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य प्रकाश है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण और सत्संग व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता, अहंकार और अज्ञान को समाप्त कर आत्मिक शांति प्रदान करता है।


देवी राजनंदनी जी ने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए परिवार और समाज में संस्कार, सद्भाव एवं सेवा की भावना को मजबूत करने की बात कही। कथा के दौरान कई श्रद्धालु भाव-विभोर दिखाई दिए और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।


कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से आगामी कथा दिवसों में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की।

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