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बंगाल मदरसा जांच: ईडी और यूपी ATS की कार्रवाई, विदेशी फंडिंग की जांच तेज

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 18 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Imam in white cap reads the Quran to boys seated in a mosque, with a calm, focused study atmosphere.
ईडी का दावा—छापेमारी में नकदी और सोना बरामद; विदेशी फंडिंग, कथित घुसपैठ और दस्तावेज़ों के दुरुपयोग के आरोपों की जांच जारी

(ईडी एवं यूपी एटीएस की संयुक्त जांच कार्रवाई का सांकेतिक चित्र।)

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता | 18 जुलाई, 2026 बंगाल मदरसा जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। जांच एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी कर विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और कथित अवैध गतिविधियों की जांच शुरू की है। एजेंसियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्राप्त धन का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया और क्या किसी प्रकार के वित्तीय अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग के नियमों का उल्लंघन हुआ है।


ईडी के अनुसार, उत्तर 24 परगना जिले के हरोआ क्षेत्र स्थित अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम मदरसे में की गई छापेमारी के दौरान लगभग 40 लाख रुपये नकद और करीब 180 ग्राम सोने के सिक्के बरामद किए गए। एजेंसी का कहना है कि बरामद संपत्ति के स्रोत के संबंध में पूछताछ की जा रही है तथा जांच अभी जारी है।


जांच एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ संस्थाओं और ट्रस्टों के माध्यम से विदेशों से धन प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग कथित रूप से अवैध गतिविधियों में किया गया। इन आरोपों में बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की कथित अवैध घुसपैठ में सहायता, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने तथा भारत में अवैध रूप से बसाने जैसे गंभीर दावे शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों की न्यायालय द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।


इसी क्रम में यूपी एटीएस ने उत्तर 24 परगना के हसनाबाद क्षेत्र में भी तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान कुछ वित्तीय दस्तावेजों की जांच की गई तथा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई। एजेंसियों का कहना है कि विदेशी फंडिंग के उपयोग और उसके वास्तविक उद्देश्य की पड़ताल की जा रही है।


दूसरी ओर, संबंधित पक्षों और कुछ सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा बताया है। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है।


राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज है। पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से संचालित संस्थानों और विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच पहले से विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

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