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GBA चुनाव में देरी पर बवाल, BNP का जोरदार प्रदर्शन

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 19 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Protesters hold oversized Bank of Bengaluru check demanding representation, wearing leader masks, with placards and raised fists.

फ्रीडम पार्क में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, ग्रेटर बेंगलुरु प्रशासन (GBA) चुनाव तुरंत कराने की उठी मांग

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 19 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। ग्रेटर बेंगलुरु प्रशासन (GBA) चुनाव में लगातार हो रही देरी को लेकर शनिवार को राजधानी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में राजनीतिक माहौल गरमा गया। बेंगलुरु नव निर्माण पार्टी (BNP) के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं और सदस्यों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार से GBA चुनावों की तत्काल घोषणा और निष्पक्ष तरीके से जल्द चुनाव कराने की मांग की।


प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वर्षों से नगर निकाय चुनाव नहीं होने के कारण 1.3 करोड़ से अधिक बेंगलुरु निवासी निर्वाचित पार्षदों और जवाबदेह स्थानीय नेतृत्व से वंचित हैं। उनका कहना है कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों के अभाव में शहर की सड़कें, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, यातायात और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं।


प्रदर्शन के दौरान BNP ने एक अनोखे और व्यंग्यात्मक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व बेंगलुरु विकास मंत्री बसवराज बोम्मई का प्रतीकात्मक रूप धारण करने वाले प्रतिनिधियों का "सम्मान" किया। इसके बाद नागरिकों की ओर से उन्हें ₹20,000 करोड़ का प्रतीकात्मक (नकली) चेक भेंट किया गया।


पार्टी नेताओं ने कहा कि यह व्यंग्यात्मक सम्मान वास्तव में सरकारों द्वारा बार-बार नगर निकाय चुनाव टालने के विरोध का प्रतीक है। उनका आरोप है कि लगातार हो रही देरी से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई है और नागरिकों की समस्याओं का समाधान प्रभावित हुआ है।


BNP का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्थानीय निकाय चुनाव समय पर होना आवश्यक है। पार्टी ने सरकार से मांग की कि बिना किसी और विलंब के ग्रेटर बेंगलुरु प्रशासन (GBA) चुनाव की अधिसूचना जारी कर जल्द मतदान कराया जाए ताकि नागरिकों को उनका लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मिल सके।


इस प्रदर्शन ने एक बार फिर बेंगलुरु में स्थानीय स्वशासन, जवाबदेही और नागरिक सुविधाओं को लेकर चल रही बहस को तेज कर दिया है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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