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बेंगलुरु में बढ़ा ‘खतरनाक कचरे’ का खतरा: एक साल में 92 नए उद्योग जुड़े, 1 लाख टन पार हुआ वेस्ट

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 22
  • 4 min read
“बेंगलुरु के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ता खतरनाक कचरा और प्रदूषण”
“बेंगलुरु के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ता खतरनाक कचरा और प्रदूषण”

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु/कर्नाटक, 22 मई। देश की टेक राजधानी Bengaluru अब तेजी से बढ़ते औद्योगिक विस्तार के साथ खतरनाक अपशिष्ट (Hazardous Waste) की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी Central Pollution Control Board (CPCB) की हालिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में बेंगलुरु शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खतरनाक कचरा उत्पन्न करने वाले उद्योगों की संख्या बढ़कर 2,400 हो गई है, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 2,308 था। यानी सिर्फ एक वर्ष में 92 नए उद्योग इस श्रेणी में शामिल हुए हैं।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन उद्योगों से निकलने वाले खतरनाक कचरे की मात्रा अब 1.01 लाख टन वार्षिक से अधिक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू स्तर पर निकलने वाले रासायनिक और विषैले कचरे को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा और कहीं अधिक हो सकता है।

अनेकल बना सबसे बड़ा ‘हॉटस्पॉट’, सरजापुर और महादेवपुरा भी सूची में ऊपर

सीपीसीबी रिपोर्ट के मुताबिक, Anekal क्षेत्र में सबसे अधिक खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न हुआ। कुल 1,01,191 टन कचरे में से लगभग 31,000 टन अकेले अनेकल से निकला। इसके बाद Sarjapur में करीब 20,000 टन और Mahadevapura में लगभग 10,000 टन खतरनाक कचरा उत्पन्न हुआ।

इसके अलावा अनेकल, बेंगलुरु पूर्व, बेंगलुरु दक्षिण, येलाहांका, बोम्मनहल्ली, डोड्डाबल्लापुरा, नेलमंगला, आरआर नगर, रामनगर, बेंगलुरु पश्चिम, दसराहल्ली, होसकोटे और पीन्या जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक कचरे के साथ-साथ घरेलू खतरनाक कचरे का भी वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं हो पा रहा है। घरों से निकलने वाले पेंट के डिब्बे, कीटनाशक कंटेनर, एक्सपायर्ड दवाइयां, बैटरियां और CFL बल्ब सामान्य कचरे में मिलाकर फेंके जा रहे हैं।

नए ठोस कचरा प्रबंधन (SWM) नियम 2026 के तहत अब स्रोत स्तर पर ही कचरे को चार भागों में अलग करना अनिवार्य किया गया है। इसमें “विशेष अपशिष्ट” नाम से नई श्रेणी जोड़ी गई है।

नई श्रेणी में शामिल होंगे ये अपशिष्ट

  • पेंट और केमिकल के ड्रम

  • कीटनाशक की बोतलें

  • CFL और ट्यूबलाइट

  • एक्सपायर्ड दवाएं

  • मरकरी थर्मामीटर

  • पुरानी बैटरियां

  • इस्तेमाल की गई सुइयां और सिरिंज

  • दूषित मेडिकल गेज

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में शहरी प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम दोनों तेजी से बढ़ सकते हैं।

कर्नाटक में 38% बढ़ा खतरनाक कचरा

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे Karnataka में 2024-25 के दौरान 4,280 उद्योगों से 5.94 लाख टन खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न हुआ। जबकि 2023-24 में 4,087 उद्योगों से 4.3 लाख टन कचरा निकला था।

मुख्य तथ्य

  • उद्योगों की संख्या में वृद्धि: लगभग 6.96%

  • खतरनाक कचरे में वृद्धि: लगभग 38%

  • कुल उपलब्ध खतरनाक अपशिष्ट: 9.66 लाख टन

  • वैज्ञानिक प्रबंधन हुआ: 9.39 लाख टन

  • 27,000 टन से अधिक कचरा बिना वैज्ञानिक उपचार के बचा

इतिहास पर नजर डालें तो 2020-21 में कर्नाटक में केवल 2.9 लाख टन खतरनाक कचरा उत्पन्न हुआ था। यानी चार वर्षों में यह मात्रा लगभग दोगुनी हो चुकी है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि खतरनाक अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान नहीं हुआ तो इसका असर भूजल, वायु गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। रासायनिक अपशिष्ट से त्वचा रोग, सांस संबंधी समस्याएं और जल प्रदूषण जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना संभव है, बशर्ते निगरानी और नियमों का पालन मजबूत हो।

आपके मन में उठ रहे सवाल | Q&A Section

Q1. खतरनाक अपशिष्ट क्या होता है?

ऐसा कचरा जिसमें विषैले, ज्वलनशील, रासायनिक या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व हों, उसे खतरनाक अपशिष्ट कहा जाता है।

Q2. बेंगलुरु में सबसे ज्यादा कचरा कहां उत्पन्न हुआ?

सीपीसीबी रिपोर्ट के अनुसार अनेकल क्षेत्र में सबसे अधिक लगभग 31,000 टन कचरा उत्पन्न हुआ।

Q3. क्या घरेलू कचरा भी खतरनाक हो सकता है?

हाँ। पेंट, बैटरी, दवाइयां, कीटनाशक और CFL बल्ब जैसे घरेलू उत्पाद खतरनाक श्रेणी में आते हैं।

Q4. नए SWM नियम 2026 में क्या बदला है?

अब घरों और संस्थानों को कचरे को स्रोत स्तर पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य होगा।

Q5. क्या कर्नाटक में स्थिति लगातार बिगड़ रही है?

आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में खतरनाक अपशिष्ट की मात्रा लगातार तेजी से बढ़ी है।

निष्कर्ष: बेंगलुरु का औद्योगिक विकास जहां आर्थिक मजबूती का संकेत है, वहीं बढ़ता खतरनाक कचरा भविष्य के लिए बड़ी पर्यावरणीय चेतावनी भी बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी से वैज्ञानिक निपटान, घरेलू स्तर पर कचरा पृथक्करण और सख्त निगरानी लागू नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में शहरी स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नए SWM नियम 2026 को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

स्रोत: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) संशोधित रिपोर्ट 2024-25।

मुख्य शब्द: खतरनाक कचरा बेंगलुरु, कर्नाटक प्रदूषण रिपोर्ट, CPCB रिपोर्ट 2025, औद्योगिक कचरा बेंगलुरु, ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026

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