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चेन्नई में भारतीय नववर्ष संवत् 2083 का भव्य स्वागत, महिलाओं की कलश यात्रा व सनातन सम्मेलन में गूंजे संस्कृति और एकता के संदेश

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 15
  • 2 min read

Updated: Mar 18


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com)


चेन्नई। भारतीय नववर्ष संवत् 2083 के आगमन के अवसर पर रविवार, 15 मार्च 2026 को चेन्नई के साहूकारपेट क्षेत्र में भव्य भारतीय नववर्ष सम्मेलन एवं सनातन जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आर्य समाज भवन में वैदिक परंपरा के अनुसार हवन-यज्ञ की आहुति के साथ हुई। इसके बाद सर्व समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर गाजे-बाजे और नववर्ष के मंगल गीतों के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली।


यह जागरूकता रैली साहूकारपेट की विभिन्न गलियों से होते हुए जयघोष और धार्मिक नारों के बीच आगे बढ़ी और अंत में राजेश्वर भवन पहुंचकर विराट हिंदू सम्मेलन का रूप ले लिया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं और सनातन धर्मावलंबियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।


सम्मेलन का शुभारंभ संतों एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में संत श्री जय गोपीनाथ दासजी प्रभु के सान्निध्य में अनेक धार्मिक और सामाजिक हस्तियों की उपस्थिति रही।


मुख्य अतिथि प्यारेलाल पितलिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति विविधताओं में एकता का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व और सांस्कृतिक समारोह समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। यदि नई पीढ़ी इन आयोजनों में सक्रिय भागीदारी करेगी तो देश की सांस्कृतिक और सामाजिक शक्ति और मजबूत होगी।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गायत्रीविदाचार्य निरंजन के. वर्मा (पंचगव्य विद्यापीठम, कांचीपुरम) ने हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं, वेदों और गौ आधारित जीवन पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पंचगव्य, प्राकृतिक कृषि, नैसर्गिक चिकित्सा और गुरुकुलीय शिक्षा जैसी व्यवस्थाएं भारत को निरोगी और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन मूल्यों को अपनाया जाए तो भारत पुनः विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हो सकता है।

विशिष्ट अतिथि आचार्य विकास आर्य (सचिव, गवर्निंग बोर्ड, डीएवी ग्रुप चेन्नई) ने अपने संबोधन में कहा कि वेद-पुराणों की परंपरा आदि काल से चली आ रही है और इनका प्रचार-प्रसार करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने सांस्कृतिक एकता, सनातन मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।


सम्मेलन के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न महिला मंडलों और कलाकारों ने भाग लेकर भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में पारंपरिक गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।


यह आयोजन आर्य समाज के तत्वावधान में भारतीय संस्कृति संरक्षण समिति द्वारा किया गया, जिसमें समिति के सभी कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संभाला। कार्यक्रम के अंत में समिति के सचिव प्रवीण द्विवेदी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।


समारोह का संचालन हनुमान राम पटेल, शोभा आर्य और भारत रावल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की जानकारी दिनेश चौधरी, चेन्नई द्वारा दी

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