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चेस्टर हिल विवाद: पत्र वापसी पर जयराम के तीखे सवाल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 5
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

मंडी। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में चर्चित ‘चेस्टर हिल जमीन विवाद’ को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार से जुड़े चेहरों के बेनकाब होते ही सरकार और कांग्रेस संगठन में हड़कंप मच गया है।


मंडी में जारी बयान में जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने के बजाय सरकार साक्ष्यों को दबाने और दोषियों को संरक्षण देने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि “चेस्टर हिल जमीन घोटाले में जिस प्रकार घटनाक्रम सामने आया है, वह सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


विवादित पत्र की वापसी पर उठे सवाल

मुख्य सचिव द्वारा जारी विवादास्पद पत्र को अचानक वापस लिए जाने पर भी नेता प्रतिपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी थी, जिसके चलते इस पत्र को आनन-फानन में वापस लेना पड़ा। क्या यह पत्र अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिखा गया था? और सबसे अहम, यह पत्र किसके इशारे पर जारी किया गया था तथा इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी?


‘एकतरफा निर्णय’ पर सरकार घिरी

जयराम ठाकुर ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) अवकाश पर थे, तब कार्यभार संभाल रहे अधिकारी ने बिना दोनों पक्षों को सुने जल्दबाजी में फैसला क्यों सुनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एकतरफा निर्णय किसी विशेष हित को साधने के उद्देश्य से लिया गया प्रतीत होता है।


मुख्यमंत्री की भूमिका पर भी निशाना

उन्होंने मुख्यमंत्री की भूमिका पर भी कड़ा एतराज जताया। जयराम ठाकुर ने कहा कि जब पूरा मामला मीडिया और सोशल मीडिया में उजागर हो चुका था, तब मुख्यमंत्री का खुद को अनभिज्ञ बताना और संबंधित अधिकारियों का लगातार बचाव करना संदेह को और गहरा करता है।


‘पत्र वापसी केवल लीपापोती’

नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पत्र की वापसी महज लीपापोती है। असली मुद्दा उस प्रक्रिया और मंशा का है, जिसके तहत यह निर्णय लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस पूरे मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार को हर सवाल का जवाब देना होगा। इस बयान के बाद चेस्टर हिल विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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