पूर्व मुख्यमंत्री बोले- हाईकमान जो जिम्मेदारी देगा, सहर्ष स्वीकार करूंगा;
- धन्नाराम चौधरी

- 24 जून
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बयान के बाद सियासी गलियारों में तेज हुई चर्चाएं
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जयपुर | 23 जून, 2026। Ashok Gehlot Statement को लेकर राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब वह पार्टी से कभी किसी पद की मांग नहीं करेंगे। गहलोत के इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकार इसे राजस्थान कांग्रेस में चल रही अंदरूनी हलचल और आगामी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि उन्हें पार्टी और जनता से जीवन में सब कुछ मिला है। अब उनका यह कर्तव्य बनता है कि वे स्वयं किसी पद की इच्छा न रखें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस हाईकमान उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा, चाहे वह राजस्थान में हो या दिल्ली में संगठन से जुड़ी हो, वे उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे।
गहलोत ने कहा, “मैं देश का सबसे संतुष्ट राजनीतिज्ञ हूं। इंदिरा गांधी के समय ही मुझे केंद्रीय मंत्री बनने का अवसर मिला था। पार्टी ने मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, सांसद बनाया और जनता ने हमेशा भरोसा जताया। ऐसे में अब किसी पद की लालसा रखने का कोई कारण नहीं है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में राजस्थान की जनता के प्रति गहरा जुड़ाव भी जाहिर किया। उन्होंने राजस्थानी अंदाज में कहा, “मैं थांसू दूर नहीं।” गहलोत ने कहा कि चाहे वे दिल्ली में रहें, जयपुर में हों या विदेश यात्रा पर जाएं, राजस्थान की जनता से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं हो सकता।
राजनीतिक गलियारों में गहलोत के इस बयान को बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल, राजस्थान कांग्रेस में पिछले कुछ समय से नेतृत्व और संगठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में गहलोत का यह बयान कई नए राजनीतिक संकेत दे रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच भी इस बयान को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हो रही हैं।
अशोक गहलोत ने इस दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उन पर भरोसा जताया और लगातार पांच-पांच साल तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में ऐसा कम देखने को मिलता है कि किसी मुख्यमंत्री को लगातार पूरा कार्यकाल मिले।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह बयान केवल भावनात्मक नहीं बल्कि संगठनात्मक राजनीति का बड़ा संकेत भी हो सकता है। राजस्थान कांग्रेस में भविष्य की रणनीति, नेतृत्व संतुलन और चुनावी समीकरणों को देखते हुए इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
फिलहाल, कांग्रेस पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजस्थान की राजनीति में अशोक गहलोत के इस बयान ने नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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