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बंगाल में गिरफ्तारी विवाद पर गरजे पूर्व DGP राजीव कुमार

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 23
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावी सरगर्मी के बीच एक नया विवाद उभरकर सामने आया है। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य Rajeev Kumar ने कथित अवैध गिरफ्तारियों को लेकर पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि कानून के दायरे से बाहर जाकर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें अदालत तक घसीटा जाएगा।

बुधवार को जारी बयान में Rajeev Kumar ने दावा किया कि राज्य में प्रथम चरण के मतदान से ठीक पहले 500 से अधिक लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया है। उनके अनुसार, ये गिरफ्तारियां पुलिस पर्यवेक्षकों के मौखिक निर्देशों पर की गईं, जो न केवल नियमों के विरुद्ध हैं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती हैं। राजीव कुमार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा चुनावी कानून और दंड प्रक्रिया संहिता के तहत पर्यवेक्षकों को सीधे गिरफ्तारी के आदेश देने का अधिकार नहीं है। उनका दायित्व केवल निगरानी करना और रिपोर्ट प्रस्तुत करना होता है, न कि प्रशासनिक कार्रवाई का निर्देश देना। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पर्यवेक्षक अपनी सीमाओं से बाहर जाकर काम कर रहे हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है।


पूर्व डीजीपी ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि चाहे वे किसी भी पद पर हों या किसी भी राजनीतिक संरक्षण में हों, उनकी पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे राज्यों के कैडर से जुड़े अधिकारियों को भी किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी। इस मुद्दे को लेकर Rajeev Kumar ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी Manoj Agarwal से मुलाकात की। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार Shashi Panja और नेता Subhasish Chakraborty भी मौजूद रहे। राजीव कुमार के अनुसार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी यह स्वीकार किया कि पर्यवेक्षकों को इस तरह के निर्देश देने का अधिकार नहीं है। वहीं, राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee भी पहले ही चुनावी सभाओं में इस मुद्दे को उठाते हुए प्रशासन को सतर्क कर चुकी हैं। उन्होंने कथित अवैध गिरफ्तारियों को लोकतंत्र के खिलाफ करार दिया था। बंगाल में चुनावी माहौल के बीच उठे इस विवाद ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि इस मामले में चुनाव आयोग और प्रशासन क्या रुख अपनाते हैं और क्या आरोप-प्रत्यारोप के बीच कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है।


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