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बारिश में ‘तालाब’ बन रही नाला रोड: दुकानों में घुस रहा गंदा पानी, लोगों ने खुद बनाई बाढ़ रोधी दीवारें

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 22
  • 4 min read
“बेंगलुरु के नाला रोड पर बारिश के बाद जलभराव और दुकानों में घुसता नाले का पानी”
“बेंगलुरु के नाला रोड पर बारिश के बाद जलभराव और दुकानों में घुसता नाले का पानी”

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु, 22 मई। Bengaluru के सिवान चेट्टी गार्डन स्थित नाला रोड पर हर बारिश के साथ जलभराव और गंदे पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि नाले के विकास और भूमिगत जल निकासी पाइपलाइन बिछाने में हुई लापरवाही के कारण पूरा इलाका बारिश के दौरान “छोटे तालाब” में बदल जाता है। हालात इतने खराब हैं कि कई दुकान मालिकों ने अपनी दुकानों और घरों को बचाने के लिए खुद के खर्च पर बाढ़ रोधी दीवारें तक बनवा ली हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि पहले इलाके में ऐसी स्थिति नहीं थी, लेकिन Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike (BBMP) द्वारा नाले के विकास कार्य और Bangalore Water Supply and Sewerage Board (BWSSB) द्वारा भूमिगत पाइपलाइन डालने के बाद जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित हो गई।

दुकानों में घुस रहा नाले का पानी, व्यापार प्रभावित

नाला रोड पर स्थित गार्डन मटन स्टॉल के व्यापारी उमर मोहम्मद अकबर ने बताया कि भारी बारिश के दौरान उनकी दुकान में नाले का पानी भर जाता है। उन्होंने कहा कि बारिश रुकने के बाद घंटों तक सफाई करनी पड़ती है, जिससे व्यापार और रोजमर्रा का काम प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा,

“जब भी तेज बारिश होती है, दुकान में पानी भर जाता है। ग्राहकों को परेशानी होती है और हमें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। अधिकारियों को जल्द समाधान करना चाहिए।”

इलाके के कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर छोटी-छोटी दीवारें और अवरोध बनाकर पानी रोकने की कोशिश की है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है।

‘मध्यम बारिश भी सड़क को तालाब बना देती है’

स्थानीय निवासी भास्कर नायडू ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि नाला रोड पर थोड़ी सी बारिश भी बड़े जलभराव में बदल जाती है।

उन्होंने कहा,

“बारिश शुरू होते ही पूरी सड़क पानी में डूब जाती है। मध्यम बारिश भी इलाके को छोटे तालाब में बदलने के लिए काफी है। अधिकारियों ने विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की।”

निवासियों का आरोप है कि नालों से गाद हटाने का काम समय पर नहीं होने के कारण पानी का प्रवाह रुक जाता है और गंदा पानी सीधे दुकानों और घरों में घुस जाता है।

29 अप्रैल की घटना ने बढ़ाई चिंता

29 अप्रैल को Bengaluru में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि के दौरान दो लोग नाले में बहने से बाल-बाल बच गए थे। स्थानीय व्यापारी वरदराज ए ने बताया कि पिछले चार वर्षों से नाले की ठीक से सफाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा,

“नाला पूरी तरह पानी से भरा हुआ था और दो लोग उसमें बहने वाले थे। स्थानीय लोगों ने मिलकर उन्हें बचाया। अगर समय रहते गाद और कचरा हटाया जाता, तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।”

इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

AAP ने उठाए सवाल, गाद हटाने की मांग तेज

Aam Aadmi Party की नेता ने भी नाला रोड की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है और हर बारिश में निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा,

“तेज बारिश के दौरान लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। नाले की तत्काल सफाई और गाद हटाना बेहद जरूरी है।”

अधिकारियों का दावा—सफाई कार्य शुरू

वहीं, Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike के सेंट्रल सिटी कॉर्पोरेशन के शिवाजीनगर और शांतिनगर क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता ने बताया कि बरसाती जल निकासी नालियों की सफाई शुरू कर दी गई है।

उन्होंने कहा,

“हलासुरु झील के किनारे स्थित नाले की सफाई का काम जारी है। नाला रोड के किनारे की नाली की सफाई भी जल्द शुरू की जाएगी।”

हालांकि, स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि हर वर्ष बारिश के बाद ही सफाई अभियान क्यों शुरू होता है और पहले से तैयारी क्यों नहीं की जाती।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शहरी जलनिकासी विशेषज्ञों के अनुसार, अवैज्ञानिक निर्माण, समय पर डी-सिल्टिंग नहीं होना और अनियोजित पाइपलाइन कार्य शहरों में जलभराव की बड़ी वजह बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नालों की नियमित सफाई, जल निकासी मानकों का पालन और निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जांच नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

Q&A | आपके मन में उठ रहे सवाल

Q1. नाला रोड पर जलभराव की मुख्य वजह क्या है?

स्थानीय लोगों के अनुसार नालों की सफाई में देरी, गाद जमा होना और अवैज्ञानिक विकास कार्य इसकी मुख्य वजह हैं।

Q2. क्या पहले भी इलाके में ऐसी समस्या थी?

निवासियों का दावा है कि BBMP और BWSSB के कार्य शुरू होने से पहले इतनी गंभीर समस्या नहीं थी।

Q3. क्या किसी की जान को खतरा हुआ है?

हाँ। 29 अप्रैल की भारी बारिश के दौरान दो लोग नाले में बहने से बाल-बाल बच गए थे।

Q4. प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?

अधिकारियों के अनुसार नालों की सफाई और गाद हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।

Q5. दुकानदार खुद दीवारें क्यों बना रहे हैं?

बारिश के दौरान दुकानों में पानी घुसने से बचाने के लिए कई व्यापारियों ने स्वयं खर्च कर बाढ़ रोधी दीवारें बनाई हैं।

निष्कर्ष: नाला रोड की स्थिति सिर्फ एक सड़क की समस्या नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरों में अव्यवस्थित शहरी विकास और कमजोर जलनिकासी प्रबंधन की बड़ी तस्वीर भी दिखाती है। स्थानीय लोग अब केवल अस्थायी सफाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्री-मानसून तैयारी, नियमित डी-सिल्टिंग और निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जाए, तो ऐसे इलाकों को हर बारिश में डूबने से बचाया जा सकता है।

स्रोत: स्थानीय निवासियों, व्यापारियों, बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी।

मुख्य शब्द: बेंगलुरु में बाढ़, नाला रोड पर जलभराव, BBMP जल निकासी समस्या, बेंगलुरु बारिश की खबरें, शिवनचेट्टी गार्डन में बाढ़

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