नम्मा मेट्रो में शोर मचाया तो भरना पड़ेगा जुर्माना!
- धन्नाराम चौधरी

- 19 जुल॰
- 2 मिनट पठन

स्पीकर पर गाने, तेज आवाज में बात और चिल्लाने पर अब ₹2,500 तक का जुर्माना, 19 जुलाई से नए नियम लागू
भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 19 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। अगर आप नम्मा मेट्रो में सफर के दौरान स्पीकरफोन पर वीडियो देखते हैं, तेज आवाज में संगीत सुनते हैं या जोर-जोर से बातचीत करते हैं, तो अब आपकी यह आदत महंगी पड़ सकती है। 19 जुलाई 2026 से लागू नए नियमों के तहत ऐसे यात्रियों पर ₹2,500 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) द्वारा लागू किए गए ये संशोधित प्रावधान सार्वजनिक परिवहन में अनुशासन और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 में संशोधन किए गए हैं। इसके बाद अब विभिन्न उल्लंघनों पर ₹25,000 तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। यह व्यवस्था केवल नम्मा मेट्रो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशभर की सभी मेट्रो रेल प्रणालियों पर लागू होगी।
नए नियमों के अनुसार यदि कोई यात्री स्पीकर मोड पर संगीत या वीडियो चलाता है, चिल्लाता है, अपशब्दों का प्रयोग करता है, सार्वजनिक स्थान पर थूकता है, मेट्रो के फर्श पर बैठता है या मेट्रो संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उस पर ₹2,500 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा नशे की हालत में यात्रा करना, उपद्रव करना, अभद्र व्यवहार करना या आपत्तिजनक सामग्री लेकर चलना भी अब पहले की तुलना में अधिक महंगा साबित होगा। बिना अनुमति पोस्टर या बैनर लगाने पर ₹10,000 तक, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने पर ₹5,000 तक तथा मेट्रो ट्रैक पर चलने पर ₹20,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
टिकट संबंधी नियमों को भी कड़ा किया गया है। टिकट में हेरफेर, जालसाजी, अवैध बिक्री या स्थानांतरण करने पर ₹20,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं हेरफेर किए गए टिकट का उपयोग करने पर ₹5,000 तक तथा अन्य टिकट उल्लंघनों पर ₹25,000 तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
केंद्र सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। साथ ही छोटे अपराधों में जेल की बजाय आर्थिक दंड की व्यवस्था लागू कर कानून को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। यदि किसी यात्री को लगाए गए जुर्माने पर आपत्ति हो, तो वह 30 दिनों के भीतर संबंधित उच्च अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है।
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