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नरसी जैसा भक्त नहीं हुआ : महामंडलेश्वर चेतनगिरी जी महाराज

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 15 अग॰
  • 1 मिनट पठन

भारतार्थ खबर। बेंगलुरु संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)


डेटलाइन: बेंगलुरु | 15 अगस्त 2026। बेंगलुरु सिटी माली समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में गुडसेड रोड स्थित माली समाज भवन परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस नीलकंठ महादेव मंदिर, संतोष आश्रम, सोजत सिटी के महामंडलेश्वर श्री चेतनगिरी जी महाराज ने भक्त नरसी मेहता की अद्भुत कृष्ण भक्ति और समर्पण का भावपूर्ण वर्णन किया।


महामंडलेश्वर श्री चेतनगिरी जी महाराज ने कहा कि नरसी मेहता जैसा भक्त इस धरती पर कोई नहीं हुआ। उन्होंने अपना सर्वस्व प्रभु श्रीकृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया। भक्ति के मार्ग में अनेक कठिनाइयां और कष्ट आए, लेकिन नरसी मेहता कभी अपने आराध्य से विमुख नहीं हुए।


उन्होंने नरसी मेहता की प्रसिद्ध हुंडी और नानी बाई के मायरे का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने अनन्य भक्त की लाज रखने के लिए साँवल सेठ का रूप धारण कर हुंडी स्वीकार की। वहीं नानी बाई के मायरे के प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के साथ आने की कथा भक्तों को भाव-विभोर कर देती है।


महाराज ने कहा कि भगवान को अर्पित किया गया सच्चा भाव और समर्पण अनेक गुना फल प्रदान करता है। नरसी मेहता का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची भक्ति में विश्वास रखने वाले भक्त को भगवान कभी अकेला नहीं छोड़ते।


उन्होंने कहा कि नरसी मेहता ने अपना पूरा जीवन श्रीकृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया। उनका एकनिष्ठ भाव, त्याग और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत है।


श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर माली समाज ट्रस्ट के ट्रस्टीगण, विशिष्ट समाजबंधु एवं बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।

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